द्वितीय विश्‍व युद्ध में भारतीय मूल की जासूस नूर इनायत खान को लंदन में मिला सम्‍मान

लंदन। दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटेन की भारतीय मूल की महिला जासूस नूर इनायत खान लंदन में मेमोरियल प्लाक से सम्मानित की जाने वाली पहली महिला बनी गई हैं। शुक्रवार को नूर इनायत खान के नाम पर सेंट्रल लंदन में उनके पूर्व पारिवारिक घर में 'ब्लू प्लाक' मेमोरियल देकर उन्‍हें सम्‍मानित किया गया। इंग्लिश हैरीटेज चैरिटी की तरफ से चलाई जाने वाली ब्‍लू प्‍लाक स्‍कीम के तहत प्रसिद्ध लोगों और संगठनों को सम्मानित करता है जो लंदन में किसी खास भवन से जुड़े होते हैं।

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    कौन थीं नूर इनायत खान

    नूर इनायत खान का प्‍लाक ब्लूम्सबरी में चार टैविटोन स्ट्रीट पर पहुंची। नूर इनायत यहां पर सन् 1943 में नाजियों के कब्जे वाले फ्रांस के लिए रवाना होने से पहले रहती थीं। वह ब्रिटेन के स्पेशल ऑपरेशंस एग्जिक्‍यूटिव (एसओई) के लिए अंडरकवर रेडियो संचालक के तौर पर वहां गईं थी। उनके बारे में एक खास बात यह भी है कि नूर, भारतीय सूफी संत हजरत इनायत खान की बेटी और 18वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की वंशज थीं। उनकी सन् 1944 में दचाउ यातना शिविर यानी कन्सन्ट्रेशन कैंप में हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कैद करने वालों को किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी थी यहां तक कि अपना असली नाम भी नहीं बताया था। 'स्‍पाई प्रिंसेज: द लाइफ ऑफ नूर इनायत खान' की लेखिका श्रावनी बसु के मुताबिक जब नूर इनायत खान अपने अंतिम मिशन पर अपना घर छोड़कर रवाना हुईं थीं, तो उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह बहादुरी का प्रतीक बन जाएंगी। बसु ने कहा कि वह एक असाधारण जासूस थीं. सूफी होने की वजह से वह अहिंसा एवं धार्मिक सौहार्द में यकीन करती थीं।

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