उत्तर कोरिया में US के दुश्मनों का जुटान, चीन-रूस को किम जोंग ने दिखाया, कैसे चुटकी में कर सकता है विनाश?
North Korea News: उत्तर कोरिया में करीब 70 सालों के बाद अमेरिका के दुश्मनों का जुटान हुआ है और किम जोंग उन के आह्वान के बाद प्योंगयोंग में रूस और चीन के शीर्ष रक्षा अधिकारी पहुंचे हैं।
उत्तर कोरिया में चीन और रूस के रक्षा अधिकारी उस वक्त पहुंचे हैं, जब आज से 70 साल पहले कोरियाई युद्ध में उत्तर कोरिया के दोनों सहयोगी चीन और रूस मददगार बनकर पहुंचे थे। इस युद्ध में कोरियाई प्रायद्वीप तबाह हो गया था और उसी युद्ध का इस वक्त जश्न उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयोंग में मनाया जा रहा है। उत्तर कोरिया इसे 'विजय दिवस' के तौर पर मनाता है और प्योंगयोंग से इस बार अमेरिका को मैसेज दिया जा रहा है।

उत्तर कोरिया का विजय दिवस
उत्तर कोरिया के विजय दिवस में रूस और चीन का आना, इस बात को दिखाता है कि उत्तर कोरिया के प्रतिबंधित हथियारों को रूस और चीन ने मान्यता दे दी है।
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगू को बुधवार को प्योंगयांग में एक रक्षा प्रदर्शनी का दौरा कराया, जिसमें उत्तर कोरियाई मीडिया की तस्वीरों में उन्हें प्योंगयांग की परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों से लेकर उसके अत्याधुनिक ड्रोन तक, हथियारों की एक सीरिज के साथ चलते हुए दिखाया गया है।
उत्तर कोरिया की सरकारी, कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी रक्षा मंत्री शोइगु और रूसी प्रतिनिधिमंडल के लिए एक राजकीय स्वागत समारोह आयोजित किया गया था, जिसमें यूक्रेन में युद्ध के संदर्भ में, उत्तर कोरियाई रक्षा मंत्री कांग सुन नाम ने, "देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए रूसी सेना और लोगों के उचित संघर्ष के लिए" प्योंगयांग का पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है।
यानि, उत्तर कोरिया ने यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को पूर्ण समर्थन दे दिया है। हालांकि, उत्तर कोरिया ने ये ऐलान पहले ही कर दिया था।
वहीं, उत्तर कोरिया में बोलते हुए रूस के रक्षा मंत्री शोइगु ने कहा, कि कोरियाई पीपुल्स आर्मी (केपीए) "दुनिया की सबसे मजबूत सेना बन गई है" और इसे इसी तरह बनाए रखने के लिए रूस लगातार सहयोग करता रहेगा।
इसके अलावा बुधवार को, पोलित ब्यूरो के सदस्य ली होंगज़ॉन्ग के नेतृत्व में चीनी प्रतिनिधिमंडल का भी किम जोंग उन ने स्वागत किया है।

इस स्वागत समारोह में, उत्तर कोरिया के वरिष्ठ अधिकारी किम सोंग नाम ने कोरियाई युद्ध में शामिल होने के लिए चीनी सेना को धन्यवाद दिया और कहा, कि उत्तर कोरिया "बहादुरी के वीरतापूर्ण कार्यों और गुणों को कभी नहीं भूलेगा।"
उत्तर कोरिया में जुटे अमेरिकी दुश्मनों को लेकर कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में परमाणु नीति कार्यक्रम में स्टैंटन के वरिष्ठ साथी अंकित पांडा ने कहा, कि युद्धविराम की सालगिरह पर चीनी और रूसी प्रतिनिधिमंडलों की उपस्थिति "प्योंगयांग दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को दिए जाने वाले महत्व को रेखांकित करती है।"
पांडा ने कहा, "शोइगु की मौजूदगी विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि यह इस बात का संकेत है, कि पिछले साल यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद से प्योंगयांग और मॉस्को कितने करीब आ गए हैं।"
वहीं, ऑस्ट्रेलिया में यूनाइटेड स्टेट्स स्टडीज सेंटर के रिसर्च फेलो ब्लेक हर्ज़िंगर ने कहा, प्योंगयांग की ये सभा एक कमजोरी को भी दर्शाती है।
हर्ज़िंगर ने कहा, कि "यह वास्तव में दर्शाता है, कि चीन और रूस, इन दोनों देशों की दोस्तों की लिस्ट कितनी छोटी है, और दोनों एक दुष्ट शासन के लिए समर्थन दिखाने की इच्छा रखते हैं।"

कोरियन युद्ध को जानिए
उत्तर कोरिया कोरियन युद्ध के लिए 'विजय दिवस' मना रहा है और साल 1950 से 1953 तक चले कोरियन युद्ध की ये 70वीं वर्षगांठ है, जो शीत युद्ध युग के पहले खतरनाक और बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में से एक था।
1950 के अंत में, चीन ने अपने उत्तर कोरियाई सहयोगी का समर्थन करते हुए और संयुक्त राष्ट्र कमान के तहत दक्षिण कोरिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य देशों की संयुक्त सेनाओं को पीछे धकेलते हुए, कोरियाई प्रायद्वीप में ढाई लाख सैनिक भेजे थे।
कोरियाई युद्ध में 180,000 से ज्यादा चीनी सैनिक मारे गए थे, जिसे बीजिंग अमेरिकी आक्रमण का विरोध करने और कोरिया की सहायता करने के लिए युद्ध कहता है।
वहीं, तत्कालीन सोवियत संघ ने भी युद्ध के दौरान उत्तर कोरिया का समर्थन किया था और उस वक्त रूस ने अमेरिकी फाइटर जेट्स के खिलाफ उत्तर कोरिया को अपने फाइटर जेट्स और टैंक जैसे भारी हथियार भेजे थे।
उत्तर कोरिया इस युद्ध में जीत का दावा करता है और 27 जुलाई 1953 को कोरियाई युद्ध युद्धविराम पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके बाद युद्ध खत्म हो गया था, लेकिन ये शांति समझौता कभी कामयाब नहीं हो पाया और अभी भी कोरियाई प्रायद्वीप लगातार तनाव में रहता है।












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