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बर्बाद होने के कगार पर एक लाख ग्रीन कार्ड, टीम बाइडेन की लापरवाही भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर भारी

ग्रीन कार्ड होल्डर को अमेरिका में स्थायी तौर पर रहने की सुविधा दी जाती है और ये अमेरिका में रहने वाले इमीग्रेंट्स के लिए एक तरह से आधिकारिक दस्तावेज है

वॉशिंगनट, अगस्त 06: अमेरिका में इस साल लगभग एक लाख ग्रीन कार्ड्स के बर्बाद होने की संभावना है। दो महीने के भीतर ये ग्रीन कार्ड्स बर्बाद हो जाएंगे। जो बाइडेन प्रशासन की भारी लापरवाही भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के कैरियर पर बुरी तरह से भारी पड़ने वाली है, जिसकी वजह से आईटी प्रोफेशनल्स काफी नाराज बताए जा रहे हैं। भारतीय समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में अब वैथ स्थायी निवासी बनने का इंतजार अब कई सालों से लिए बढ़ गया है। आपको बता दें कि ग्रीन कार्ड को परमानेंट रेसिडेंट कार्ड भी कहा जाता है, जिसके जारी होने पर कोई माइग्रेट अमेरिका का स्थायी निवासी माना जाता है।

क्यों बर्बाद हो रहे एक लाख ग्रीन कार्ड

क्यों बर्बाद हो रहे एक लाख ग्रीन कार्ड

ग्रीन कार्ड होल्डर को अमेरिका में स्थायी तौर पर रहने की सुविधा दी जाती है और ये अमेरिका में रहने वाले इमीग्रेंट्स के लिए एक तरह से आधिकारिक दस्तावेज है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक अगर इस साल इतनी बड़ी संख्या में ग्रीन कार्ड बर्बाद हुए तो कोटा बढ़ाने का कोई फायदा नहीं होगा। इस साल ग्रीन कार्ड के लिए कोटा 1 लाख 40,000 से बढ़ाकर 2 लाख 61 हजार 500 कर दिया गया था, लेकिन अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाओं ने जिस गति से आवेदनों को लेकर काम किया है, उसमें भारी लेटलतीफी के साथ लापरवाही बरती गई है, और इसकी वजह से एक लाख ग्रीन कार्ड बर्बाद हो जाएंगे। वीजा उपयोग के निर्धारण के प्रभारी राज्य कार्यालय विभाग द्वारा संख्या की पुष्टि की गई है।

बर्बादी रोकने के लिए मुकदमा दायर

बर्बादी रोकने के लिए मुकदमा दायर

एक लाख ग्रीन कार्ड की बर्बादी को रोकने के लिए 125 भारतीय और चीनी नागरिकों के एक समूह ने एक अमेरिका में एक मुकदमा दायर किया है, जिसमें बताया गया है कि 2020 में कोरोना महामारी की वजह से प्रक्रिया काउफी धीमी हो गई थी और 2020 में परिवार-आधारित ग्रीन कार्ड की असामान्य रूप से कम संख्या को मंजूरी दी गई। एशियाई अमेरिकी और प्रशांत द्वीपसमूह समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से मुलाकात की और ग्रीन कार्ड के बर्बाद होने का मुद्दा भी उठाया है। पीटीआई ने भारतीय प्रोफेशनल संदीप पवार के हवाले से कहा है कि ''अगर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन कोई कदम नहीं उठाते हैं तो इस साल उपलब्ध अतिरिक्ति एक लाख ग्रीन कार्ड बर्बाद हो जाएंगे। हालांकि, जब व्हाइट हाउस से इस बाबत सवाल पूछा गया तो कोई जवाब नहीं मिला।

बाइडेन प्रशासन जिम्मेदार

बाइडेन प्रशासन जिम्मेदार

भारतीय प्रोफेशनल संदीव पवार ने कहा कि अमेरिका में कई लोगों के जीवनसाथी रहते हैं, उनके माता-पिता रहते हैं, खासकर ज्यादातर महिलाएं, जो तबतक काम नहीं कर सकती हैं, जब तक उन्हें स्थायी नागरिकता यानि ग्रीन कार्ड नहीं मिल जाता है। वहीं, कई लोग ऐसे हैं, जिनके साथ उनके बुजुर्ग माता-पिता रहते है। जब तक उनके पास वीजा है, तभी तक वो अमेरिका में रह सकते हैं और जैसे ही उनका वीजा खत्म होता है, उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अगर ये ग्रीन कार्ड नहीं जारी किए जाते हैं, तो इसका काफी ज्यादा नुकसान होगा। वहीं, द वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में काटो इंस्टीट्यूट के एक रिसर्चर डेविड जे बियर ने दावा करते हुए कहा कि जो बाइडेन प्रशासन ही एक लाख ग्रीन कार्ड की बर्बादी के लिए जिम्मेदार है। और प्रशासन को ग्रीन कार्ड्स की बर्बादी रोकने के लिए उपाय करने चाहिए।

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