नेपाल में राजशाही की वापसी पर बहस तेज! जानें Manisha Koirala के 'हिंदू राष्ट्र' बयान पर क्यों मचा बवाल?
Manisha Koirala News: नेपाल में राजशाही और हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। काठमांडू की सड़कों पर हजारों लोग इसके समर्थन में उतर चुके हैं। इस बीच, बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला का एक पुराना वीडियो फिर से वायरल हो रहा है, जिसमें वह नेपाल को "दुनिया का एकमात्र हिंदू राष्ट्र" बताते हुए इसकी पुरानी पहचान पर सवाल उठाती नजर आ रही हैं।
सोलह साल पहले नेपाल ने राजशाही को खत्म कर धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बनने की घोषणा की थी। लेकिन हाल ही में, कई लोग मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से असंतुष्ट हैं और मानते हैं कि देश की हालत पहले से खराब हो गई है।

नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के समर्थकों का कहना है कि देश में भ्रष्टाचार और असफल शासन के चलते लोगों का विश्वास वर्तमान राजनीतिक दलों से उठ रहा है। यही कारण है कि राजशाही और हिंदू राष्ट्र की वापसी की मांग तेजी से बढ़ रही है।
मनीषा कोइराला के बयान पर क्यों मचा बवाल?
मशहूर अभिनेत्री मनीषा कोइराला का नेपाल के शाही परिवार से गहरा नाता रहा है। उनके परिवार के कई सदस्य नेपाल सरकार में प्रधानमंत्री और मंत्री रह चुके हैं। वायरल वीडियो में मनीषा कहती हैं - "हम दुनिया के एकमात्र हिंदू राष्ट्र थे। हमारी सबसे बड़ी पहचान यही थी। नेपाल में धर्म को लेकर कभी कोई लड़ाई नहीं हुई, कोई युद्ध, कोई संघर्ष नहीं था। इसे क्यों हटाया गया? मुझे ऐसा लगता है कि यह एक साजिश थी।" उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस को और गर्म कर दिया है।
काठमांडू में भड़की हिंसा, दो की मौत, सरकार ने लगाया कर्फ्यू
राजशाही की मांग को लेकर काठमांडू में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। यह प्रदर्शन पहले शांतिपूर्ण था, लेकिन जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, तब हालात बिगड़ गए।
पुलिस ने जवाब में आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। झड़प में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कर्फ्यू लगा दिया।
नेपाल के लोग क्या चाहते हैं?
नेपाल में इस समय दो विचारधाराएं आमने-सामने हैं।
- राजशाही समर्थक - वे मानते हैं कि देश की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। उनका दावा है कि राजा के शासन में नेपाल ज्यादा स्थिर और सुरक्षित था।
- गणराज्य समर्थक - ये लोग मानते हैं कि राजशाही एक बीती हुई व्यवस्था है और नेपाल को आगे बढ़ते रहना चाहिए। उनके अनुसार, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता नेपाल के भविष्य के लिए जरूरी है।
नेपाल में राजशाही कैसे खत्म हुई थी?
नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह 2001 के राजमहल नरसंहार के बाद सिंहासन पर बैठे थे, जिसमें उनके बड़े भाई राजा बीरेंद्र और उनका पूरा परिवार मारा गया था।
2005 में, ज्ञानेंद्र ने सत्ता अपने हाथ में ले ली, सरकार और संसद भंग कर दी, पत्रकारों को कैद कर लिया और आपातकाल लगा दिया। इसके खिलाफ देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन हुए, जिससे उन्हें मजबूर होकर सत्ता छोड़नी पड़ी। 2008 में नेपाल की संसद ने राजशाही को समाप्त कर दिया और देश को धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित किया।
क्या नेपाल में राजशाही की वापसी संभव है?
राजशाही समर्थकों का कहना है कि नेपाल में राजनेताओं की नाकामी और भ्रष्टाचार ने जनता को फिर से राजशाही की ओर देखने पर मजबूर कर दिया है। वहीं, लोकतंत्र समर्थकों का कहना है कि राजशाही अब इतिहास का हिस्सा बन चुकी है और इसे दोबारा स्थापित करना संभव नहीं है।
फिलहाल, नेपाल में यह बहस जोरों पर है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विरोध प्रदर्शन को कैसे संभालती है और क्या नेपाल में राजशाही और हिंदू राष्ट्र की मांग कोई बड़ा राजनीतिक मोड़ लाती है या नहीं।












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