Madman Theory: क्या है Trump की मैडमेन थ्योरी? जिससे दुनिया को डराने की कर रहे कोशिश, किस-किस नेता ने अपनाई?
Madman Theory: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के खिलाफ अपने रुख में बड़ा यू-टर्न लिया। पहले जहां वे पूरी सभ्यता को खत्म कर देने जैसी भारी-भरकम धमकी दे रहे थे, वहीं बाद में उन्होंने अचानक युद्धविराम (ceasefire) की बात कर दी। अब सवाल ये उठता है कि क्या ये सिर्फ पॉलिटिकल ड्रामा है या इसके पीछे कोई स्ट्रैटेजी (strategy) है?
वेस्ट एशिया में अभी भी टेंशन?
हालात वैसे भी शांत नहीं हैं। एक तरफ इजरायल दक्षिणी लेबनान में एक्टिव है तो वहीं दूसरी तरफ, ईरान ने खाड़ी के तेल ठिकानों पर हमले किए हैं। ऐसे में ट्रंप का ceasefire कितना असरदार है, ये खुद एक बड़ा सवाल बन गया है। ये परिस्थिति ईरान या फिर मिडिल ईस्ट को दोबारा जंग की ओर धकेल सकती है।

Madman Theory क्या बला है?
अब यहां एंट्री होती है "Madman Theory" की। ये कोई नया कॉन्सेप्ट नहीं है, इसकी शुरुआत Cold War के समय हुई थी। इस थ्योरी का सिंपल मतलब है कि 'नेता खुद को थोड़ा unpredictable और कट्टर दिखाते हैं'। ताकि सामने वाला डर जाए और जल्दी समझौता कर ले। यानी थोड़ा वो वाला एटीट्यूड रखना जिसमें सामने वाले को ये मैसेज जाए कि "मैं कुछ भी कर सकता हूं"। ताकि दुश्मन या सामने कोई भी पार्टी है उस पर साइकोलॉजिकल दबाव बने और वह शर्तें जल्दी मानने पर राजी हो जाए, जहां बातचीत का ग्राउंड न के बराबर हो।
पहले समझाने के लिए, अब डराने के लिए
शुरुआत में इस थ्योरी का इस्तेमाल सिर्फ नेताओं के अजीब व्यवहार को समझाने के लिए किया जाता था। लेकिन बाद में ये एक पूरी strategy बन गई, जानबूझकर डर पैदा करो और जब डील या फिर समझौता करने की बारी आए, तो फायदा उठाओ।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
साइकोलॉजिस्ट के मुताबिक पागलपन (madness) के दो टाइप होते हैं:
1. Unpredictability (अप्रत्याशितता), जिसमें नेता कुछ भी कर सकता है। उसके अगले कदम का कोई अंदाज़ा नहीं होता।
2. Extremity (अतिवाद), जिसमें उसे नुकसान या युद्ध के नतीजों की परवाह नहीं होती, चाहे कितना भी नुकसान हो जाए।

ट्रंप का स्टाइल: दोनों का कॉम्बो
वहीं ट्रंप का व्यवहार इन दोनों चीजों को दिखाता है। वे कभी धमकी देते हैं, कभी शांति की बात करने लगते हैं तो कभी अचानक बयान बदलना। आम भाषा में कहें तो पूरा mood swing diplomacy चला रहे हैं और जब वो "पूरी सभ्यता खत्म करने जैसी बातें करते हैं तो ये उनकी पर्सनेलिटी के एक्स्ट्रीम वर्जन को दिखाता है।
नियम तोड़ना ही ब्रांड?
ट्रंप का एक पैटर्न ये भी है कि वे पहले से चले आ रहे उन नियमों को तोड़ते रहते हैं जो स्थिरता ला रहे हों। फिर चाहे उनकी वैश्विक मंच पर लानत-मलानत हो रही हो या फिर वे अमेरिका में ही घेरे जा रहे हों, उन्हें दोनों ही बातों से फर्क नहीं पड़ता। ये बताता है कि वे एंड रिजल्ट को लेकर कूल और चिल हैं। Gen-Z की भाषा में कहें तो "Bro literally doesn't care" vibe.
दुनिया के दूसरे नेता भी ऐसे रहे?
