Mayon Volcano: किसानों के लिए आफत बनकर आता है ये ज्वालामुखी, 187 साल पहले पूरा गांव कर चुका दफन
मेयॉन ज्वालामुखी गरीब किसानों के लिए लंबे समय से खतरा है। 187 साल पहले ये ज्वालामुखी पूरे गांव का निगल चुकी है। 1000 से अधिक आबादी की बस्ती का सफाया कर दिया था।
Mayon Volcano: फिलीपींस का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी इस हफ्ते जब पूरी तरह से एक्टिव हुआ तो पुराना यादें एक बार फिर से ताजा हो गईं। 12600 से अधिक की बस्ती वाले गांव पर खतरा बढ़ गया। लिहाजा 6 किलोमीटर के दायरे में बसे अधिकतर किसानों ने अपना आशियाना छोड़ दिया। इसका कारण यहां पिछले हफ्ते भड़का ज्वालामुखी है।
मेयॉन में पिछले हफ्ते रविवार से ही स्थानीय लोगों को पलायन शुरू हो चुका है। डर है कि ये ज्वालामुखी कहीं फिर किसानों की जान ना ले ले। फिलीपीन इंस्टीट्यूट ऑफ वोलकेनोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी के निदेशक टेरेसिटो बाकोलकोल ने आगाह किया कि मेयॉन के आसपास खतरा बढ़ गया है। ऐसे में अगर ज्वालामुखी तेज होता है तो इमर्जेंसी शेल्टर हाउस में लोगों को जाने के लिए रेडी रहना होगा। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक बैकोलकोल ने कहा कि फिहालन मेयॉन ज्वालामुखी की वॉच किया जा रहा है।

किसानों पर बड़ी आपदा
मेयॉन के किसान एक बार फिर से डरे हुए हैं। यहां 12,600 से अधिक लोगों की बस्ती पर खतरा है। हालांकि अब वे सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने जा रहे हैं, लेकिन डर तबाही का अधिक है। मेयॉन ज्वालामुखी के क्रेटर के 6 किलोमीटर के दायरे में फैले हैं। किसानों की पीढ़ियां लंबे समय से ज्वालामुखी के दर्द को झेल रही हैं। यहां लेगास्पि और अल्बे से तबाही लाने वाले ज्वालामुखी की तस्वीरें साफ देखी जा सकती हैं। अब तो अल्बे के कई लोगों ने ज्वालामुखी के छिटपुट प्रकोप को अपने जीवन का हिस्सा मान लिया है। फिलहाल यहां पहाड़ से नीचे गर्म लावा तेजी से बह रहा है।
पलायन कर रहे किसान
अपने मवेशियों के साथ किसान मेयॉन से पलायन कर रहे हैं। इस क्षेत्र में पिछले हफ्ते शुक्रवार को आपातकाल घोषित कर दिया गया। ज्वालामुखी को लेकर पांच-चरण की चेतावनी जारी की गई। जिसमें ज्वालामुखी खतरनाक विस्फोट से सावधान रहने की चेतावनी जारी की गई। लिहाजा अधिकारी और ग्रामीण रविवार को गायों और भैंसों को जोखिम वाले क्षेत्रों से सुरक्षित पर ले जा रहे हैं।
1814 में भीषण तबाही
मायॉन फिलीपींस के 24 सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। यह आखिरी बार 2018 में हिंसक रूप से भड़का था। जिससे हजारों ग्रामीणों को विस्थापित होना पड़ा था। 1814 में, मायॉन के विस्फोट ने पूरे गांवों को दफन कर दिया और कथित तौर पर 1,000 से ज्यादा लोग मारे गए।












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