North Korea Russia: रूस ने उत्तर कोरिया के साथ किया रणनीतिक साझेदारी, पुतिन ने किए दस्तखत, समझें मतलब

North Korea Russia: रूस-यूक्रेन युद्ध अब तीसरे साल में प्रवेश करने वाला है और उससे पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उत्तर कोरिया और मॉस्को के बीच एक रणनीतिक द्विपक्षीय संधि की पुष्टि करने के लिए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

पुतिन ने यह दस्तखत ऐसे समय में किए हैं, जब यूक्रेन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने दावा किया है, कि हजारों उत्तर कोरियाई सैनिक वर्तमान में यूक्रेनी सीमा के पास तैनात हैं। रूसी समाचार आउटलेट टैस के अनुसार, पुतिन ने शनिवार को मॉस्को और प्योंगयांग के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि के अनुसमर्थन के लिए एक कानून पर हस्ताक्षर किए हैं।

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रूसी नेता ने इस साल जून में प्योंगयांग की अपनी यात्रा के दौरान उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन के साथ पहली बार इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

रूस-उत्तर कोरिया संधि का मतलब क्या है?

पुतिन के हस्ताक्षर से पहले, रूसी संसद के निचले और ऊपरी सदन ने इस महीने की शुरुआत में अनुसमर्थन के लिए विधेयक को मंजूरी दे दी थी। विवादास्पद संधि में यह प्रावधान है, कि यदि किसी भी पक्ष पर आक्रमण किया जाता है, और युद्ध की स्थिति पैदा होती है, तो दूसरा पक्ष बिना किसी देरी के सैन्य और अन्य सहायता प्रदान करने के लिए, अपने पास मौजूद सभी साधनों का उपयोग करेगा।

इस सप्ताह की शुरुआत में, यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की ने पुष्टि की थी, कि रूस के कुर्स्क क्षेत्र में तैनात उत्तर कोरियाई सैनिकों ने युद्ध के मैदान में यूक्रेनी सेना से लड़ाई लड़ी है। जेलेंस्की ने कहा है, कि इस क्षेत्र में 11,000 उत्तर कोरियाई सैनिक तैनात हैं, जहां यूक्रेन की रूसी क्षेत्र में तीन महीने की सैन्य घुसपैठ रुकी हुई है।

जेलेंस्की ने गुरुवार को हंगरी के बुडापेस्ट में यूरोपीय राजनीतिक समुदाय शिखर सम्मेलन में संवाददाताओं से कहा, "कि 11000 उत्तर कोरियाई सैनिक या उत्तर कोरियाई सेना के जवान, वर्तमान में हमारे देश के उत्तर में कुर्स्क क्षेत्र में यूक्रेन के साथ सीमा पर रूसी संघ के क्षेत्र में मौजूद हैं।"

उत्तर कोरिया की सेना, जो अपने विशाल आकार और दुनिया की सबसे बड़ी विशेष बल इकाई के लिए जानी जाती है, रूस में उसके होने का मतलब ये है, कि रूस की सेना काफी मजबूत हो जाती है। और रूस भेजे जाने वाले सैनिकों को उनकी सेवा के लिए पर्याप्त मुआवजा मिलने की उम्मीद है, जो बदले में, उत्तर कोरियाई शासन के खजाने को राहत पहुंचाती है।

यह कदम उत्तर कोरिया में मौजूद खाद्यान्न की कमी और आर्थिक संकट के बीच उठाया गया है, जहां सेना को अक्सर मामूली सुविधाएं मिलती हैं।

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उत्तर कोरिया को प्रतिबंधों से बचाता है रूस

उत्तर कोरिया ने 2006 में परमाणु परीक्षण किया था, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध लगा दिए थे और फिर उत्तर कोरिया ने आगे जाकर जब और भी कई बैलिस्टिक मिसाइलोंका का परीक्षण किया, तो उन प्रतिबंधों को और भी ज्यादा सख्त कर दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र की पूर्व अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने 2018 में कहा था कि, प्रतिबंधों ने सभी उत्तर कोरियाई निर्यात और उसके व्यापार को 90 फीसदी तक खत्म कर दिया है। प्रतिबंधों का असर कम पड़े, लिहाजा उत्तर कोरिया ने बड़े पैमाने पर लोगों को विदेशों में कमाने के लिए भेजा था, लेकिन उसपर भी जब सख्ती बढ़ा दी गई, तो फिर उत्तर कोरिया और ज्यादा चालाकी नहीं दिखा पाया। हालांकि, उसके बाद उत्तर कोरिया की मदद के लिए चीन और रूस साथ आ गये और उसके बाद से जब भी यूएनएससी में उत्तर कोरिया के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया, चीन और रूस ने उस प्रस्ताव को वीटो कर गिरा दिया।

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