ड्रैगन की पुरानी दुश्मन हैं नैन्सी पेलोसी, 31 साल पहले चीन में घुसकर दिखाई थी आंख
ताइपे, 03 अगस्तः अमेरिका लगातार चीन को झटके पर झटके दिए जा रहा है। अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी के ताइवान दौरे से पहले से ही चीन भड़का हुआ है। अब नैन्सी पेलोसी ने ताइवान की राजधानी ताइपे में निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रतिनिधि से मुलाकात कर एक भार फिर से चीन की दुखती रग पर हाथ फेर दिया है। यह पहली बार नहीं है जब नैन्सी पेलोसी ने चीन को आंख दिखाई है। इससे पहले भी कई बार नैन्सी चीन से पंगे ले चुकी हैं।

तिब्बती सरकार के प्रतिनिधि से की मुलाकात
दक्षिण कोरिया जाने से पहले नैन्सी ने ताइवान की राजधानी ताइपे में तिब्बती सरकार के प्रतिनिधि से मुलाकात की। बता दें कि लंबे समय से ताइवान में निर्वासित तिब्बत की सरकार का प्रतिनिधि ऑफिस है। 23 मई 1951 को चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया था। चीन ने इस कब्जे को एक शांति की पहल बताया था, लेकिन चीन के दबाव में तिब्बत ने समझौते पर हस्ताक्षर किया था और बाद में चीन ने उस पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 1959 में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा भागकर भारत आ गए और यहां शरण ली।

नैन्सी पेलोसी तिब्बत को देती रही हैं समर्थन
गौरतलब है कि ताइवान की ही तरह तिब्बत का नाम आते ही चीन बौखला जाता है। ड्रैगन द्वारा चीन पर जबरदस्ती कब्जा किए जाने की चर्चा मात्र से चीन चिढ़ जाता है। लेकिन नैंसी पेलोसी हैं कि बार-बार चीन को परेशान कर देती हैं। नैन्सी पेलोसी चीन की दुखती रग को छेड़ने और तिब्बत के प्रति अपना समर्थन जाहिर करने से कभी पीछे नहीं हटतीं।

दलाई लामा से भारत दौरे पर की थी मुलाकात
इससे पहले नैन्सी पेलोसी ने 2008 में भारत का दौरा किया था। अपनी उस यात्रा के दौरान नैन्सी ने 21 मार्च 2008 को भारत में रह रहे तिब्बत के निर्वासित नेता और धर्मगुरु दलाई लामा से धर्मशाला के उनके मठ में जाकर मिली थीं। नैन्सी की दलाई लामा से इस मुलाकात से चीन बुरी तरह से भड़क गया था। लेकिन अमेरिकी राजनेता ने तिब्बत के मुद्दे पर अपना रुख खुलकर दुनिया के सामने रखा था। पांच साल पहले 2017 में भी नैन्सी पेलोसी भारत आई थीं। इस यात्रा में भी वह दलाई लामा से मिलीं और तिब्बत के मुद्दे पर अपना समर्थन जाहिर किया।

चीन में घुस कर ड्रैगन को दिखाई थी आंख
इतना ही नहीं 31 साल पहले भी नैन्सी पेलोसी ने अपना यही तेवर दिखाया था जब वह चीन में घुसकर ड्रैगन को अपनी आंख दिखाई थी। नैन्सी पेलोसी 1991 अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ चीन की यात्रा पर गई थीं। अपनी इस यात्रा के दौरान 4 सितंबर 1991 को नैन्सी अपने कुछ सहयोगियों के साथ बीजिंग के तियानानमेन चौक जा पहुंचीं। वहां उन्होंने हाथ में बैनर लेकर 1989 के नरसंहार में मारे गए नौजवानों को न सिर्फ श्रद्धांजलि दी, बल्कि उनकी लोकतंत्र की मांग का खुला समर्थन भी किया।

अमेरिका की सबसे वरिष्ठ राजनेता हैं नैन्सी
81 साल की नैन्सी पेलोसी अमेरिका की सबसे वरिष्ठ राजनेता हैं। अमेरिका में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव के स्पीकर का पद राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति के बाद तीसरा सबसे ऊंचा ओहदा है और पेलोसी दूसरी बार इस जिम्मेदारी को निभा रही हैं। वह इस पद पर बैठने वाली पहली महिला सांसद हैं।












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