ओमिक्रॉन वेरिएंट के दुनिया में दो हफ्ते पूरे, अभी तक इस वायरस को लेकर क्या-क्या पता चला है?
9 दिसंबर तक आई रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वेरिएंट अभी तक दुनिया के 63 देशों में फैल चुका है और डब्ल्यूएचओ ने कोरोना के इस वेरिएंट को 'चिंताजनक' कहा है।
नई दिल्ली, दिसंबर 13: चीन से निकलकर कोरोना वायरस पूरी दुनिया में पिछले दो सालों से उपद्रव मचा रहा है और इस चीन कोरोना वायरस के कई वेरिएंट अलग अलग जगहों से निकल रहे हैं और लोगों की जान ले रहे हैं। डेल्टा वेरिएंट के बाद ओमिक्रॉन वेरिएंट इस वक्त दुनिया की मुसीबतें बढ़ा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि अब तक 63 देशों में कोरोनावायरस का ओमिक्रॉन संस्करण पाया गया है और यह फैलने की गति में डेल्टा को पीछे छोड़ देगा। ऐसे में दो हफ्ते में 63 देशों में फैल चुका इस वेरिएंट के बारे में अभी तक कितना पता चला है, आईये जानते हैं। (सभी तस्वीर फाइल)

ओमिक्रॉन वेरिएंट के दो हफ्ते
9 दिसंबर तक आई रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस का ओमिक्रॉन वेरिएंट अभी तक दुनिया के 63 देशों में फैल चुका है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट सभी 6 रीजन में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है। यूनाइटेड नेशंस के स्वास्थ्य विभाग डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि, अभी तक ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर जो शुरूआती जानकारियां मिली हैं, उससे पता चल रहा है कि, कोराना वायरस का ये वेरिएंट वैक्सीन की क्षमता को घटा रहा है, लेकिन वैज्ञानिकों ने कहा है कि, अभी तक पता चला है कि, कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन वेरिएंट कम खतरनाक है। डब्ल्यूएचओ ने 26 नवंबर को बी.1.2.529 वेरिएंट को 'चिंताजनक' करार दिया था।

क्या तेजी से फैलता है ओमिक्रॉन वेरिएंट?
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, डेल्टा वेरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन वेरिएंट के फैलने की रफ्तार ज्यादा है। डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, "यह दक्षिण अफ्रीका में डेल्टा संस्करण की तुलना में तेजी से फैल रहा है जहां डेल्टा वेरिएंट कम तेजी से फैला था।'' लेकिन डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि, ''स्टडी में पता चला है कि, जिन देशों में पहले से ही डेल्टा वेरिएंट के ज्यादा मामले आ रहे हैं, उन देशों में ओमिक्रॉन वेरिएंट और भी तेज रफ्तार से फैल रह है''। डब्ल्यूएचओ ने इसके लिए यूनाइटेड किंगडम का हवाला दिया है, जहां ओमिक्रॉन वेरिएंट काफी तेजी से फैल रहा है''।

तीन गुना तेजी से फैलता ओमिक्रॉन
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि, दक्षिण अफ्रीका का गौटेंग प्रांत, जो अभी ओमिक्रॉन वेरिएंट का केन्द्र बना हुआ है, वहां ओमिक्रॉन की रफ्तार 3 है। इसका मतलब ये हुआ कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट से प्रभावित एक शख्स तीन लोगों को संक्रमित कर रहा है। इसीलिए दक्षिण अफ्रीका में कोरोना वायरस के मामले काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और दक्षिण अफ्रीका में अभी जितने मरीज सामने आ रहे हैं, उसने पिछले सभी लहरों को पीछे छोड़ दिया है। वहीं, जापान में स्टडी से पता चला है कि, यहां ओमिक्रॉन वेरिएंट के फैलने की रफ्तार 4.2 है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, महामारी विज्ञानी जॉन एडमंड्स ने कहा है कि म्यूटेंट वायरस ओमिक्रॉन दक्षिण अफ्रीका की तुलना में इंग्लैंड में तेजी से फैल सकता है, ब्रिटेन में क्रिसमस के दिन संभवतः 60,000 से अधिक मामले हर दिन सामने आ सकते हैं।

क्या ओमिक्रॉन संक्रमण जानलेवा है?
डॉक्टरों ने ओमिक्रॉन संक्रमित रोगियो में थकान और सिरदर्द को नोट किया है। जबकि, डेल्टा वेरिएंट से संक्रमित रोगियों में कई और जानलेवा लक्षण दिखाई दे रहे थे। डेल्टा मरीजों के शरीर का पल्स रेट तेजी से गिरता है, शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा तेजी से कम होने लगती है और मरीजों को सांस लेने में तकलीफ का सामना करता है, जिससे मरीजों की जान जाने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है, जबकि ओमिक्रॉन के मरीजों में अभी तक ऐसे लक्षण देखने को नहीं मिले हैं। दक्षिण अफ्रीका के तीन सबसे बड़े निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि, ओमिक्रॉन संक्रमित मरीज पहले की लहरों की तुलना में कम परेशान हैं। ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर बहुत कम लोग हैं और मौतों में मामूली वृद्धि हुई है।

डेल्टा की तुलना में कम गंभीर
डब्ल्यूएचओ ने शुरूआती आंकड़ों के आधार पर ओमिक्रॉन वेरिएंट पर कहा कि, "ओमिक्रॉन की गंभीरता को लेकर अभी भी सीमित आंकड़े हैं, जबकि दक्षिण अफ्रीका के प्रारंभिक निष्कर्षों से पता चलता है कि यह डेल्टा की तुलना में कम गंभीर हो सकता है, और यूरोपीय संघ / ईईए में अब तक रिपोर्ट किए गए सभी मामले हल्के मामलों के साथ मरीज मिल रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ओमिक्रॉन किस हद तक स्वाभाविक रूप से कम विषैला हो सकता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, ओमिक्रॉन को लेकर आखिरी नतीजे तक पहुंचने के लिए अभी और आंकड़ों की जरूरत होगी।

ओमिक्रॉन पर वैक्सीन कितना असरदार?
रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों को पता चला है कि, ओमिक्रॉन वेरिएंट वैक्सीन की क्षमता को पूरी तरह से नहीं, बल्कि बहुत हद तक सीमित कर देता है। लेकिन, टीकाकरण के बाद शरीर में जितना मात्रा में एंटीबॉडी रहता है, वो ओमिक्रॉन वेरिएंट के वायरस को खत्म करने में सक्षम रहता है। फाइजर वैक्सीन ने ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर अपने टीके का टेस्ट किया है, जिसमें ये बात पता चली है। डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा है कि, "प्रारंभिक साक्ष्य और ओमिक्रॉन वेरिएंट में मौजूद स्पाइक प्रोटीन काफी बदली हुई है, लिहाजा ये वैक्सीन की प्रभाव को कम कर देता है।

ओमिक्रॉन का बच्चों पर प्रभाव
दक्षिण अफ्रीका में शुरूआती तौर पर देखा जा रहा है कि, 5 साल से कम के बच्चों पर ओमिक्रॉन वेरिएंट का काफी प्रभाव पड़ रहा है और अस्पताल में ओमिक्रॉन से संक्रमित काफी बच्चों को भर्ती करवाया जा रहा है। हालांकि, राहत की बात ये है कि, ज्यादातर बच्चे बहुत जल्द अस्पतालों से बाहर आ जा रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य मंत्री जो फाहला के अनुसार, श्वसन संबंधी जटिलताओं की कोई रिपोर्ट नहीं है।












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