रिचर्ड निक्सन
उन्होंने भी मैडमेन इमेज गढ़ने की कोशिश की थी, लेकिन वे इसे लगातार करने में बुरी तरह असफल रहे क्योंकि उस वक्त सोवियत यूनियन ने उन्हें सीरियसली नहीं लिया था।
जॉर्ज डब्ल्यू बुश
उन्हें हार्डलाइन पॉलिटिक्स का नेता कहा जाता था। लेकिन वे Unpredictable या Extreme कैटेगरी में नहीं रहे। उन्होंने कठोर फैसले लिए लेकिन समझ के साथ। उनके बयान भी काफी संतुलित होते थे।
व्लादिमीर पुतिन
पुतिन की हार्डलाइनर की छवि कभी नहीं रही। हां, लेकिन यूक्रेन युद्ध के बाद उन्होंने मैडमेन की झलक दिखाने की कोशिश तब की थी, जब उन्होंने युक्रेन के खिलाफ युद्ध शुरू करने के दौरान कहा था कि अगर कोई दूसरा देश बीच में आया तो उसका भी अंजाम यही होगा। बीच-बीच में उन्होंने न्यूक्लियर बम दागने की धमकी भी दी लेकिन कभी उसे इस्तेमाल नहीं किया। वहीं चार साल से चल रहे युद्ध ने उनके भरोसे और ताकत दोनोें को काफी हद तक डैमेज किया है।
किम जोंग उन- सुपर मैडमेन
किम जोंग उन को मौजूदा वक्त का सबसे बड़ा मैडमेन नेता कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा। उन्होंने अपने चाचा और भाई को दर्दनाक मौत की सजा देने में भी कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई थी। पूरी दुनिया उन्हें unpredictable + extreme दोनों मानती है। उनकी पर्सनेलिटी को समझें तो उनके फैसले बताते हैं कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि दुनिया उनके बारे में क्या सोचेगी और क्या करेगी। वे पूर्णत: अपनी मर्जी के मालिक हैं भी और दिखाते भी यही हैं।
डिजिटल दौर में अब ये गेम मुश्किल
पहले किसी के बारे में इन्फोर्मेशन लिमिटिडेड होती थी, इसलिए मैडमेन थ्योरी काम कर जाती थी। लेकिन अब हर बयान रिकॉर्ड होता है या फिर सोशल मीडिया पर चला जाता है जहां से लोग उसे एक्सपोज कर देते हैं। साथ ही आपका हर एक्शन जांचा-परखा जाता है। इसलिए इसे बार-बार दोहराना मुश्किल हो गया है।
फायदा vs नुकसान
फायदे:
• संकट में दुश्मन पर प्रेशर बनता है।
• नेगोशिएट करने में फायदा मिल सकता है।
नुकसान:
• भरोसा बिल्कुल खत्म हो जाता है।
• शांति के लिए किया समझौता पूरा नहीं हो पाता।
• अगर कोई लीडर मैडमेन लगा तो दुश्मन खुद समझौते पर नहीं टिकता
• दूसरे देश उसे गैर-भरोसेमंद मान सकते हैं।
ट्रंप की मैडमेन इमेज ही ईरान के फैसलों में देरी की वजह हो सकती है। उन्हें भरोसा नहीं था कि अमेरिका सीजफायर का अपना वादा निभाएगा।
Smart Strategy या Risky Game?
तो क्या ट्रंप की ये स्ट्रेटजी एक जीनियस आईडिया है या एक खतरनाक जुआ? दरअसल संकट में ये थ्योरी काम कर सकती है। लेकिन बार-बार इसी आगे रखकर काम निकलवाने की कोशिश की तो फिर इसका इम्पैक्ट कम हो जाता है। भविष्य में जब ट्रंप नहीं होंगे तब भी उनकी ये हरकते अमेरिका को नुकसान पहुंचा सकती हैं। क्योंकि इससे तत्काल फायदा तो मिलता है लेकिन भविष्य नुकसान इसके साथ आते ही आते हैं।
"ये strategy short-term gains दे सकती है, लेकिन long-term में अमेरिका की position कमजोर कर सकती है।" जबकि इंटरनेशनल संबंधों में भरोसा ही एक मात्र अच्छी और सालों-साल चलने वाली नीति मानी जाती है।
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