वैज्ञानिकों ने जिसे बताया Black Hole वो निकला Vampire Star, निगल रहा है छोटे तारों को
न्यूयार्क, 04 मार्च। साल 2020 में वेज्ञानिकों ने एक ब्लैक होल के बारे में पता लगाया था , जो कि पृथ्वी से करीब 1000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित था। तब वैज्ञानिकों ने इसे धरती के सबसे निकट का ब्लैक होल करार दिया था लेकिन अब एक अजीबो-गरीब बात सामने आई है, नई स्टडी में दावा किया गया है कि 'वो कोई ब्लैक होल नहीं बल्कि एक वैंपायर स्टार है, जो कि अपने आस-पास के तारों को खा रहा है।'

'ये कोई ब्लैक होल नहीं है बल्कि एक वैंपायर स्टार है'
लेकिन अब KU Leuven के साइंटिस्ट एबिगेल प्रॉस्ट ने अपनी स्टडी में दावा किया है कि 'ये कोई ब्लैक होल नहीं है बल्कि एक वैंपायर स्टार है, जो कि अपने आस-पास के तारों को खा रहा है।' वो अपने आस-पास के तारों को न्यूट्रान में चेंज कर रहा है लेकिन इससे निकलने वाली गुरुत्वाकर्षण तरंगें दूसरी तरह की प्रवृत्ति को पेश कर रही हैं।

यह अजीबो-गरीब सिग्नल भेज रहा
यह अजीबो-गरीब सिग्नल भेज रहा है, जो कि काफी अलग है और इसी पर वैज्ञानिकों का मंथन हो रहा है। प्रॉस्ट की स्टडी एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स जर्नल में प्रकाशित हुई है।

क्या होता है ब्लैक होल?
'ब्लैक होल' अंतरिक्ष का वो स्थान है, जहां भौतिक विज्ञान का कोई भी नियम लागू नहीं होता है। यहां सिर्फ एक गहरा अंधकार होता है, जो अपने अंदर सबकुछ निगल लेता है। इसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र बहुत शक्तिशाली होता है, ये प्रकाश को अवशोषित कर लेता है और अपने अंदर हर चीज को खींच लेता है।

क्या है वैंपायर स्टार?
वैंपायर स्टार अपने आस-पास के सभी तारों को खा जाता है। हालांकि वैज्ञानिक भाषा में इसे 'सहजीवी तारा ' या सिम्बायोटिक बायनेरिज़ कहा जाता है। जबकि एस्ट्रोलॉजी की भाषा में वैंपायर तारों को अमर यानी चिरंजीवी तारे कहा जाता है। दरअसल इसमें एक छोटा तारा अपने से बड़े साथी तारे के द्रव्यमान को सोखकर बड़ा ब्लू स्ट्रैगलर बन जाता है और इसलिए इसे 'वैंपायर स्टार' कहते हैं। इसमें छोटा तारा पहले से अधिक बड़ा, गर्म और नीला बन जाता है जिससे उसकी उम्र कम मालूम होती है।












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