म्यांमार को बेतहाशा हथियारों की सप्लाई कर रहा चीन, भारत के पड़ोसी को श्मशान बना रहे जिनपिंग- पुतिन!
म्यांमार की सेना ने फरवरी 2021 में चुनी हुई सरकार का तख्तापलट कर दिया था और देश के तमाम नेताओं को जेल में बंद कर दिया था। अभी तक 3 हजार से ज्यादा लोकतंत्र समर्थक मारे गये हैं।

Myanmar News: भारत के पड़ोसी देश म्यांमार की सत्ता पर फरवरी 2021 में कब्जा करने वाली सेना, लगाातार बेगुनाहों का कत्ल कर रही है और इस काम में उसकी मदद कर रहा है चीन।
संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ ने कहा है, कि "म्यांमार सेना नागरिकों के खिलाफ खतरनाक अभियान चला रही है, इसके भारी सबूत होने के बाद भी म्यांमार की सेना को हथियारों की सप्लाई की गई है।"
उन्होंने कहा, कि म्यांमार की सेना को फरवरी 2021 के बाद एक अरब डॉलर की हथियारों की सप्लाई की गई है, जिसका इस्तेमाल उसने अपनी ही देश के नागरिकों के खिलाफ किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार को हथियार बेचने में चीन, रूस और सिंगापुर की कंपनियां शामिल हैं। म्यांमार में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर यूनाइटेड नेशंस के टॉम एंड्रयूज ने बुधवार को न्यूयॉर्क में रिपोर्ट जारी की है, जिसमें म्यांमार में नागरिकों के अधिकार किस कदर कुचले गये हैं, उसके बारे में बात की गई है।
म्यांमार में हथियारों की सप्लाई
म्यांमार में जिस किस्म के हथियारों की सप्लाई की गई है, उनमें डुएल यूज टेक्नोलॉजी वाले हथियार भी शामिल हैं। इसके साथ ही, म्यांमार को हथियार बनाने वाली सामग्रियों की भी सप्लाई की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि "म्यांमार की सेना को बिना किसी रूकावट के हथियार और उससे भी ज्यादा नये हथियारों के निर्माण के लिए सामग्रियों की सप्लाई फरवरी 2021 के बाद से की जा रही है। और इन हथियारों के जरिए म्यांमार की सेना अपनी ही देश की जनता का उत्पीड़न कर रही है।"
रिपोर्ट में कहा गया है, कि 12 हजार 500 ऐसे असाइनमेंट्स हैं, जो शिपमेंट के जरिए या तो सीधे म्यांमार पहुंचाए गये हैं, या म्यांमार की सेना तक पहुंचाए गये हैं, या फिर म्यांमार की सेना के लिए काम करने वाली एजेसियों तक पहुंचाई गई हैं"।
यूएन अधिकारी ने कहा है, कि म्यांमार में सत्ता पलट के बाद म्यांमार की सेना को इतनी मात्रा में हथियारों की सप्लाई चौंकाने वाली है और म्यांमार की सेना को फाइटर जेट्स और ड्रोन हथियारों की भी सप्लाई की गई है। कम्युनिकेशन सिस्टम और कई अन्य तरह के सुरक्षा सामान भी म्यांमार मिलिट्री ने मंगवाए हैं।
अपने ही नागरिकों का दमन
फरवरी में म्यांमार की सेना, जिसे जुंटा कहा जाता है, उसने देश की सरकार का तख्तापलट कर दिया था और उसके बाद से सेना का शासन है, जिसने सभी लोकतांत्रित चैप्टर्स को खत्म कर डाला है।
तख्तापलट के बाद से म्यांमार में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिन्हें खामोश करने के लिए सेना हथियारों का इस्तेमाल कर रही है। वहीं, रिपोर्ट है कि म्यांमार के जातीय संगठन पीपुल्स डिफेंस फोर्सेसर (PDF) ने सरकार का तख्तालपट के बाद लगादतार सेना को निशाना बिना रही है और उसने लोकतांत्रिक पार्टियों से भी हाथ मिलाए हे।
PDF ने अब तख्तापलट में हटाए गए सांसदों और अन्य सैन्य शासन विरोध संगठनों के साथ मिलकर स्थापित नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट (एनयूजी) के साथ गठबंधन किया गया है।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र और अधिकार समूहों ने विरोध को दबाने के प्रयासों में सेना पर मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए कहा है, कि कुछ घटनाएं युद्ध अपराध होतीा हैं, जो मानवता के खिलाफ होती है।
आपको बता दें, कि म्यांमार की सेना ने पिछले महीने एक गांव में भीषण कत्लेआम मचा दी थी। पिछले महीने केंद्रीय सागैंग क्षेत्र के पाजीगी गांव पर मिलिट्री ने भीषण हमला किया था। ये हमला काफी खतरनाक और विध्वंसक था।
रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही बच्चों सहित करीब 300 ग्रामीण, एक नया एनयूजी कार्यालय खोलने के लिए एकत्र हुए थे, तो एक रूसी निर्मित याक-130 लड़ाकू जेट ने भीड़ पर दो 250 किग्रा (550 पाउंड) के बम गिराए।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि बम गिरने के बाद वहां की स्थिति के बारे में बताना अकल्पनीय है, क्योंकि चारों तरफ बच्चों और महिलाओं के चीथड़े पड़े थे। यूएन अधिकारी ने इस घटना को नरसंहार करार दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि बम धमाके में कम से कम 160 लोग मारे गए थे और केवल 59 लोगों के अवशेषों की पहचान की जा सकी है।
किसने कितने हथियार बेचे?
यूएन रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की हथियार कपनियों ने अभी तक 406 मिलियन डॉलर के हथियार और उपकरण म्यांमार की सेना को बेचा है। वहीं, चीन ने अभी तक 154 मिलियन डॉलर के हथियारों की सप्लाई म्यांमार की सेना को की है।
जबकि, सिंगापुर-ऑपरेटिंग इकाइयों ने 254 मिलियन डॉलर के हथियार म्यांमार में बेचे हैं।
म्यांमार की सेना को भारत की भी एक संस्था की तरफ से 51 मिलियन डॉलर और थाईलैंड ने 28 मिलियन डॉलर के हथियार बेचे हैं।
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आपको बता दें, फरवरी 2021 के बाद से म्यांमार की सेना ने अभी तक 3 हजार से ज्यादा लोकतंत्र समर्थकों को जान से मार दिया है और हजारों लोगों को गिरफ्तार कर जेल में रखा गया है। वहीं, अब कई विद्रोही संगठन भी बनने लगे हैं, जो आर्मी के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह कर रहे हैं, जिन्हें कुचलने के लिए सेना, किसी भी ठिकाने पर हमला कर देती है, चाहे उसमें बच्चे या महिलाएं ही क्यों ना मारे जाएं।












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