बात नहीं मानने पर सेना ने दो मॉडल्स को 15 सालों के लिए भेजा जेल, सलाखों के पीछे कटेगी पूरी जवानी
इन दोनों मॉडल्स के नाम Nang Mwe San और Thinzar Wint Kyaw हैं, जिनके इंस्टाग्राम पर 20 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं।
नॉयपीडो, अगस्त 07: भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में सैन्य शासन है और वहां की सेना ने देश में काफी सख्त कानून बना दिया है, जिसकी वजह से दो मॉडल्स को 15 सालों के लिए जेल भेज दिया गया है। इन मॉडल्स की गलती ये थी, कि इन्होंने सैन्य तानाशाह के आदेश को मानने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद इन दोनों मॉडल्स को देश की 'संस्कृति और गरिमा' को नुकसान पहुंचाने का गुनहगार ठहराकर 15 साल की जेल की सजा सुनाई गई है।

मॉडल्स को भेजा गया जेल
रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों मॉडल्स के नाम Nang Mwe San और Thinzar Wint Kyaw हैं, जिनके इंस्टाग्राम पर 20 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं, लेकिन ये दोनों मॉडल्स एक प्रसिद्ध एडल्स वेबसाइट पर भी अपनी तस्वीरें शेयर करती हैं, ताकि पैसे कमाया जाए, लेकिन उनके इस गुनाह ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। आपको बता दें कि, साल 2021 में म्यांमार की सेना, जिसे जुंटा कहा जाता है, उसने देश की चुनी हुई सरकार को सत्ता से बर्खास्त कर दिया था और फिर सैन्य शासन को देश पर थोप दिया है। म्यांमार के सैन्य तानाशाह अपनी मर्जी से काफी खतरनाक शासन चला रहे हैं और कई नेताओं को फांसी पर चढ़ा चुके हैं, वहीं म्यांमार की सबसे प्रसिद्ध और नोबेल पुरस्कार विजेता नेता आंग सान सू की को भी जेल की सजा सुनाई गई है और अब संस्कृति के नाम पर मनोरंजन जगत को निशाने पर लिया जा रहा है।

सेना ने जारी किया बयान
दोनों मॉडल्स को 15 सालों की सजा सुनाने के बाद म्यांमार की सेना की तरफ से शुक्रवार को एक बयान जारी किया गया है, जिसमें दावा किया गया है, कि इन मॉडल्स ने, जिनका नाम 'मेव सैन' और 'विंट क्याव' है, उन्होंने "पेड अश्लील तस्वीरें और वीडियो शेयर किए हैं जो ... म्यांमार की संस्कृति और गरिमा को नुकसान पहुंचा सकते हैं"। सैन्य अधिकारियों ने मॉडल पर "म्यांमार की महिलाओं द्वारा बनाए रखी जाने वाली शालीनता के बिना" व्यवहार करने का भी आरोप लगाया और कहा कि, उन्होंने एडल्ट वेबसाइट्स के लिए कंटेट तैयार किए हैं और उन्होंने सेना प्रमुख के आदेश को मानने से इनकार किया है, जिससे देश की परंपरा और प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचा है।

जोखिम भरा देश बना म्यांमार
आपको बता दें कि, ये दोनों मॉडल्स कोई पहली कलाकार नहीं हैं, जिन्हें 'अश्लीलता' पड़ोसने के आरोप में सख्त सजा सुनाई गई है, बल्कि म्यांमार की सेना ने मनोरंजन उद्योग को काफी सख्त सेंसरशिप के जाल में जकड़ लिया है और कई कलाकारों को, जो लोकतंत्र का समर्थन करते हैं, उन्हें किसी ना किसी आरोप में फंसाकर जेल भेज दिया जा रहा है और उन्हीं पीड़ितों में से मेव सैन और विंट क्याव भी दो नाम हैं। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि, "म्यांमार की महिलाओं की शर्म और शील को नुकसान पहुंचाने वाले किसी अन्य व्यक्ति का पता लगाया जाएगा और उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।"

मॉडल्स को किया गया काफी परेशान
रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों मॉडल्स पर म्यांमार की सेना ने कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे और उनके देश से बाहर निकलने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके अलावा उन्हें किसी भी वेबसाइट पर तस्वीरें नहीं डालने के लिए कहा गया था। वहीं, एक मॉडल म्वे सैन का मेडिकल लाइसेंस म्यांमार मेडिकल काउंसिल द्वारा रद्द कर दिया गया था और विंट क्याव को विद्रोहियों द्वारा शासित एक जातीय क्षेत्र में जाते वक्त रास्ते में हिरासत में लिया गया था।

सरकार का तख्तापलट कर चुकी है सेना
आपको बता दें कि, म्यांमार में साल 2020 में आम चुनाव करवाए गये थे, जिसमें आंग सान सू ची की पार्टी को एकतरफा जीत मिली थी और उसके साथ ही देश में सैन्य शासन का अंत हो गया था। लेकिन, सेना के खिलाफ ये संघर्ष लंबा नहीं चल सका और पिछले साल एक फरवरी को सेना ने लोकतांत्रिक सत्ता का तख्तापलट कर दिया। वहीं, आंग सान सू ची समेत उनकी 'नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी पार्टी' के तमाम बड़े नेताओं को सेना ने गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद से ही म्यांमार मेंसेना के खिलाफ भारी प्रदर्शन किए जा रहे हैं और अभी तक 2100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

चुनाव से सेना को सख्त एतराज
म्यांमार की सेना आंग सान सू ची की पार्टी को चुनाव में मिली एकतरफा जीत को फर्जी बताती है औरसेना का कहना है कि, उसे चुनाव पर विश्वास नहीं है, जबकि म्यांमार में पहली बार लोकतांत्रिक चुनावकवर करने गये दुनियाभर के पत्रकारों और स्वतंत्र विश्लेषकों का कहना है कि, देश में पूरी तरह सेनिष्पक्ष चुनाव हुए थे और चुनाव को लेकर देश की जनता में अभूतपूर्व उत्साह था। वहीं, आंग सान सूची के खिलाफ सेना जितने भी मुकदमे चला रही है, उन सभी आरोपों को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय फर्जीकरार दे चुका है और सेना को देश में फिर से लोकतांत्रिक सरकार बहाल करने को कह चुका है। वहीं,अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और यूरोपीय देश म्यांमार की सेना को प्रतिबंधित कर चुके हैं।












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