क्या है मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री कन्या विवाह कल्याणी योजना? जानें किसे मिलेगा लाभ और कितनी मिलेगी राशि

Kanya Vivah Kalyani Sahayata Yojana: मध्य प्रदेश सरकार ने बेटियों और जरूरतमंद महिलाओं की शादी में आर्थिक मदद देने वाली दो महत्वपूर्ण योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना और कल्याणी विवाह सहायता योजना के निरंतर संचालन को मंजूरी दी गई। इसके लिए सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से अगले पांच वर्षों के लिए 1740 करोड़ 57 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया है।

सरकार का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का बोझ कम करना और जरूरतमंद महिलाओं को सम्मानजनक सहायता उपलब्ध कराना है। कैबिनेट बैठक में इसके अलावा स्कूलों के उन्नयन, किसानों को ब्याज मुक्त फसल ऋण, नए विधि महाविद्यालय और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

Kanya Vivah Kalyani Sahayata Yojana

क्या है मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना?

मुख्यमंत्री कन्या विवाह सहायता योजना राज्य सरकार की एक सामाजिक सहायता योजना है। इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के माध्यम से पात्र परिवारों को सरकार की ओर से सहायता उपलब्ध कराई जाती है ताकि शादी का खर्च परिवार पर अतिरिक्त बोझ न बने।

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कल्याणी विवाह सहायता योजना किसके लिए है?

कल्याणी विवाह सहायता योजना का लाभ मुख्य रूप से ऐसी महिलाओं को दिया जाता है जो विशेष परिस्थितियों में विवाह कर रही हों। इस योजना का उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक सहयोग देना है। राज्य सरकार समय-समय पर निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र हितग्राहियों को सहायता उपलब्ध कराती है।

पांच साल के लिए कितना बजट मंजूर?

कैबिनेट ने दोनों योजनाओं के संचालन के लिए 1 अप्रैल 2026 से पांच वर्षों तक कुल 1740 करोड़ 57 लाख रुपये की मंजूरी दी है। सरकार का मानना है कि इससे आने वाले वर्षों में हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और जरूरतमंद बेटियों की शादी में आर्थिक सहयोग मिलता रहेगा।

कौन लोग होते हैं पात्र?

इन योजनाओं का लाभ राज्य सरकार द्वारा तय पात्रता शर्तों के आधार पर दिया जाता है। सामान्य तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवार, निर्धारित आय सीमा के अंतर्गत आने वाले हितग्राही और शासन द्वारा तय अन्य मानकों को पूरा करने वाले परिवार आवेदन कर सकते हैं। अंतिम पात्रता संबंधित विभाग के नियमों के अनुसार तय होती है।

सरकारी स्कूलों के उन्नयन को भी हरी झंडी

कैबिनेट ने शिक्षा क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लिया। वर्ष 2026-27 में 75 माध्यमिक स्कूलों को हाई स्कूल और 100 हाई स्कूलों को हायर सेकेंडरी स्कूल में बदला जाएगा। इसके साथ ही 2027-28 और 2028-29 में भी हर साल इसी संख्या में स्कूलों के उन्नयन पर सैद्धांतिक सहमति दी गई है।

विद्यालयों के उन्नयन के लिए 635 करोड़ 24 लाख रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। सरकार ने विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य के तहत वर्ष 2029 तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन दर हासिल करने का लक्ष्य रखा है। जिला स्तर पर की गई मैपिंग के अनुसार 315 हाई स्कूल और 214 हायर सेकेंडरी स्कूलों की आवश्यकता बताई गई है।

सांदीपनि विद्यालयों को लेकर भी फैसला

कैबिनेट ने स्पष्ट किया कि सांदीपनि विद्यालयों के कैचमेंट एरिया में आने वाले स्कूलों का उन्नयन नहीं किया जाएगा। यदि उस क्षेत्र के सभी विद्यार्थियों का प्रवेश सांदीपनि विद्यालयों में हो जाता है तो संबंधित विद्यालयों का आवश्यकता वाले अन्य क्षेत्रों में युक्तियुक्तकरण किया जाएगा। उन्नत किए जाने वाले स्कूल फिलहाल अपने मौजूदा भवनों या अन्य सरकारी भवनों में संचालित होंगे।

किसानों को मिलेगा शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण

राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पकालीन फसल ऋण उपलब्ध कराने की योजना में बदलावों को मंजूरी दी है। अब खरीफ और रबी सीजन के लिए अलग-अलग ड्यू डेट रखने के बजाय वार्षिक एकल ऋण सीमा लागू की जाएगी। इसमें नकद और वस्तु ऋण की अलग उप-सीमा तय रहेगी।

नई व्यवस्था के अनुसार किसान द्वारा पहली बार ऋण निकालने की तारीख से 12 माह की अवधि को ड्यू डेट माना जाएगा। योजना के तहत किसानों को 1.25 प्रतिशत सामान्य ब्याज अनुदान मिलेगा। वहीं जो किसान तय समय तक ऋण चुका देंगे, उन्हें 4 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि ब्याज अनुदान के रूप में दी जाएगी।

शुजालपुर में खुलेगा नया सरकारी लॉ कॉलेज

कैबिनेट ने मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप शाजापुर जिले के शुजालपुर में सत्र 2026-27 से नया शासकीय विधि महाविद्यालय शुरू करने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए शैक्षणिक वर्ग के 9 और अशैक्षणिक वर्ग के 8 पदों सहित कुल 17 पद सृजित किए जाएंगे।

इस परियोजना के लिए 2 करोड़ 39 लाख 92 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग को अधिकृत किया गया है।

राशन व्यवस्था के लिए 3580 करोड़ रुपये मंजूर

कैबिनेट ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी मंजूरी दी। लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत परिवहन और कमीशन व्यय की प्रतिपूर्ति के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक योजना के संचालन हेतु 3580 करोड़ 7 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

यह राशि 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुचारू रूप से संचालित करने और लाभार्थियों तक खाद्यान्न पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने में उपयोग की जाएगी।

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