Nepal: सुशीला कार्की कैबिनेट में 15 मंत्री हो सकते हैं शामिल, क्या बालेन शाह सहित Gen-Z नेताओं को मिलेगा मौका?
Nepal new PM Sushila Karki Cabinet: नेपाल की राजनीति में बड़ा मोड़ आ चुका है। सुशीला कार्की (Nepal New Pm Sushila Karki) ने पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर अंतरिम सरकार की कमान संभाल ली है। यह बदलाव उस भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बाद आया है, जब सड़कों पर फैले विरोध प्रदर्शनों और युवाओं के गुस्से ने केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया।
इसी बीच नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की अपनी नई कैबिनेट बनाने की तैयारी में जुटी हैं। माना जा रहा है कि इसमें करीब 15 मंत्री शामिल हो सकते हैं। कार्की की कोशिश है कि यह मंत्रिमंडल पारदर्शी और सर्वसम्मति से बने, ताकि जनता का भरोसा बढ़े और मार्च 2026 के आम चुनाव तक राजनीतिक स्थिरता बनी रहे।

कैबिनेट में किन लोगों को जगह?
सुशीला कार्की की कैबिनेट को लेकर जो संभावित नाम सामने आए हैं, उनमें राजनीति, सेना, न्यायपालिका और स्वास्थ्य क्षेत्र के दिग्गज शामिल हैं। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट्स और मौजूदा चर्चाओं के मुताबिक जिन लोगों के नामों पर विचार किया जा रहा है, वे इस प्रकार हैं
- ओम प्रकाश आर्यल - कानूनी विशेषज्ञ
- बालानंद शर्मा - पूर्व सेना अधिकारी
- आनंद मोहन भट्टराई - सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति
- माधव सुंदर खड़का
- अशीम मान सिंह बसन्यात
- कुलमान घीसिंग - ऊर्जा विशेषज्ञ, पूर्व नेपाल बिजली प्राधिकरण प्रमुख
- डॉ. भगवान कोइराला - हृदय रोग विशेषज्ञ
- डॉ. संदुक रुइत - नेत्र विशेषज्ञ, "गॉड ऑफ साइट" कहे जाते हैं
- डॉ. जगदीश अग्रवाल
- डॉ. पुकार चंद्र श्रेष्ठ
बालेन शाह क्यों नहीं होंगे शामिल?
नेपाली सूत्रों के मुताबिक, काठमांडू के मेयर बालेन शाह फिलहाल अपने नगर प्रशासनिक कर्तव्यों में व्यस्त हैं, इसलिए उन्होंने अंतरिम सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल होने से दूरी बनाए रखी है। उनका रुख साफ है कि वे सीधे रूप से सरकार में भाग नहीं लेंगे, लेकिन सरकार के कामकाज और नीतियों पर निगरानी रखने में सक्रिय रहेंगे। इसके पीछे उनका उद्देश्य राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना और Gen-Z आंदोलन के समर्थनकर्ताओं की उम्मीदों पर खरा उतरना है।
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Gen-Z नेता मंत्रिमंडल में नहीं होंगे शामिल
Gen-Z नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अंतरिम सरकार में सीधे शामिल नहीं होंगे, लेकिन सरकार की कार्यप्रणाली और निर्णयों पर निगरानी रखना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने इस निगरानी प्रक्रिया को ऑनलाइन वोटिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए व्यवस्थित किया है, जिससे मंत्रियों के चयन और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों में उनका असर रह सके।
इस कदम से नेपाल की राजनीति में युवा नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी और जनता की सीधी निगरानी का नया मॉडल उभर रहा है। Gen-Z नेताओं का यह रुख केवल प्रतीकात्मक समर्थन नहीं, बल्कि सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे जनता और सरकार के बीच विश्वास और सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा, जबकि युवा आंदोलन के उद्देश्यों और अपेक्षाओं को नीति निर्माण में स्थान मिलेगा।
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