मालदीव के राष्ट्रपति सोलिह के शपथ ग्रहण के लिए जाएंगे पीएम मोदी, होगी माले की पहली यात्रा
माले। मालदीव में अब सत्ता नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के हाथ में होगी। हाल ही में आए चुनावी नतीजों में सोलिह विजेता बनकर उभरे हैं। नवंबर में वह देश के राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगे। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हो सकते हैं। सोलिह ने वर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को हराया है। यामीन को चीन का समर्थक माना जाता है और उनकी हार से भारत ने राहत की सांस ली है। विशेषज्ञों की मानें तो यामीन के जाने के बाद मालदीव और दिल्ली के बीच जो दूरी पिछले कुछ समय से आई थी, वह अब कम हो सकती है।

गुरुवार को होगा ऐलान
इंडिया टुडे की ओर से दी गई जानकारी में सोलिह से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भारत को उस लिस्ट में रखा गया है जिन्हें शपथ ग्रहण के लिए बुलाया जाएगा। माना जा रहा है कि पीएम मोदी को शपथ ग्रहण के लिए खास तौर पर इनवाइट किया जा सकता है। गुरुवार को इस बात का ऐलान किया जाएगा कि मालदीव किसे शपथ ग्रहण समारोह के लिए बुलाया जाएगा। पीएम मोदी अभी तक मालदीव के दौरे पर नहीं गए हैं। अगर वह शपथ ग्रहण के लिए जाते हैं तो यह उनका पहला दौरा होगा।

फोन पर दी जीत की बधाई
सोलिह के जीतने के बाद पीएम मोदी ने फोन कर उन्हें जीत की बधाई दी थी। मालदीव के एक टीवी चैनल राजे टीवी को दिए इंटरव्यू में सोलिह ने यह माना है कि पीएम मोदी की तरफ से उन्हें बधाई कॉल आई थी। फोन पर पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही। इतना ही नहीं उन्होंने सोलिह को भारत आने का आमंत्रण भी दिया। नए राष्ट्रपति सोलिह ने पीएम मोदी का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है। हालांकि अभी उनके भारत दौरे की तारीखों पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।

विरोध प्रदशर्न की वजह से टली यात्रा
साल 2015 में पीएम मोदी मालदीव की यात्रा पर जाने वाले थे, लेकिन वहां पर चल रहे राजनीतिक संकट और विरोध प्रदर्शन के कारण उन्हें अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी थी। उस समय मोहम्मद नशीद की गिरफ्तारी के कारण देश में तनाव की स्थिति थी। पीएम मोदी, सोलिह को जीत की बधाई देने वाले दुनिया के पहले नेता थे। पीएम मोदी के ऑफिस की तरफ इस बाबत एक बयान भी जारी किया गया था। पीएमओ की ओर से जारी इस बयान में कहा गया था, 'दोनों नेताओं ने भारत और मालदीव के बीच रिश्तों को मजबूत करने के और दोस्तान संबंधों की दिशा में साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया।' भारत की तरफ से मालदीव के चुनावों पर आधिकारिक बयान जारी कर इसे लोकतांत्रित शक्तियों की विजय करार दिया था।












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