नरेंद्र मोदी बोले मेरी आलोचना सही थी, लेकिन शंका गलत थी

शंघाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई में एक कार्यक्रम के दौरान चीन में रह रहे भारतीयों से मिले। उन्होंने यहां एक ऑडीटोरियम में सभा को संबोध‍ित किया और कहा कि एक साल में इतना बड़ा परिवर्तन आया है कि अब दुनिया भारत को सम्मान के साथ देखती है।

Modi

मोदी के भाषण के मुख्य बिंदु-

  • 16 मई 2014 को जनता ने मुझे चुना। उसके लिये आज भी मैं सबको धन्यवाद देता हूं।
  • गुजरात की बात करें तो उसके लिये मेरी आलोचना सही थी, लेकिन मेरे बारे में शंका गलत थी।
  • मैंने एक साल पहले नहीं सोचा था कि 16 मई 2015 को मुझे चीन में रह रहे भारतीयों से मिलने का अवसर मिलेगा।
  • आज मैं आपसे आशीर्वाद मांगने आया हूं। आप मुझे विकास यात्रा को सफल बनाने का आशीर्वाद दीजिये।
  • मुझे आशीर्वाद दीजिये, कि जाने अंजाने में भी मुझसे कोई गलती नहीं हो, जिससे मेरे देश का नुकसान हो।
  • जनता जनार्दन ईश्वर का रूप होती है, दोनों हाथों से मुझे आशीर्वाद दीजिये। यह मेरी ताकत है।
  • कल संडे है, आप छुट्टी मनायेंगे मैं काम करूंगा। मैं यहां से सीधे मंगोलिया जाउंगा और काम करूंगा।
  • मंगोलिया ने छुट्टी के दिन संसद का सत्र बुलाया है, विशेष रूप से एक भारतीय को सम्मान देने के लिये।
  • चीन के इतिहास में पहली बार हुआ कि राष्ट्रपति ने बीजिंग के बाहर जाकर दूसरे देश के नेता का स्वागत किया।
  • यह स्वागत नरेंद्र मोदी का नहीं था, मेरे साथ डेलीगेशन का नहीं था, यह स्वागत था सवा सौ करोड़ भारतीयों का।
  • लोगों को आश्चर्य होता है कि चीन में भारत को इतना सम्मान मिल रहा है।
  • आने वाले दिनों में भारत-चीन के घनिष्ठ संबंधों की मजबूत तैयार हो रही है।
  • इस दोस्ती से भारत को क्या मिला, चीन को क्या मिला, उस तराजू में मत तौलें।
  • ये दोनों दुनिया की एक तिहाई जनसंख्या है। एक तरफ पूरा विश्वा एक तरफ हम दोनों।
  • हम सोचते थे हम तो गरीब देश हैं, हमारा उनसे क्या मुकाबला। दोस्तों वक्त बदल चुका है।
  • चीन और भारत मिलकर दुनिया को अनेक संकटों से मुक्त‍ि दिला सकते हैं।
  • आज से 15 साल पहले काई सोच नहीं सकता था कि विश्व के मानचित्र पर कभी डेवलपिंग कंट्री को कोई पूछेगा।
  • डेवलपिंग कंट्री शब्द का प्रयोग इसलिये होता था कि ये पिछड़े हैं, बोल नहीं सकते। पीछे रहते हैं ये लोग।
  • सारी दुनिया देख रही है कि चीन और भारत मिलकर विश्व को एक नया उमंग एक नया उत्साह नई गति देने के लिये सामर्थवाद हैं।
  • भारत को यह दायित्व निभाना है। हिंदुस्तान इसकी तैयारी कर रहा है। विश्व को देने के लिये हमारे पास बहुत कुछ है।
  • आतंकवाद जिस प्रकार से मानवता का दुश्मन बना हुआ है, आये दिन निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया जाता है।
  • विश्व का कोई देश ऐसा नहीं है, जो आतंकवाद से रक्तरंजित नहीं हुआ हो। गोलियों से छलनी हुए लोगों को मरहम कौन लगायेगा।
  • उन्हें जीने का विश्वास वही दे सकता है, जिसके पूर्वजों ने वसुधैव कुटुंभकम का मंत्र लिया है।
  • आप प्रोफेशनल हैं, आप भारत आकर बड़ी फैक्ट्री तो लगा नहीं सकते।
  • लेकिन आप सिर्फ हर साल पांच चीनी नागरिकों को हिंदुस्तान ले आइये बस।
  • उनसे कहिये कि चलो शादी है, कार्यक्रम है, चलो भारत चलो।
  • अगर एक ह्यून सांग 1400 साल पहले भारत-चीन को जोड़ सकता है, आपकी संख्या तो लाखों में है।
  • भारत का पर्यटन बढ़ेगा और चीन भारत को ज्यादा समझेगा भी।
  • जिस बच्चे को उसकी मां ही दिन भर डांटती रहती है, उसे उसके दोस्त ही नहीं स्वीकार करते।
  • हम ही अगर कहते रहेंगे, कि हम ऐसे हैं हम वैसे हैं, तो देश ऐसे नहीं चलेगा।
  • हर देश की अपनी मुसीबतें होती हैं, हर कोई आगे बढ़ता है।
  • 21वीं सदी एश‍िया की सदी है। तो यहीं की भाषा चलेगी। एक साल के भीतर दुनिया की हर बड़ी एजेंसी ने कहा कि भारत का 7 प्रतिशत से भी ज्यादा ग्रोथ। सारी दुनिया कह रही है इंडिया आज सबसे तेज आगे बढ़ने वाला देश है। यह मैं नहीं कह रहा हूं। अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं कह रही हैं।
  • 30 साल में चीन कैसे बदला। रातों रात नहीं बढ़ा, 30 साल लगे।
  • भारत को भी विकास दर को आगे बढ़ाना होगा, आर्थ‍िक क्षेत्र में आगे बढ़ना होगा।
  • भारत को रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ना होगा। इस विश्वास के साथ हम कदम उठा रहे हैं।
  • जैसे हमारे सपने हैं, वैसे हमारे पैर जमीन पर भी हैं।
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