Explainer: अमेरिका के खिलाफ प्राग हाईकोर्ट पहुंचे निखिल गुप्ता, निचली अदालत में झटके के बाद कितना मजबूत केस?
Nikhil Gupta Case: भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता चेक गणराज्य की राजधानी प्राग में एक जेल में बंद हैं, क्योंकि अमेरिका के इस आरोप के बाद, कि उन्होंने अमेरिका में रहने वाले खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की साजिश रची थी, उन्हें प्राग में गिरफ्तार कर लिया गया था। वहीं, अब अमेरिका, निखिल गुप्ता के प्रत्यर्पण की कोशिशें कर रहा है।
प्राग की एक नगर निगम अदालत ने हाल ही में अमेरिका में निखिल गुप्ता के प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला सुनाया है, लेकिन द संडे की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, निखिल गुप्ता के पास अमेरिकी प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील करने का अधिकार ऊपरी अदालतों में हैं और उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की है।

निखिल गुप्ता के वकील पेट्र स्लेपिका ने द संडे की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि नगर निगम अदालत के प्रत्यर्पण के खिलाफ निखिल गुप्ता दो ऊपरी अदालतों में अपील कर सकते हैं।
आपको बता दें, कि निखिल गुप्ता को इस साल 30 जून को चेक अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था और अमेरिकी सरकार के अनुरोध के अनुसार, उनका प्रत्यर्पण वर्तमान में वहां की अदालतों में विचाराधीन है।
निखिल गुप्ता के वकील पेट्र स्लेपिका ने कहा, कि "वह अभी भी प्राग में है। वह इस समय पैंक्रैक जेल में है। नगर निगम अदालत ने उनके प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला दिया है, लेकिन उन्होंने (गुप्ता ने) इसे हाई कोर्ट में चुनौती दी है। इसके बाद वह संवैधानिक कोर्ट जा सकते हैं. (प्रत्यर्पण का) अंतिम निर्णय न्याय मंत्रालय पर निर्भर करता है।"
कितना मजबूत है निखिल गुप्ता का केस?
निखिल गुप्ता के लिए आगे की कानूनी राह के बारे में बताते हुए, प्राग में कानूनी फर्म पेट्रासेक एंड स्लेपिका के सदस्य स्लेपिका ने कहा, कि भले ही तीन अदालतें (नगरपालिका, उच्च न्यायालय और संवैधानिक न्यायालय) प्रत्यर्पण के पक्ष में तीन सकारात्मक आदेश जारी करती हैं, जस्टिस मिनिस्ट्री फिर भी प्रत्यर्पण के खिलाफ फैसले ले सकता है।
लेकिन, अगर तीन अदालतों से प्रत्यर्पण के खिलाफ फैसला सुनाया जाता है, तो फिर जस्टिस मिनिस्ट्री तीनों कोर्ट के आदेश को पलटकर प्रत्यर्पण के पक्ष में फैसला नहीं सुना सकता है।
वकील स्लेपिक्का, जो पिछले दो महीने से प्राग कोर्ट में निखिल गुप्ता का केस लड़ रहे हैं, उन्होंने ने द संडे एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा है, कि नगरपालिका अदालत का फैसला 29 नवंबर को अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दायर दूसरे अभियोग से पहले आया था। लेकिन, अमेरिकी अधिकारियों ने पहले अभियोग में जो आरोप लगाए थे, वो दूसरे अभियोग में लगाए गये कई आरोपों से अलग हैं। दोनों अभियोगों में कथित अपराधों को लेकर अलग अलग जानकारियां दी गईं हैं, लिहाजा निखिल गुप्ता का केस ऊपरी अदालत में मजबूत बन रहा है और उन्हें कोर्ट में इसका फायदा मिल सकता है।
वकील स्लेपिक्का ने कहा, कि "आपको यह ध्यान में रखना होगा, कि जब नगरपालिका न्यायालय का जो निर्णय आया था, वो अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दायर पहले अभियोग पर आधारित था, जिसमें मामले का कोई विवरण नहीं था। यहां तक कि, यहां के न्यायाधीशों को भी नहीं पता था, कि पीड़ित कौन है और कथित अपराध की प्रकृति क्या है। लेकिन, दूसरे अभियोग के साथ, अब हमारे पास ज्यादा जानकारियां हैं, और मुझे लगता है कि इससे उनके (गुप्ता के) मामले में मदद मिलेगी। इसमें राजनीतिक मुद्दे शामिल हैं।"
पहले और दूसरे अभियोग में क्या बदलाव हैं?
