Balen Shah India Visit: बालेन शाह का 'भारत' को झटका! पीएम मोदी का न्योता ठुकराया, नहीं आएंगे दिल्ली?
Balen Shah India Visit: नेपाल के नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालेन) ने पद संभालने के बाद एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री कम से कम एक साल तक किसी भी विदेशी दौरे पर नहीं जाएंगे।
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के महासचिव भूप देव शाह ने एक टीवी इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री का ध्यान फिलहाल अंतरराष्ट्रीय दौरों के बजाय देश की आंतरिक स्थिति और विकास कार्यों पर केंद्रित है।

Balen Shah Foreign Visit: विदेशी दौरों और परंपरा से दूरी
नेपाल में यह परंपरा रही है कि प्रधानमंत्री शपथ लेने के बाद सबसे पहले भारत का दौरा करते हैं। 2014 के बाद से छह में से पांच प्रधानमंत्रियों ने इसी का पालन किया। हालांकि, बालेन शाह ने इस बार भारत से मिले न्योते के बावजूद एक साल तक विदेश न जाने का फैसला किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विदेश नीति में किसी बड़े टकराव का संकेत नहीं, बल्कि कूटनीतिक मामलों में एक सतर्क और अलग नजरिया अपनाने की कोशिश है।
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Nepal Foreign Policy: घरेलू समस्याओं को दी प्राथमिकता
RSP के अनुसार, प्रधानमंत्री का मानना है कि नेपाल की वर्तमान आर्थिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए उनका देश में रहना अनिवार्य है। वे विदेश यात्राओं पर समय बिताने के बजाय आम जनता से जुड़े मुद्दों और पेंडिंग विकास परियोजनाओं को गति देना चाहते हैं। उनका यह रुख नेपाली राजनीति में पारंपरिक ढर्रे से हटकर देखा जा रहा है, जहां अक्सर नेता वैश्विक मंचों को घरेलू समस्याओं से ऊपर रखते रहे हैं।
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पार्टी की राजनीति पर नया रुख
बालेन शाह ने सरकार के काम और पार्टी के कामकाज को अलग रखने का फैसला किया है। वे पार्टी की अंदरूनी बैठकों और राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बजाय अपनी कार्यकारी भूमिका पर ध्यान दे रहे हैं। RSP ने 'एक व्यक्ति, एक पद' की व्यवस्था को सख्ती से लागू किया है, ताकि प्रधानमंत्री का पूरा समय शासन चलाने में व्यय हो। यह कदम नेपाली राजनीति में जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
विदेशी राजनयिकों के प्रति नजरिया
प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद बालेन शाह ने विदेशी मेहमानों और उच्चायुक्तों से मिलने के मामले में भी काफी सधी हुई दूरी बनाए रखी है। वे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बजाय घरेलू 'डिलीवरी' पर अधिक भरोसा दिखा रहे हैं। उनका यह रवैया दर्शाता है कि वे पहले खुद को प्रशासनिक स्तर पर साबित करना चाहते हैं, जिसके बाद ही वे अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विदेशी दौरों की ओर कदम बढ़ाएंगे।












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