क्यों हार के बाद भी मालदीव की सत्ता नहीं छोड़ना चाह रहे यमीन?
माले। मालदीव राष्ट्रपति चुनाव में हार का सदमा लगने के बाद अब्दुल्ला यमीन सत्ता छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं, जिससे एक नया राजनीतिक बवाल खड़ा हो सकता है। मालदीव के विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रपति चुनाव में मिली हार के बाद यमीन सत्ता को अपने हाथ में बरकरार रखना चाहते हैं। मालदीव के विपक्ष ने गुरुवार को इंटरनेशनल कम्युनिटी से शांति से दखल देने की मांग की है, जिससे कि यमीन को राष्ट्रपति पद से बर्खास्त किया जा सके। विपक्ष का दावा है कि रविवार (23 सितंबर) को आए चुनावी नतीजों को मानने से इनकार करते हुए यमीन सुप्रीम कोर्ट जाकर चुनावी परिणाम को रद्द कराने की मांग करने की तैयारी में लगे हुए हैं।

यमीन को चुनाव परिणाम पर विश्वास नहीं
विपक्ष का कहना है कि यमीन ने चुनाव में कथित रूप से भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की है। विपक्ष का कहना है कि इंटरनेशनल कम्युनिटी चुनाव में हार चुकी यमीन सरकार को जल्द से जल्द सत्ता छोड़ने के लिए दबाव डाले। विपक्ष का यह बयान उस वक्त आया है, जब सैन्य प्रमुख और पुलिस चीफ ने टीवी चैनल पर यमीन के सत्ता में बने रहने की खबरों को लेकर चेतावनी जारी की है। मालदीव मीडिया और सोशल मीडिया पर पिछले 48 घंटों से इसी बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि यमीन चुनाव आयोग से फाइनल रिजल्ट टालने के लिए दबाव डाल सकते हैं।

सेना जनता के साथ
हालांकि, मालदीव की जनता के लिए अच्छी खबर यह है कि मिलिट्री उनके साथ खड़ी है। सेना प्रमुख मेजर जनरल अहमद शियाम ने एक निजी टीवी चैनल पर बात करते हुए कहा कि चुनाव परिणाम का सम्मान किया जाएगा। शियाम ने कहा, 'मैं मालदीव के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि सेना लोगों के अधिकारों की रक्षा करेगी।' चुनाव आयोग के प्रमुख अहमद शरीफ ने पुष्टि की कि यमीन की पार्टी ने संदिग्ध मतदान अनियमितताओं की कई शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिसके बार में हम जांच कर रहे हैं।

हार से सदमे में यमीन
पनी जीत को सुनिश्चित मानकर चल रहे जनता ने पिछले सप्ताह यमीन को तगड़ा झटका देते हुए बुरी तरह से हराया था। हालांकि, यमीन ने हार को तो स्वीकार ली, लेकिन उन्हें अभी भी चुनावी परिणाम पर विश्वास नहीं हो रहा है। अपने सभी विरोधियों को जेल में डालने के बाद भी यमीन को हार का सामना करना पड़ा है, जिसके बाद यमीन अभी भी सदमे में है। इस बार चुनाव में अटकले लगायी जा रही थी कि यमीन धांधली कर चुनाव में जीत हासिल कर सत्ता पर फिर से कब्जा कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इस बार चुनाव में यमीन ने किसी भी इंटरनेशनल मीडिया को चुनावी कवरेज के लिए अनुमति नहीं दी थी।
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