पृथ्वी ही नहीं अब इस पिंड का भी होगा अपना Time Zone, पृथ्वी से कितना अंतर? NASA बताया
तरिक्ष एजेंसियां लगातार स्पेस की रहस्यमयी दुनिया के कुछ ऐसी जानकारी खोजती हैं, जो हमारे गृह यानी धरती के लिए अनोखी होती है। नासा ने चंद्रमा पर जीवन की संभावनाओं का तलाश हाल के कुछ दिनों में तेज की है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी ने हाल ही में चांद के लिए टाइम जोन निर्धारित करने की तैयारी की है। जिसके तहत स्पेस कम्युनिकेशन और नेविगेशन (SCAN) कार्यक्रम समन्वित चंद्र समय (LTC) सिस्टम विकसित किया जाएगा। स्पेस एजेंसी की ओर से दावा किया जा रहा है कि यह कदम चंद्रमा पर भविष्य में शुरू किए जाने वाले मिशन के लिए अहम होगा।
कैसा होगा चंद्रमा का टाइम जोन
नासा का प्रस्तावित चंद्र समय मानक चंद्रमा पर रखी गई परमाणु घड़ियों के भारित औसत पर आधारित होगा। ये ठीक उसी तरह जैसे पृथ्वी के समन्वित सार्वभौमिक समय (UTC) की गणना की जाती है। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक, अप्रैल में जारी व्हाइट हाउस नीति निर्देश के बाद, नासा चंद्रमा के लिए एक मानकीकृत समय प्रणाली बनाने के प्रयासों के तहत आगे बढ़ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह परियोजना चंद्रमा के लिए पारंपरिक पृथ्वी-आधारित समय क्षेत्रों से मुक्त होने का संकेत है, जो कि चंद्रमा के कम गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के अनुकूल होगी. यह अनुकूलन आवश्यक है, क्योंकि इन गुरुत्वाकर्षण अंतरों के कारण चंद्रमा पर समय थोड़ा तेजी से बीतता है. इससे प्रत्येक दिन 58.7 माइक्रोसेकंड का फर्क आ जाता है जो खगोलीय गणनाओं के लिए समस्या कारक हो सकता है।
नासा के संचार और नेविगेशन प्रमुख केविन कॉगिन्स ने इससे पहले एक बयान में कहा, "यह पता चला है कि जब आप चंद्रमा या मंगल जैसे किसी अन्य पिंड पर जाते हैं, तो हर जगह दिल की धड़कन अलग होती है।"












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