दलाई लामा ने चीन को दिया बड़ा झटका, मंगोलियाई बच्चे को बनाया बौद्ध धर्म का तीसरा सबसे बड़ा गुरु
मौजूदा दलाई लामा को साल 1937 में खोजा गया था और उस वक्त वो सिर्फ 2 साल के थे। चीन की कोशिश इस बार किसी चीनी को दलाई लामा बनाने की है।

Dalai Lama News: तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने चीन को 440 वोल्ट का झटका दिया है और अमेरिका में पैदा हुए एक मंगोलियाई बच्चे को बौद्ध धर्म में तीसरे सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक नेता के पुनर्जन्म के रूप में नामित किया गया है। दलाई लामा का ये कदम चीन को चिढ़ाने वाला है और माना जा रहा है, कि उन्होंने अपने इस कदम से भारत-चीन विवाद में मंगोलिया को भी खींच लिया है। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में एक समारोह के दौरान आठ साल के मंगोलियन लड़के को दलाई लामा ने बौद्ध धर्म का तीसरा सबसे बड़ा गुरु नामित किया है और उनकी तस्वीर अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। आपको बता दें, कि तिब्बती धर्म गुरु और 87 साल के दलाई लामा धर्मशाला में निर्वासन में रहते हैं और भारत और चीन के बीच दलाई लामा को लेकर अकसर विवाद होता रहता है।
मंगोलियाई बच्चा बना बौद्ध गुरु
मंगोलियाई मूल का 8 साल का ये लड़का अब दलाई लामा और पंचेन लामा के बाद बौद्ध धर्म का तीसरा सबसे बड़ा गुरु बन गया है और दलाई लामा ने इस लड़के को 10वें खलखा जेटसन धम्पा रिनपोछे का पुनर्जन्म होने के तौर पर मान्यता दी है। आपको बता दें, कि बौद्ध धर्म में पुनर्जन्म का काफी महत्वपूर्ण स्थान है और माना जाता है, कि धर्मगुरुओं का पुनर्जन्म होता है और उन्हें फिर से गुरु बनाने के लिए उनकी तलाश की जाती है। ऐसा माना जाता है, कि धर्मगुरु का जन्म पूरी दुनिया में कहीं भी हो सकता है। मंगोलियाई मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है, कि ये बच्चा, जुड़वां लड़कों में से एक है, जिसका नाम अगुइदाई और अचिल्टाई अल्टानार है, जो अलतनार चिंचुलुन और मोनखनासन नर्मंदख के बेटे हैं। बच्चे के पिता अलतनार चिंचुलुन एक विश्वविद्यालय में गणित के प्रोफेसर और राष्ट्रीय संसाधन समूह की सीईओ हैं। लड़के की दादी, गरमजाव सेडेन मंगोलियाई संसद की पूर्व सांसद रह चुकी हैं।
दलाई लामा के कदम से भड़केगा चीन
मंगोलियाई लड़के को बौद्ध धर्म का आध्यात्मिक नेता बनाया जाना चीन की नाराजगी को हवा दे सकता है। चीन की कोशिश, किसी चीनी लड़के या फिर चीन के प्रति झुकाव रखने वाले किसी लड़के को आध्यात्मिक गुरु बनाना है। चीन की कोशिश दलाई लामा के जगह पर भी किसी चीनी लड़के को अगला दलाई लामा बनाना है, लिहाजा मंगोलाई लड़के को गुरु बनाने से चीन भड़क सकता है। चीन पहले ही पूरी सख्ती के साथ कह चुका है, कि "वह केवल उन बौद्ध नेताओं को मान्यता देगा, जिन्हें चीन सरकार द्वारा अनुमोदित विशेष नियुक्तियों की तरफ से चुना गया हो।" हालांकि, खुद दलाई लामा और अमेरिका, चीन की इस मांग को ठुकरा चुके हैं। चीन चाहता है, कि अगला दलाई लामा उसके पक्ष का हो, ताकि वो काफी आसानी से तिब्बत के लोगों को अपने पाले में कर सके।
भारत-चीन विवाद में मंगोलिया की एंट्री
