गर्म पानी, चाय पिएं, गरारे करें...उत्तर कोरिया में नहीं हैं बुखार की दवाएं, घरेलू नुस्खे से मरीजों का इलाज

बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि, एक उत्तर कोरियाई दंपति का मीडिया द्वारा साक्षात्कार लिया गया था, जिसमें लोगों को सलाह दी गई थी कि जब वे उठें और बिस्तर पर जाएं तो खारे पानी से गरारे करें।

प्योंगयोंग, मई 21: उत्तर कोरिया में कोविड महामारी बुरी तरह से लोगों को परेशान कर रही है और हजारों लोग तेज बुखार से परेशान हैं। लेकिन, बम और मिसाइल बनाने के पीछे देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देने वाले किम जोंग उन देश के लोगों के लिए बुखार की दवाओं की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। लिहाजा, अब उत्तर कोरिया में बुखार पीड़ितों को गर्म पानी से गरारे करने और गर्म चाय पीने के लिए कहा जा रहा है।

किम के देश में कोरोना का कहर 

किम के देश में कोरोना का कहर 

इस महीने की शुरुआत में किम जोंग-उन ने पहली बार स्वीकार किया था कि कोरोना महामारी उत्तर कोरिया तक पहुंच गई है। पहले, वह डींग मारते थे कि उनके देश के सख्त "क्वारंटाइन " ने तब मजबूती से काम किया था जब दुनिया के बाकी देश अपनी सुरक्षा में नाकाम हो गये थे। लेकिन, अब कोरोना वायरस ने उत्तर कोरिया की हालत खराब कर दी है और देश में चूंकी कभी भी अस्पतालों के निर्माण या स्वास्थ्य व्यवस्था के विकास पर ध्यान नहीं दिया गया, लिहाजा अब देश की जनता एक सनकी तानाशाह की करतूतों की सजा भुगत रही है। सबसे हैरानी की बात ये है, कि उत्तर कोरिया में जिन लोगों की कोविड से मौत हो रही है। उनकी मौत रहस्यमयी बुखार से कहकर उसे कोविड की लिस्ट में नहीं डाला जाता है। लेकिन, करीब डेढ़ लाख से ज्यादा लोग तेज बुखार से परेशान हैं और चूंकी देश में वैक्सीनेशन काफी कम किया गया है, लिहाजा लोगों की जान काफी तेजी से जा रही है।

उत्तर कोरिया में नहीं हैं दवाएं

उत्तर कोरिया में नहीं हैं दवाएं

बीबीसी लगातार उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी पर नजर रखे हुआ है और उत्तर कोरिया की स्थिति की बारीकि से निगरानी कर रहा है। बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, उत्तर कोरिया में सरकारी अखबार में लोगों को गर्म काढ़ा, अदरक डालकर चाय पीने के लिए कहा गया है। ये सलाह उन लोगों को दी गई है, जो ज्यादा बीमार नहीं हैं। हालांकि, अब पूरी दुनिया में साबित हो चुका है, कि इन घरेलू उपचार से खांसी और गले में खराश और सूजन से तो राहत मिल सकती है, लेकिन इससे वायरस का इलाज नहीं होता है। वहीं, नॉर्थ कोरिया के सरकारी अखबार ने लोगों को पानी में नमक डालकर गरारा करने के लिए कहा है, और इसके लिए राजधानी प्योंगयोंग में हजारों टन नमक भिजवाया गया है।

खारे पानी से गरारे करे लोग

खारे पानी से गरारे करे लोग

बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि, एक उत्तर कोरियाई दंपति का मीडिया द्वारा साक्षात्कार लिया गया था, जिसमें लोगों को सलाह दी गई थी कि जब वे उठें और बिस्तर पर जाएं तो खारे पानी से गरारे करें। उत्तर कोरिया के लोगों को बताया गया है कि, इस बात के काफी प्रमाण हैं कि, गर्म पानी में नमक डालकर गरारा करने से कोविड संक्रमण का खतरा कम हो जाता है और कोविड फैलने का खतरा भी कम हो जाता है, क्योंकि कोविड महामारी नाक और मुंह से फैलती है।

उत्तर कोरिया में दवाओं की किल्लत

उत्तर कोरिया में दवाओं की किल्लत

इसके साथ ही उत्तर कोरियाई लोगों को कुछ आधुनिक दवाएं भी सुझाई गई हैं। स्टेट टीवी ने कथित तौर पर रोगियों को इबुप्रोफेन जैसे दर्द निवारक और एमोक्सिसिलिन जैसे एंटीबायोटिक्स का उपयोग करने की सलाह दी। दर्द निवारक दवाएं कोविड के लक्षणों को कम कर सकती हैं, लेकिन, फिर से, स्पष्ट रूप से वायरस का मुकाबला नहीं करेगी या वायरस को फैलने से रोक नहीं पाएंगी। एंटीबायोटिक दवाओं के संबंध में, बीबीसी की रिपोर्ट है कि "एंटीबायोटिक्स का उपयोग अनावश्यक रूप से प्रतिरोधी बग विकसित करने का जोखिम है"। वहीं, उत्तर कोरिया में जिस तरह से कोविड फैला है, वो साफ तौर पर किम जोंग उन की नाकामयाबी की कहानी है, कि उन्होंने देश के लोगों से भी कोविड को लेकर ना सिर्फ झूठ बोला, बल्कि उन्हें गलत सूचनाएं दी हैं और अभी भी दे रहे हैं।

उत्तर कोरिया में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाएं

उत्तर कोरिया में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाएं

हाल के वर्षों में अत्यधिक आर्थिक कठिनाई ने उत्तर कोरिया में स्वास्थ्य सेवाओं को काफी नुकसान पहुंचा है और कई रिपोर्ट्स ऐसे हैं, जिनमें कहा गया है कि, उत्तर कोरिया में आम दिनों में भी जरूरी दवाएं नहीं मिलती हैं और इस वक्त तो परिस्थिति ही असामान्य हैं। वहीं, जब पिछले साल डब्ल्यूएचओ ने उत्तर कोरिया को कोवैक्स स्कीम से जुड़ने के लिए कहा था, ताकि उत्तर कोरिया में भी कोविड वैक्सीन की सप्लाई की जा सके, तो उत्तर कोरिया ने कोवैक्स स्कीम से जुड़ने से इनकार कर दिया था। जिसकी वजह से उत्तर कोरिया में काफी कम लोगों का वैक्सीनेशन ही हो पाया है।

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