29 नवंबर को मैनहट्टन की एक संघीय अदालत में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा दायर दूसरे अभियोग में, अमेरिकी सरकार ने निखिल गुप्ता पर सुपारी देकर न्यूयॉर्क में रहने वाले खालिस्तानी अलगाववादी पन्नून की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है। निखिल गुप्ता के ऊपर दो आरोप हैं। पहला आरोप, भाड़े के कातिल को सुपारी देना और दूसरा आरोप हत्या की साजिश रचना।
प्रत्येक मामले में जेल में अधिकतम 10 साल की कानूनी सजा का प्रावधान है। उन पर एक भारतीय खुफिया अधिकारी के साथ मिलकर इस साजिश को रचने का आरोप लगाया गया है, जिनका नाम अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। अमेरिकी अभियोग में भारतीय अधिकारी को सीसी-1 नाम दिया गया है।
शुक्रवार को निखिल गुप्ता के परिवार ने भारत में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और चेक गणराज्य में उनके खिलाफ लंबित प्रत्यर्पण कार्यवाही में हस्तक्षेप करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की थी।
SC में याचिका में कहा गया है, कि निखिल गुप्ता को 30 जून को प्राग हवाई अड्डे पर चेक अधिकारियों के बजाय अमेरिका को स्व-घोषित एजेंटों ने अवैध रूप से हिरासत में लिया था।
लेकिन, गिरफ्तार करने के 100 दिनों तक उन्हें अकेले रखा गया और इस दौरान उनके साथ जो सलूक किया गया, वो मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन है। परिवार का आरोप है, निखिल गुप्ता हिंदू धर्म मानते हैं और वो शाकाहारी हैं, फिर भी उन्हें जबरदस्ती गाय और सुअर का मांस खिलाया गया, जो उनकी धार्मिक मान्यताओं का सीधा गंभीर उल्लंघन है।
परिवार का आरोप है, कि "निखिल गुप्ता को "कांसुलर पहुंच, भारत में अपने परिवार से संपर्क करने का अधिकार और कानूनी प्रतिनिधित्व लेने की स्वतंत्रता से भी वंचित कर दिया गया था।"
यानि, गिरफ्तारी के पहले 100 दिनों तक उन्हें कोई भी कानून सुविधाएं नहीं दी गई और उन्हें काफी प्रताड़ित किया गया।
वहीं, निखिल गुप्ता को राजनयिक पहुंच और परिवार को फोन कॉल तक करने से रोके जाने के दावों के बारे में पूछे जाने पर स्लेपिका ने कहा, कि "मुझे पता है, कि वह अपने परिवार से बात करने में सक्षम हैं। अब उनके पास कॉन्सुलर एक्सेस है। मैं उनके भोजन की स्थिति के बारे में नहीं जानता (क्या उन्हें मांसाहारी भोजन करने के लिए मजबूर किया गया हो), लेकिन यहां (प्राग में) जेल का खाना अच्छा नहीं है।"
वहीं, अपने निखिल गुप्ता के अगले कदम के बारे में पूछे जाने पर स्लेपिका ने कहा, "हमें सुनवाई की अगली तारीख नहीं मिली है। हम नगर निगम न्यायालय के आदेश का उस भाषा में अनुवाद करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे वह समझते हैं। लेकिन ऑर्डर मेरे पास हैं। हमारा मानना है कि यह गलत पहचान का मामला है।"
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