मंगोलिया के लोगों के लिए ये घटनाक्रम उत्साह और आश्चर्य दोंनों का विषय है। इसके साथ ही मंगोलिया चीन के साथ संभावित दुश्मनी की बात को लेकर भी आशंकित है। इससे पहले साल 1995 में जब दलाई लामा ने बौद्ध धर्म के दूसरे सबसे बड़े गुरु पंचेन लामा को चुना था, तो उस बच्चे को चीनी अधिकारियों ने फौरन गिरफ्तार कर लिया था और उस बच्चे को अपने उम्मीदवार के साथ बदल दिया था। लिहाजा, इस बात की तीव्र आशंका बनी हुई है, कि जब खुद मौजूदा दलाई लामा अपने शरीर का त्याग करेंगे, तो फिर चीन क्या करेगा? ऐसा इसलिए, क्योंकि मौजूदा दलाई लामा घोषणा कर चुके हैं, कि अगला दलाई लामा चीनी नियंत्रित क्षेत्र से नहीं होगा, जो यह दर्शाता है, कि उनका उत्तराधिकारी किसी अन्य देश से उभर सकता है, जिसमें भारत, नेपाल, भूटान या मंगोलिया जैसे देश हो सकते हैं, जहां पर तिब्बती बौद्ध धर्म का अभ्यास किया जाता है। लेकिन, चीन का कहना है, कि वो उसी दलाई लामा को मान्यता देगा, जिसे चीन सरकार की बनाई गई कमेटी चुनेगा। लिहाजा, अगले दलाई लामा पर भी भारी विवाद होने वाला है।
मंगोलिया पर गुस्सा निकाल सकता है चीन
आपको बता दें, कि साल 2016 में दलाई लामा ने मंगोलिया का दौरा किया था और उस दौरान उन्होंने घोषणा की थी, कि जेटसन धम्पा का नया अवतार मंगोलिया में पैदा हुआ है, और उसे खोजने के लिए खोज चल रही है। चीन ने उस यात्रा पर गहरा एतराज जताया था और उसने मंगोलिया को राजनयिक नतीजे भुगतने की धमकी दी थी। चीन ने कहा था, कि अगर दलाई लामा को वापस नहीं भेजा गया, तो मंगोलिया को गंभीर अंजाम भुगतने होंगे। आपको बता दें, कि मंगोलिया पहले से ही चीनी आक्रामकता और तानाशाही का शिकार रहा है और चीन ने पहले ही इनर मंगोलिया क्षेत्र पर अवैध कब्जा कर रखा है, लिहाजा मंगोलियाई बच्चे के बौद्ध धर्म गुरु बनने पर मंगोलिया के लोगों में डर भी है, कि चीन की नाराजगी कहीं उसे भारी ना पड़ जाए।
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1937 में चुने गये थे मौजूदा दलाई लामा
वहीं, धर्मशाला में करीब 600 बौद्ध उपासकों के सामने मंगोलियाई बच्चे को तीसरा सबसे बड़ा धर्मगुरु बनाया गया और दलाई लामा ने अपने अनुयायियों से कहा, कि "आज हमारे साथ मंगोलिया के खलखा जेट्सन धम्पा रिनपोछे का पुनर्जन्म है।" उन्होंने आगे कहा, कि "उनके पूर्ववर्तियों का चक्रसंवर के कृष्णाचार्य वंश के साथ घनिष्ठ संबंध था। उनमें से एक ने मंगोलिया में अपने अभ्यास के लिए समर्पित एक मठ की स्थापना की थी। इसलिए, आज उनका यहां होना काफी शुभ है"। आपको बता दें, कि मौजूदा दलाई लामा को साल 1937 में पहचाना गया था, जब वो सिर्फ 2 साल के थे। उस वक्त चीन में गृहयुद्ध चल रहा था और बाद में माओत्से तुंग ने चीनी लोकतांत्रिक नेताओं को हरा दिया और 1950 में माओ ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया। जिसके खिलाफ तिब्बत के लोकतांत्रिक नेताओं ने विद्रोह कर दिया, लेकिन चीन कामयाबी के साथ उस विद्रोह को कुचलने में कामयाब हो गया और तिब्बती नेता भागकर ल्हासा आ गये और फिर धर्मशाला से वो एक निर्वासित सरकार चलाते हैं, जिसे चीन मान्यता नहीं देता है।












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