इस लड़की ने सऊदी में महिलाओं को दिलाया योग का हक, धर्मगुरुओं से धमकी मिलने के बाद भी करती रही काम
सऊदी अरब में ड्राइविंग के अधिकार के बाद अब महिलाओं को एक और अधिकार दिया गया है। सऊदी ने योग को खेल का दर्जा दे दिया है। अब भले ही इस कट्टर देश ने उसे ये दर्जा दिया हो, लेकिन इसके पीछे की लड़ाई बड़ी लंबी है। कई सालों से ये लड़ाई नाउफ मारवाई अकेले ही लड़ रही हैं।
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नई दिल्ली। सऊदी अरब में ड्राइविंग के अधिकार के बाद अब महिलाओं को एक और अधिकार दिया गया है। सऊदी ने योग को खेल का दर्जा दे दिया है। अब भले ही इस कट्टर देश ने उसे ये दर्जा दिया हो, लेकिन इसके पीछे की लड़ाई बड़ी लंबी है। कई सालों से ये लड़ाई नाउफ मारवाई अकेले ही लड़ रही हैं। ये उन्हीं की मेहनत का फल है दो सऊदी अरब ने इसे खेल में शामिल किया है।


ड्राइविंग के बाद मिला योग का हक
सऊदी अरब में महिलाओं पर कई तरह की पाबंदी है। ड्राइविंग को लेकर तो लंबी लड़ाई के बाद उन्हें ये हक मिल ही गया, अब धीरे-धीरे बाकी हक भी वो सरकार से ले रही हैं। सऊदी ने योग को खेलों में शामिल कर लिया है। इसके पीछे नाउफ मारवाई हैं जो सालों के योग को ये दर्जा दिलवाने के लिए काम कर रही हैं।

19 साल की उम्र से कर रही हैं योग
नाउफ सऊदी अरब की पहली सर्टिफाइट योग शिक्षिका हैं। सऊदी अरब में उन्होंने योग को पॉपुलर बनाने के लिए काफी काम किया है। नाउफ 19 साल की उम्र से योग कर रही हैं और तभी से वो इसे प्रमोट भी कर रही हैं। उन्होंने केरल से योग सीखा है और यहीं उन्हें योगाचारिणी का खिताब मिला।

धमकी देते थे मुस्लिम धर्मगुरु
भारतीय काउंसलेट भी उनके इस काम के बाद उन्हें सम्मानित कर चुका है। एक पितृसत्तात्मक समाज में नाउफ के लिए योग आसान नहीं था। उन्हें रोजाना धमकियां मिलती थीं। एक इंटरव्यू में नाउफ ने बताया था कि मुस्लिम धर्म गुरु उन्हें धमकी देते थे। योग पर लिखे उनके आर्टिकल पर तो यहां तक कह दिया गया था कि वो योग नहीं सिखा सकतीं।

बिजनेसवुमेन भी हैं नाउफ
लेकिन इन धमकियों के बावजूद नाउफ ने लोग सिखाना जारी रखा और आज नाउफ की मेहनत रंग लाई है। योग शिक्ष के अलावा नाउफ एक बिजनेसवुमेन हैं। वो जिद्दाह में रियाद-चायनीज मेडिकल सेंटर की संस्थापक भी हैं।












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