चंद्रमा या मंगल नहीं, आगे यहां मिशन भेजने का लक्ष्य, एलियंस का हो सकता है अड्डा

वाशिंगटन, 20 अप्रैल: पिछले 5-6 दशकों से वैज्ञानिकों ने चंद्रमा और मंगल मिशन पर खूब काम किया है और उन्हें सफलता भी मिली है। आगे भी इसपर काम चल रहा है और कई तरह की कामयाबी भी हासिल हो चुकी है। लेकिन, अब वैज्ञानिकों ने एक दशकीय सर्वे किया है, जिसके आधार पर बताया गया है कि अगले दशक में वैज्ञानिकों के लिए ग्रह-विज्ञान, खगोल-विज्ञान और तारामंडल से जुड़े विभिन्न विषयों को लेकर उनके लक्ष्य क्या हो सकते हैं। इसमें शनि के उस चंद्रमा का भी नाम शामिल किया गया है, जो एलियंस का अड्डा हो सकता है।

यूरेनस और शनि का चंद्रमा इंसीलेडस पर फोकस

यूरेनस और शनि का चंद्रमा इंसीलेडस पर फोकस

दुनिया के कई देश दोबारा चंद्रमा पर इंसान को उतारने की तैयारियों में जुटे हैं। मंगल मिशन पर भी खूब जोर डाला जा रहा है। लेकिन,इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने अगले दशक के लिए कुछ और भी बड़ा सोच रखा है। यह है यूरेनस और शनि का चंद्रमा इंसीलेडस। ये अब प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। अमेरिकी की नेशनल अकैडमीज ऑफ साइंसेज, इंजीनियरिंग और मेडिसीन ने एक दशकीय सर्वे किया है। यह सर्वे में उच्च स्तरीय वैज्ञानिक प्राथमिकताओं के आधार पर ग्रहों की उत्पत्ति, उनकी दुनिया और प्रक्रियाओं के अलावा उनपर जीवन और उसके होने की स्थिति के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है। नेशनल अकैडमीज के दशकीय सर्वे की स्टीयरिंग कमिटी के को-चेयर रॉबिन कैनप ने कहा है, 'यह रिपोर्ट अगले दशक में ग्रह विज्ञान, खगोल जीव विज्ञान और ग्रहों की रक्षा की सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी, परन्तु व्यावहारिक दृष्टि तय करती है।'

इंसीलेडस ऑर्बिलैंडर को लेकर बढ़ी दिलचस्पी

इंसीलेडस ऑर्बिलैंडर को लेकर बढ़ी दिलचस्पी

फिलहाल वैज्ञानिक यूरेनस और शनि के चंद्रमा इंसीलेडस में से यूरेनस ऑर्बिटर एंड प्रोब को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे उसके ऊपर मौजूद बर्फ और यूरेनस के सिस्टम और उसपर मौजूद वातावरण को समझने में मदद मिलेगी। इस मिशन को अभी उपलब्ध लॉन्च व्हीकल से ही 2023 से 32 के बीच छोड़ा जा सकता है। लेकिन, दिलचस्पी नासा की दूसरी प्राथमिकता वाले विशाल मिशन को लेकर है। यह है- शनि के चंद्रमा इंसीलेडस ऑर्बिलैंडर। यह दो साल के ऑर्बिट और लैंडेंड मिशन के दौरान इंसीलेडस या शनि के चांद पर जीवन के साक्ष्यों का पता लगाएगा। यह स्पेसक्राफ्ट इंसीलेडस के आंतरिक महासागर से निकलने वाले ताजा पदार्थों को विस्तृत अध्य्यन करेगा, जो पानी के फव्वारे की तरह निकल रहा है।

क्यों है पृथ्वी के बाहर जीवन होने की संभावना ?

क्यों है पृथ्वी के बाहर जीवन होने की संभावना ?

पृथ्वी के बाहर भी जीवन की संभावना है, इस सोच के लिए यह मिशन बहुत ही महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि इस मिशन के लिए नासा हाइब्रिड स्पेसक्राफ्ट बनाएगा, जो ऑर्बिट में भी चक्कर लगाएगा, फिर सतह पर उतर कर भी छानबीन करने में सक्षम होगा। दरअसल, इंसीलेडस एक बर्फीला चंद्रमा है और उसके ध्रुवीय क्षेत्र से जो पानी के फव्वारे छूटते हैं, उनके साथ जैविक कण भी अंतरिक्ष में फैल रहे हैं। वैज्ञानिकों के लिए इसी फव्वारे में दूसरे ग्रह पर भी जीवन की उम्मीद दिखाई दे रही है। वैज्ञानिकों ने अबतक जो विश्लेषण किया है, उसके अनुसार शनि के चंद्रमा के सतह के भीतर मौजूद महासागर में जीवन लायक हाइड्रोथर्मल वेंट्स मौजूद हैं। यह कुछ उसी तरह के हो सकते हैं, जैसे के हमारे महासागरों की गहराइयों में कुछ अंधेरी गुफाएं मौजूद हैं।

एलियंस के अड्डे की तलाश !

एलियंस के अड्डे की तलाश !

गौरतलब है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत भी कुछ इसी तरह के माहौल में हुई थी और इसलिए वैज्ञानिकों को वहां मीथैनोजेंस होने का अनुमान है, जिसकी वजह से उसके समुद्र में भी जीवों की मौजूदगी हो सकती है। इंसीलेडस की दुनिया बर्फीली है और यह हमारे सौर मंडल के बाहरी तरफ मौजूद है। इसलिए, शनि के इस चांद पर एलियंस जैसे दूसरे ग्रह के जीव होने की संभावना की तलाश करनी है। नासा इंसीलेडस ऑर्बिलैंडर को 2038 में लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। रॉबिन कैनप के मुताबिक, 'इस तरह की उच्च प्राथमिकता वाली रिसर्च ऐक्टिविटी और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के लिए प्रस्तावित पोर्टफोलियो मिशन से मानवीय ज्ञान में परिवर्तनकारी जानकारी विकसित होगी और सोलर सिस्टम की उत्पत्ति और विकास के साथ-साथ पृथ्वी से बाहर जीवन होने की संभावना और दूसरे तरह के जीवों के बारे में समझने में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।'(ऊपर की तस्वीरे)

मंगल मिशन भी अहम मोड़ पर पहुंचा

मंगल मिशन भी अहम मोड़ पर पहुंचा

हालांकि, भविष्य के लिए महत्वाकांक्षी योजनाओं पर काम करने के साथ-साथ वैज्ञानिकों के लिए चंद्रमा और मंगल अभी भी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि मार्स एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम के साथ ही मार्स लाइफ एक्सप्लोरर पर मुख्य फोकस होनी चाहिए। इस बीच मंगल मिशन के लिए अच्छी खबर है कि इसकी सतह पर चक्कर काट रहा एसयूवी के आकार का परसेवरेंस रोवर उस जगह पर पहुंच चुका है, जहां वैज्ञानिकों को प्राचीन जीवन होने की तलाश है।(ऊपर की तस्वीरें प्रतीकात्मक)

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