FATF की ब्लैक-लिस्ट में रखा जा सकता है नेपाल, आतंकवादियों को आर्थिक मदद रोकने में हुआ फेल

FATF की ब्लैकलिस्ट में जाने से किसी भी देश की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है और अगर नेपाल ब्लैकलिस्ट या ग्रे-लिस्ट में डाला जाता है, तो उसकी अर्थव्यवस्था ही चरमरा जाएगी।

nepal in FATF

Nepal In FATF Grey List: भारत के पड़ोसी देश नेपाल को बहुत बड़ा झटका लग सकता है और नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे-लिस्ट में रखा जा सकता है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट में लिखा गया है, कि नेपाल पर मनी लॉन्डरिंग और आतंकियों के वित्तपोषण के आरोप लगे हैं और पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हिमालयी देश को बहुत बड़े संकट का सामना करना पड़ सकता है।

एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट में नेपाल?

एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट में नेपाल?

काठमांडू पोस्ट में पृथ्वी मान श्रेष्ठ ने लिखा है कि, एफएटीएफ की जांच में पाया गया है कि, मनी लॉन्डरिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण से संबंधित कानूनों के प्रवर्तन, दोनों में नेपाल को लेकर कमियां पाई गई हैं। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादियों को वित्तपोषण कर रहा है और पेरिस स्थिति ग्लोबल एजेंसी एफएटीएफ के नियमों को पूरा करने में नेपाल संघर्ष कर रहा है। एफएटीएफ ने कम से कम 15 कानूनों की पहचान की है, जिसका पालन करने में नेपाल असमर्थ साबित हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल को अगर एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट में रखा जाता है, तो फिर नेपाल की अर्थव्यवस्था के लिए ये एक घातक कदम साबित होगा, जो काफी ज्यादा विदेशी सहायता पर निर्भर है।

बड़े संकट में फंसने वाला है नेपाल

बड़े संकट में फंसने वाला है नेपाल

नेपाल पहले से ही विदेशी मदद पर निर्भर रहा है और आयात के लिए नेपाल पूरी तरह से विदेशों पर निर्भर रहा है, लिहाजा अगर नेपाल को एफएटीएफ की ग्रे-लिस्ट में डाल दिया जाता है, तो फिर नेपाल के व्यापार, अर्थव्यवस्था को गहरा धक्का लगेगा। नेपाल की रेटिंग में कमी आएगी और उसकी अर्थव्यवस्था सिकुड़ जाएगी। मनी लॉन्ड्रिंग पर एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) के एक प्रतिनिधिमंडल ने दो हफ्ते पहले नेपाल का दौरा किया था और इस बात की पड़ताल की थी, कि मनी लॉन्डरिंग और आतंकियों को फंडिंग रोकने को लेकर नेपाल क्या कर रहा है। अधिकारियों ने कहा कि, एपीजी ने 16 दिसंबर तक नेपाल सरकार के उठाए गये कदमों का मूल्यांकन किया और इसमें नेपाल की कार्रवाई को काफी कमजोर पाया गया है, लिहाजा अगर नेपाल को ब्लैकलिस्ट में नहीं भी डाला जाता है, तो भी उसका ग्रे-लिस्ट में जाना तय है।

ब्लैकलिस्ट होने पर क्या होगा?

ब्लैकलिस्ट होने पर क्या होगा?

एफएटीएफ का ब्लैकलिस्ट टर्म टेरर फाइनिंग को लेकर काफी सख्त है और अगर कोई देश एक साल के लिए भी ब्लैकलिस्ट होता है, तो उसकी अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है। खासकर नेपाल के लिए ये स्थिति वाकई में अनहोनी जैसा ही होगा। वर्तमान में, उत्तर कोरिया, ईरान और म्यांमार एफएटीएफ की ब्लैक लिस्ट में हैं और इन देशों की आर्थिक स्थिति विकराल बनी हुई है। ब्लैकलिस्ट होने के बाद से ईरान की करेंसी डॉलर के मुकाबले 3 लाख के वैल्यू को पार कर चुका है। लिहाजा, अगर नेपाल को ब्लैकलिस्ट में डाला जाता है, तो फिर उसी वक्त से विदेशों से आने वाली मदद रूक जाएगी और तमाम वित्तीय संस्थाओं, जैसे आईएमएफ या वर्ल्ड बैंक से उसे लोन मिलना बंद हो जाएगा। यानि, नेपाल घुटनों पर आ सकता है।

ग्रे-लिस्ट में शामिल होने पर क्या होगा?

ग्रे-लिस्ट में शामिल होने पर क्या होगा?

अगर नेपाल को एक बार ग्रे-लिस्ट में शामिल किया जाता है, फिर भी उसकी अर्थव्यवस्था ग्रे-लिस्ट की मार सहने लायक नहीं है। ग्रे-लिस्ट होने के बाद नेपाल के हर अंतर्राष्ट्रीय लेन-देन की कड़ी निगरानी की जाएगी और उसे निश्चित अवधि के अंदर तमाम ऐसे नेटवर्क्स को तोड़ने होंगे, जिनके जरिए आतंकियों का वित्तपोषण किया जाता है। हालांकि, ग्रे-लिस्ट होने के बाद बैंकों को लोन देने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बैंक, ग्रे-लिस्ट में आने वाले देशों को काफी कम लोन देते हैं। ग्रे-लिस्ट में जाने से क्या फर्क पड़ता है, इसका जीता-जागता उताहरण पाकिस्तान है, जिसकी अर्थव्यवस्था तबाह हो चुकती है।

नेपाल पर क्या हो सकता है असर?

नेपाल पर क्या हो सकता है असर?

तबादलैब प्राइवेट लिमिटेड थिंक टैंक और एडवाइजरी सर्विस ने 2021 में एक रिपोर्ट में कहा था, कि 2008 से 2019 तक अलग अलग अंतरालों पर पाकिस्तान को एफएटीएफ ने ग्रे-लिस्ट में डालने का काम किया है, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान की जीडीपी में ही सिर्फ 38 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। इसके साथ ही पाकिस्तान को काफी उच्च ब्याज दरों पर लोन मिलता है और पाकिस्तान में एफडीआई आना करीब करीब बंद हो चुका है, लिहाजा देश के निर्यात सेक्टर का भट्टा बैठ चुका है। नेपाल साल 2008 से 2014 के बीच FATF की ग्रेलिस्ट में रह चुका है। वहीं, नाम न छापने की शर्त पर नेपाल राष्ट्र बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एएनआई से कहा कि, "हमारे ऊपर ग्रेलिस्ट में रखे जाने का एक वास्तविक जोखिम है, क्योंकि हमारे कानून में मनी लॉन्डरिंग और आतंकियों को पैसे पहुंचने से रोकने के लिए जो कानून हैं, उनमें काफी कमिया हैं।

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