15,000 किमी दूर भेजे मछली पकड़ने वाले 260 जहाज, किस नए तिकड़म में लगा है चीन
नई दिल्ली- पता नहीं दुनिया भर में कोरोना वायरस फैलाने की मुख्य वजह बनने के बाद चीन को हो क्या गया है। वह अपने आसपास के कई देशों से उलझने के साथ-साथ अमेरिका से तो पंगा ले ही रहा है। अब उसने अपनी सीमा से 15,000 किलोमीटर दूर समुद्री इलाके में अपने 260 मछली पकड़ने वाले जहाजों का बेड़ा भेज दिया है। ये चाइनीज फिशिंग शिप्स अभी दक्षिण अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में समुद्री जीव-जन्तु पकड़ने में लग हुए हैं। लेकिन, सबसे चौंकने वाली बात ये है कि यह वही इलाका है, जिसने महान वैज्ञानिक डार्विन को अपना मशहूर 'विकास का सिद्धांत' देने की प्रेरणा दी थी। इस इलाके में कई विलुप्त हो रही अनगिनत समुद्री प्रजातियां मौजूद हैं, लेकिन लगता है कि चीन उन सब पर तो डाका डाल ही रहा है, कुछ और बड़े कुराफात में लगा हुआ है।

समंदर में चीन का नया तिकड़म
ड्रैगन की नई हरकत से चीन से 15,000 किलोमीटर दूर दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर के लोगों के कान खड़े हो गए हैं। इक्वाडोर की नेवी ने अपने गैलापागोस द्वीपसमूह से करीब 200 मील की दूरी पर चीन के मछली पकड़ने वाले सैकड़ों जहाजों का बहुत बड़ा जमावड़ा देखा है। जब से वहां की सरकार को चीन की इस नापाक हरकत की भनक लगी है, उसने गैलापागोस द्वीपसमूह की सुरक्षा रणनीति बदल दी है। यह द्वीपसमूह दक्षिण अमेरिका की मुख्य भूमि से 563 मील पश्चिम में स्थित है। चीन की इस हरकत को देखते हुए इक्वाडोर के रक्षामंत्री ओसवाल्डो जेरिन ने कहा है, 'हम अलर्ट पर हैं, निगरानी कर रहे हैं, 2017 में जो हुआ था उस तरह की घटना को टालने के लिए पैट्रोलिंग कर रहे हैं।'

15,000 किमी दूर उतारे 260 जहाज
द गार्डियन के मुताबिक इक्वाडोर की पूर्व पर्यावरण मंत्री योलांडा ककाबैडसे ने कहा है कि गैलापागोस द्वीपसमूह के पास के 188 मील चौड़े एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन के बाहर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में इस समय करीब 260 जहाज मौजूद हैं। इन जहाजों की उस समुद्री क्षेत्र में होना, पहले से ही संकट के दौर से गुजर रही समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत ही खतरनाक है। उन्होंने कहा कि, 'इस बेड़े का आकार और समुद्री प्रजातियों के प्रति उनकी आक्रामकता गैलापागोस में समुद्री प्रजातियों के संतुलन के लिए एक बड़ा खतरा है।' ककाबैडसे और क्विटो के पूर्व मेयर रोक्यू सेविला को फिलहाल इस द्वीप की रक्षा की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वर्ल्ड हेरिटेज साइट है यह इलाका
गौरतलब है कि यूनेस्को ने 1978 में ही इस क्षेत्र को वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित कर दिया था, लेकिन फिर भी हर साल चीनी जहाज यहां मछली पकड़ने के लिए पहुंच जाते हैं। लेकिन, इस बार चाइनीज जहाजों का बेड़ा इतना बड़ा है, जितना हाल के वर्षो में कभी नहीं देखा गया है। क्विटो के पूर्व मेयर रोक्यू सेविला ने कहा है कि इस संरक्षित क्षेत्र से चीन को अपने फिशिंग शिप्स हटाने के लिए कूटनीतिक पहल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा है, 'संरक्षित क्षेत्र के किनारे पर चीन के द्वारा अनियंत्रित मछली पकड़ना गैलापागोस में समुद्री जीवन की रक्षा के लिए इक्वाडोर की कोशिशों को बर्बाद कर रहा है।'

'लिविंग म्यूजियम और शोकेस फॉर इवॉल्युशन'
बता दें कि यह इलाका कुछ विलुप्त हो रहे समुद्री जीवों के संरक्षण के लिए स्वर्ग माना जाता रहा है। इनमें शार्क की कई प्रजातियों के इलावा, व्हेल और हैमरहेड की प्रजातियां शामिल हैं। इनके अलावा गैलापागोस द्वीपसमूह कुछ अद्वितीय पौधों और वन्य जीवों के लिए भी दुनिया भर में मशहूर रहा है। यहां के विशाल कछुए विश्व भर में आकर्षण का केंद्र हैं। इसके अलावा इस द्वीपसमूह पर राजहंस और अल्बाट्रोस की कई प्रजातियां भी पाई जाती हैं। जाने-माने वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन का 'विकास का सिद्धांत' यहीं से प्रेरित है। इस क्षेत्र के प्रति आकर्षण का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हर साल यहां लगभग 2.5 लाख टूरिस्ट आते हैं और यूनेस्को ने इसे 'लिविंग म्यूजियम और शोकेस फॉर इवॉल्युशन' का नाम दिया है।

2017 में चाइनीज जहाज से पकड़े गए थे 300 टन समुद्री जीव
गौरतलब है कि 2017 में भी इक्वाडोर की नेवी ने इसी इलाके से चीन का एक विशाल जहाज पकड़ा था। वह चीन का मछली पकड़ने वाला विशाल जहाज फु युआन यू लेंग 999 था। इक्वाडोर ने उस जहाज पर से 300 टन समुद्री जीव-जन्तु पकड़े थे, जिनमें से अधिकतर शार्क थे। गौरतलब है कि वन्य जीवों के प्रति चीन की इसी निर्ममता के चलते दुनिया आज कोरोना वायरस जैसे संकट झेल रही है। लेकिन, चीन अपने खाने-पीने की आदतों को सुधारने के लिए तैयार नहीं है। (कुछ तस्वीरें प्रतीकात्मक)
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