पंजशीर विद्रोहियों ने तालिबान की अंतरिम सरकार को ठुकराया, गृहयुद्ध की चपेट में आएगा अफगानिस्तान!
पंजशीर ने नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स नॉर्दर्न एलायंस ने तालिबान की अंतरिम सरकार को खारिज कर दिया है और लोकतांत्रिक चुनाव होने तक लड़ाई का ऐलान किया है।
काबुल, सितंबर 08: अफगानिस्तान में तालिबान की अंतरिम सरकार को मानने से पंजशीर के विद्रोही नेताओं ने इनकार कर दिया है। जिसके बाद आशंका जताई जा रही है कि बहुत जल्द अफगानिस्तान गृहयुद्ध की चपेट में आ सकता है। पंजशीर में नॉर्दर्न एलायंस विद्रोहियों ने घोषणा की है कि वो तालिबान की अंतरिम सरकार को मानने से इनकार करते हैं, वहीं, अफगानिस्तान के कई हिस्सों से तालिबान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में रैलियां निकलने की खबरें आ रही हैं। वहीं कल काबुल में निकाली गई तालिबान-पाकिस्तान विरोधी रैली पर तालिबान ने गोलियां चलाई थी, जिसमें कुछ लोगों के मारे जाने की खबर है।

पंजशीर ने किया सरकार को मानने से इनकार
मंगलवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में अफगानिस्तान के राष्ट्रीय प्रतिरोध मोर्चा (एनआरएफ) ने तालिबान की कार्यवाहक कैबिनेट की घोषणा को "अवैध" करार दिया है। 15 अगस्त को काबुल में तालिबान के हमले के बाद अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने इस्तीफा दे दिया था और अपने सहयोगियों के साथ देश छोड़कर भाग गए। सालेह मसूद और अहमद मसूद के नेतृत्व में प्रतिरोध बलों ने आतंकवादी संगठन तालिबान को पंजशीर पर कब्जा करने से रोकने की पूरी कोशिश की। भले ही तालिबान ने दावा किया कि उसने सोमवार को प्रांत पर कब्जा कर लिया था, लेकिन एनआरएफ ने लोगों से अपना प्रतिरोध जारी रखने का आह्वान किया है। जिसके बाद अफगानिस्तान के कई इलाकों में बड़ी-बड़ी रैलियां निकाली जा रही हैं और स्थिति काफी तनावपूर्ण होती जा रही है।

पंजशीर के विद्रोहियों ने क्या कहा?
पंजशीर में तालिबान को कड़ी टक्कर देने वाले एनआरएफ ने अपने बयान में कहा है कि, "हमारे स्वतंत्र और स्वतंत्रता-प्रेमी लोग, जैसे उन्होंने सभी प्रकार के अधिनायकवाद, उग्रवाद, ज़ेनोफोबिया और उनसे पैदा हुए शासनों का विरोध किया है, उसी तरह देश को तालिबान आजाद करवाने के लिए विरोध जारी रहगहे और आतंकवादियों और उनके सहयोगियों को देश छोड़ना होगा।'' एनआरएफ ने कहा कि, काबुल में तालिबान का नाजायज शासन अफगानिस्तान, क्षेत्र और दुनिया की स्थिरता और सुरक्षा के लिए खतरा है। NRF का मानना है कि एक लोकतांत्रिक, कानूनी और वैध सरकार की स्थापना सिर्फ लोगों की इच्छा और चुनाव के माध्यम से की जा सकती है एक आम चुनाव जो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को स्वीकार्य हो।"

अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ
एनआरएफ ने कहा है कि बंदूक के दम पर सत्ता पर कब्जा करना और लोगों पर जबरन अपना शासन थोपना अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है। इसके साथ ही एनआरएफ ने वैश्विक समुदाय से तालिबान की सरकार को मान्यता नहीं देने की अपील की है। इसके अलावा एनआरएफ ने तालिबानी आतंकवाद से छुटकारा पाने के लिए अफगानों के संघर्ष का समर्थन करने का आह्वान किया। प्रतिरोध बलों ने कहा कि, "एनआरएफ जल्द ही अफगानिस्तान के महत्वपूर्ण राजनीतिक आंकड़ों और नीति विशेषज्ञों के परामर्श के बाद भविष्य की सरकार पर निर्णय लेगा।''

तालिबान ने बनाई अंतरिम सरकार
आपको बता दें कि 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा करने के बाद मंगलवार को तालिबान ने अपनी सरकार के गठन का ऐलान कर दिया है। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने काबुल में बताया है कि मुल्ला हसन अखुंद तालिबान सरकार में सुप्रीम लीडर यानी हेड ऑफ स्टेट होंगे। वहीं अब्दुल गनी बारादर डिप्टी अफगान लीडर होंगे। तालिबान ने हालांकि साफ किया है कि ये सिर्फ कार्यवाहक सरकार है। तालिबान की इस कार्यवाहक सरकार में लीडर मोहम्मद हसन और डिप्टी लीडर मुल्ला अब्दुल गनी बारादर के साथ मावलवी हन्नाफीक को सेकेंड डिप्टी लीडर बनाया गया है। मुल्ला हसन अखुंदी को हेड ऑफ स्टेट, मुल्ला याकूब को रक्षा मंत्री और सेराजुद्दीन हक्कानी को इंटीरियर मिनिस्टर बनाया गया है।












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