बंदरों को लेकर दिलचस्प रिसर्च, लड़ाई से बचने के लिए बदल लेते हैं बोलने का तरीका
ब्राजील के अमेजन के जंगलों में तमारिन प्रजाति के बंदरों के ऊपर यह अनूठा रिसर्च किया है अंगीला रस्कीन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने।
ब्रासीलिया, मई 28: बंदरों को लेकर एक हालिया शोध में बेहद दिलचस्प खुलासा हुआ है। हम आप ये तो जानते ही हैं कि इंसानों का विकास बंदरों से ही हुआ है लेकिन अब बंदरों की प्रकृति को लेकर एक अनोखी बात पता चली है। एक रिसर्च में पता चला है कि किसी दूसरे जानवरों या प्रजाति के अधिकार क्षेत्र में जाने के बाद किसी विवाद से बचने के लिए बंदर अपना उच्चारण ही बदल लेते हैं। बंदरों पर यह बेहद दिलचस्प शोध किया गया है ब्राजील के अमेजन की जंगलों में रहने वाले अलग अलग बंदरों की प्रजातियों पर। जिसमें पता चला है कि तमारिन प्रजाति के जो बंदर होते हैं, उन्हें कुदरत ने खास हूनरों से नवाजा है और वो 'जैसा देश वैसा भेष' पर यकीन करते हैं।

जैसा देश वैसा भेष
ब्राजील के अमेजन के जंगलों में तमारिन प्रजाति के बंदरों के ऊपर यह अनूठा रिसर्च किया है अंगीला रस्कीन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने। वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया है कि लाल हाथ वाले तमारिन प्रजाति के बंदर जब दूसरी प्रजाति के बंदरों को अधिकार क्षेत्र में दाखिल होते हैं तो अपने बोलने का तरीका और उच्चारण बदल लेते हैं। लाल हाथ वाले तमारिन प्रजाति के बंदर ऐसा इसलिए करते हैं ताकि दूसरे इलाकों में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों का वो वहां के स्थानीय जानवरों से विवाद किए बगैर इस्तेमाल कर सकें। वैज्ञानिकों का मानना है कि लाल हाथ वाले तमारिन प्रजाति के बंदरों के पास अपने बोलने का तरीका या उच्चारण बदल लेने की काफी अनोखी शक्ति है, जिसे एक इंसान काफी मेहनत और लंबी प्रैक्टिस के बाद ही बदल सकता है। वैज्ञानिकों ने अपनी रिसर्च में पाया है कि एक प्रजाति के बंदर किसी दूसरी प्रजाति के बंदरों के इलाके में जाने के साथ ही उच्चारण पूरी तरह से बदल लेते हैं और बंदरों में यह काफी अनोखी कला है।

कुदरत से मिला आशीर्वाद
अंगीला रस्कीन यूनिवर्सिटी में इवॉल्यूशरी बॉयोलॉजी बढ़ाने वाले और इस रिसर्च में शामिल वैज्ञानिक डॉ. जैकब डन ने कहा कि 'ये पहली बार पता चला है कि जानवर उच्चारण बदल सकते हैं और एक प्रजाति के बोलने का तरीका सीधे तौर पर अडॉप्ट कर लेना एक खास कुदरती गुण है।' उन्होंने कहा है कि 'बंदरों के इस अलग अलग प्रजाति को जीवन जीने के लिए एक तरह के प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर रहना पड़ता है और उच्चारण बदल लेने के बाद दूसरी प्रजाति के बंदरों से घुलने-मिलने में काफी आसानी हो जाती है। खासकर काफी ज्यादा घने जंगलों में, जहां आपसी लड़ाई का मतलब है जान जोखिम में डालना।' इस रिसर्च को अंजाम देने वाली लीड वैज्ञानिक तैनारा सोब्रोज़ा ने कहा कि 'ये हमारे लिए काफी आश्चर्यजनक रिसर्च है और रिसर्च के दौरान हम हैरान रह गये थे कि एक इलाका बदलने के बाद ये बंदर अपने बोलने का उच्चारण पूरी तरह से बदल लेते हैं।' हालांकि, उन्होनें ये भी कहा कि 'अभी तक सिर्फ लाल हाथ वाले तमारिन प्रजाति के बंदरों में ही उच्चारण बदलने की खास शक्ति पाई गई है वो भी तब जब उनके आसपास पाइड तमारिन प्रजाति के बंदर मौजूद हों।'

कैसे उच्चारण बदल लेते हैं बंदर ?
आखिर ये बंदल अपनी उच्चारण को बदलने में कैसे कामयाब हो जाते हैं, वैज्ञानिक डॉ. जैकब डन अपनी रिसर्च के दौरान अपनी रिसर्च के दौरान कई नतीजों पर पहुंचे हैं और सबसे पुख्ता वजह उन्होंने माना है कि 'काफी घने जंगलों में एक साथ रहने के दौरान बंदरों की अलग अलग प्रजातियों में संबंध बन जाते हैं और उसके बाद जो नये बच्चे पैदा होते हैं, शायद उनके अंदर अपने माता-पिता के अलग अलग गुण आ जाते होंगे'। वैज्ञानिकों का यह दिलचस्प रिसर्च विहेविरियल इकोलॉजी एंड सोसियोबायोलॉजी जर्नल में पब्लिश हुआ है। रिसर्च के दौरान विश्व के महानतम वैज्ञानिक डार्विन का सिद्धांत भी बंदरों पर लागू होता हुआ वैज्ञानिकों ने महसूस किया है कि 'कई मामलों में एक दूसरे से अलग होकर समस्या बढ़ाने से बेहतर ये होता है एक दूसरे से घुल मिल जाना और एक समान प्रकृति को संग्रहित कर लेना, ताकि जीवन जीने में आसानी हो जाए'। और ऐसा लाल हाथ वाले तमारिन प्रजाति के बंदरों की प्रकृति में भी पाया गया है।












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