भारत बनेगा ग्लोबल पावर: गौतम अदाणी ने बताया भविष्य का वो 'सीक्रेट फॉर्मूला' जो बदल देगा देश की तस्वीर
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान जब भू-राजनीतिक बदलावों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की सूरत बदल दी है, ऐसे में मंगलवार को अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने एक बड़ा विजन पेश किया। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार बढ़ाना और इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना अब अलग-अलग लक्ष्य नहीं रह गए हैं, बल्कि ये वो दो मजबूत स्तंभ हैं जिन पर एक वैश्विक शक्ति के रूप में भारत का भविष्य टिका है। मुंबई में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की वार्षिक आम बैठक (AGM) को संबोधित करते हुए अदाणी ने कहा, "ये अब दो अलग प्राथमिकताएं नहीं हैं। ये वो दो ग्लोबल इंजन हैं जो भारत की ताकत को आकार देंगे, देश की संप्रभुता को सुरक्षित करेंगे और इस सदी की निर्णायक महाशक्ति बनने की भारत की यात्रा को रफ्तार देंगे।"

अदाणी ने ग्रुप की मजबूती का श्रेय वैश्विक रुझानों को समय रहते और सटीक तरीके से समझने को दिया। उन्होंने कहा, "हमने बहुत पहले ही भांप लिया था कि दुनिया एक नए युग में प्रवेश कर रही है। एक ऐसा दौर जहां भू-राजनीतिक दूरियां बढ़ेंगी, सप्लाई चेन बिखर जाएगी और ऊर्जा सुरक्षा एक रणनीतिक प्राथमिकता बनकर उभरेगी।" उन्होंने आगे कहा कि तकनीकी नेतृत्व की रेस में जीत केवल बड़े इरादों से नहीं, बल्कि एक मजबूत और आपस में जुड़े हुए इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता से तय होगी।
खदानों से डेटा सेंटर तक: इंफ्रास्ट्रक्चर का बेजोड़ नेटवर्क
चेयरमैन के मुताबिक, अदाणी ग्रुप को जो बात दूसरों से अलग बनाती है, वह किसी एक बिजनेस का पैमाना नहीं, बल्कि उनके बीच का तालमेल है। ग्रुप का पोर्टफोलियो माइनिंग, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन से लेकर पोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स, डेटा सेंटर, फुलफिलमेंट सेंटर, सड़क और जल इंफ्रास्ट्रक्चर तक फैला हुआ है। अदाणी ने ग्रुप को 'इंटेलिजेंस युग' की जरूरतों के लिए पूरी तरह तैयार बताते हुए कहा, "हमारे पास इंफ्रास्ट्रक्चर की हर उस महत्वपूर्ण कड़ी को जोड़ने की क्षमता है, जो आज के दौर के लिए जरूरी है।" उन्होंने जोर दिया कि ग्रुप फिजिकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, दोनों में महारत रखता है, जो AI के दौर की सबसे बड़ी मांग है।
बड़े पैमाने पर आत्मनिर्भरता और संप्रभुता
अदाणी के संबोधन का एक मुख्य केंद्र यह था कि इंफ्रास्ट्रक्चर अब केवल आर्थिक संपत्ति नहीं, बल्कि एक रणनीतिक ताकत है। एक ऐसी दुनिया में जहां सप्लाई चेन टूट रही है और ऊर्जा का इस्तेमाल कूटनीतिक हथियार के रूप में हो रहा है, वहां कच्चे माल से लेकर डिलीवरी तक ग्रुप का 'एंड-टू-एंड' इंटीग्रेशन भारत की आत्मनिर्भरता में सीधा योगदान दे रहा है। वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में अदाणी ग्रुप का प्रदर्शन इसी सोच को दर्शाता है। जहां दुनिया भर की दिग्गज कंपनियां पीछे हट रही थीं या पुनर्गठन कर रही थीं, वहीं अदाणी ग्रुप ने हर सेक्टर में अपना विस्तार जारी रखा।












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