इस मुस्लिम देश ने तालिबान को दी थी नसीहत, लेकिन अपना ही घर है महिलाओं के लिए जहन्नुम
तालिबान को नसीहत देने वाले कतर में महिलाओं की जो स्थिति है, उसे जानकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी।
दोहा, अक्टूबर 10: कुछ दिनों पहले कतर ने तालिबान को नसीहत देते हुए कहा था कि वो भी एक मुस्लिम देश है और महिलाओं का सम्मान कैसे किया जाता है, तालिबान को उससे सीखना चाहिए। इतना ही नहीं, कतर ने तालिबान राज में महिलाओं की स्थिति पर गंभीर निराशा जताई थी। इसमें कोई शक भी नहीं, कि तालिबान के शासन में महिलाओं से सारे अधिकार छीन लिए गये हैं, लेकिन तालिबान को नसीहत देने वाले कतर में महिलाओं की जो स्थिति है, उसे जानकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। कतर में जिस महिला से रेप होता है, कोर्ट में उस महिला को ही आरोपी ठहरा दिया जाता है। (सभी तस्वीर प्रतीकात्मक)

महिलाओं की बेहद खराब स्थिति
समानता के लिहाज से देखें तो मुस्लिम देश कतर में महिलाओं की स्थिति सबसे विकृत बनाकर रख दी गई है। कतर में महिलाओं के लिए काम करने वाले संगठनों का आरोप है कि, कतर की सरकार ने इस्लामिक कानून को इतना ज्यादा सख्त कर रखा है, कि यौन हिंसा की शिकार महिलाओं का काफी आसानी से आरोपी ठहरा दिया जाता है और जिस शख्स पर यौन हिंसा का आरोप रहता है, वो पीड़ित बनकर बरी हो जाता है। कतर की अदालत में अगर कोई पुरुष सिर्फ इतना कह दे, कि उसने महिला की सहमति के आधार पर उससे संबंध बनाए हैं, तो इतना कहने पर ही उसे रिहा कर दिया जाता है और अगर पुरुष शादीशुदा हो, तो भी उसपर कोई मुकदमा नहीं चलता है। लेकिन, अगर यही काम कोई महिला करे, तो उसे कोड़े मारने का प्रावधान है।

कतर का 'जिना कानून'
ह्यूमन राइट्स वॉच की वरिष्ठ महिला अधिकार और कतर में महिलाओं को लेकर रिसर्च करने वालीं शोधकर्ता रोथना बेगम ने रविवार को द मेल को डराने वाली सच्चाईयां बताई हैं और एक 'जिना कानून' का जिक्र किया है, जिसके बाद महिलाओं की स्थिति और भी ज्यादा बदतर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि, अगले साल जब कतर में विश्व कप फुटबॉल का आयोजन किया जाएगा, उस वक्त 'जिना कानून' का सबसे ज्यादा गलत इस्तेमाल किया जाएगा और सबसे खतरनाक बात ये है कि इस कानून में महिलाओं के पास अपनी बात तक कहने का ना के बराबर विकल्प है। उन्होंने कहा कि, ''कतर में यौन हिंसा पीड़ितों के लिए समर्थिन ना के बराबर है, जो काफी चिंताजनक है।' (तस्वीर- कतर के बादशाह)
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सच छिपाने की कोशिश में कतर
शोधकर्ता रोथना बेगम ने 'द मेल' को बताया कि, जब कतर ने फुटबॉल विश्वकप आयोजन करवाने के लिए पैरवी शुरू की थी, उसके बाद से ही कतर के सरकारी अखबारों में 'जिना कानून' के तहत 'पीड़ित' महिलाओं को ही दंडित करने की खबरों का आना बंद हो गई थी और तब से कतर ने ऐसी किसी भी चीज को छिपाने की कोशिश की है जो नकारात्मक छवि पेश कर सकती है। उन्होंने कहा कि, सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाए तो कतर एक बेहद सुरक्षित देश है, लेकिन बात महिलाओं की हो, तो इस्लामिक कानूनों के जरिए उन्हों बांध कर रखा गया है। मार्च में, ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट ने कतर में पुरूष और महिलाओं के बीच काफी ज्यादा भेदभाव पर एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें कहा गया था कि कतर की महिलाओं को हर एक काम के लिए घर के पुरुष से इजाजत लेनी पड़ती है। खासकर अगर महिला शादीशुदा है, तो फिर अपने पति की मर्जी के बगैर उसका घर से बाहर निकलना भी मना रहता है।

महिला अपराध के उदाहरण
एक ब्रिटिश महिला, जिसने कतर में जाकर, कतर के एक मुस्लिम शख्स से शादी रचाई थी, उसे बच्चा होने के बाद उसके शौहर ने छोड़ दिया। लेकिन, अब उस ब्रिटिश महिला को कतर से वापस ब्रिटेन नहीं जा सकती है, क्योंकि उसका पति उसे कतर से जाने की इजाजत नहीं दे रहा है। दोहा में रहने वाली महिला ने कहा कि, 'समाज और कानून उसके (पति) पक्ष में हैं। यह हमेशा उस आदमी का पक्ष लेता है, फिर भी वह हमारी शादी के दौरान गाली-गलौज करता था और मुझे किसी मामूली बात के लिए पीटा करता था। उसने मुझे या बच्चों को पिछले कई सालों से नहीं देखा है, फिर भी वह मुझ पर यह अधिकार रखता है। मैं यहां फंस चुकी हूं। मैंने तलाक लेने की कोशिश की, लेकिन वो तलाक भी नहीं दे रहा है, जबकि उसने दूसरी शादी कर रखी है, अगर मैं अपने बच्चों के साथ एयरपोर्ट जाती हूं, तो मुझे गिरफ्तार कर लिया जाता है।' 2019 में नोफ अल-अदीद नाम की लड़की किसी तरफ से कतर से भाग निकली। उसने कतर से भागने के बाद बताया कि, ''उसे घर में बुरी तरह से घरेलू हिंसा का शिकार बनाया जाता था और उसे सिर्फ स्कूल जाने की इजाजत मिली थी।''

अविवाहित लड़कियों की स्थिति
कतर की एक महिला, जो अब ब्रिटेन में रहती हैं, उन्होंने कहा कि, अगर आप अविवाहित हैं और आपको किसी डॉक्टर से इलाज कराना है, तो उसके लिए भी आपको घरवालों से इजाजत लेनी पड़ती है और अगर आप शादीशुदा हैं, तो आपको अपनी शादी का सर्टिफिकेट, पति की इजाजत और पति का आईकार्ड लेकर अस्पताल जाना होता है। अगर आप बगैर इजाजत अस्पताल पहुंच गईं, तो आपके घरवालों को बता दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि, इसके पीछे की बात सिर्फ इतनी भर है, कि किसी अविवाहित लड़की ने बगैर मर्जी किसी से संबंध तो नहीं बना लिया है। या पति को कोई महिला 'धोखा' तो नहीं दे रही है। एक महिला डॉक्टर ने नाम ना बताने की शर्त पर डेली मेस से कहा कि, ''अगर कोई महिला गर्भवती है या गर्भावस्ता से संबंधित किसी जांच के लिए अस्पताल आती है, तो हमें उसके परिवार से, पति से पुष्टि करनी पड़ती है। अगर वो तलाकशुदा है, तो फिर उसके लिए अलग नियम हैं''।












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