ड्रैगन के जाल में फंसकर बिकने के कगार पर पहुंचा ये देश, चीन कर सकता है कब्जा, बचा पाएंगे राष्ट्रपति?

अफ्रीकी महाद्वीप में स्थिति एक देश मेडागास्कर ने चीनी कर्ज जाल के खिलाफ संप्रभुता की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है।

एंटानानैरिवो, अक्टूबर 15: चीन अपनी 'ऋण नीति' के जाल में कई देशों को फंसा रहा है, खासकर गरीब अफ्रीकी देश काफी आसानी से चीन के कर्ज के जाल में बुरी तरह से फंस जाते हैं। लेकिन, पूर्वी अफ्राका के एक देश मेडागास्कर ने पहली बार चीन के खिलाफ आवाज उठा दी है और चीन के हाथों बिकने से इनकार कर दिया है। मेडागास्कर ने ऐलान किया है कि, वो चीन का गुलाम नहीं बनेगा और वो अपनी संप्रभुता की लड़ाई लड़ेगा। लेकिन, सवाल ये है कि, क्या मेडागास्कर के लिए अब चीन के चंगुल से बचना संभव होगा?

कर्ज के दलदल में धंसा मेडागास्कर

कर्ज के दलदल में धंसा मेडागास्कर

मेडागास्कर भी चीन के साथ बेल्ड एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) पर समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर फंस गया है। सबसे खास बात ये है कि, जब मेडागास्कर चीन के साथ करार कर रहा था, उस वक्त उसे कई देशों ने आगाह किया था, मगर मेडागास्कर के नेताओं ने सभी चेतावनियों को अनसुना कर दिया था और उन अफ्रीकी देशों में शामिल हो गया था, जो लगातार बीआरआई प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा बनते जा रहे थे। इंटरनेशनल फोरम फॉर राइट एंड सिक्योरिटी (IFFRAS) ने रिपोर्ट दिया है कि, अब मेडागास्कर को पता चल रहा है, कि उससे कितनी बड़ी गलती हो गई है और वो किस तरह से चीन के कर्ज के जाल में फंस चुका है।

मेडागास्कर में चीन का निवेश

मेडागास्कर में चीन का निवेश

मेडागास्कर में चीन ने बुनियादी ढांचे के निर्माण में सहायता के नाम पर उसे विशालकाय कर्ज दिया जिसके परिणामस्वरूप चीनी-वित्त पोषित उद्यमों की संख्या में वृद्धि होती चली गई और अब स्थिति ये हो गई है, कि मेडागास्कर के बाजार में चीन का हिस्सा बढ़कर 90 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो सीधे सीधे इस देश की संप्रभुता और आजादी के लिए ही खतरा है। IFFRAS ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, मेडागास्कर जैसे छोटे राष्ट्र के लिए चीनी शिकारी का शिकार होना काफी खतरनार है। पिछले कुछ सालों से चीनियों ने ना केवल मेडागास्कर की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण हासिल कर लिया है, बल्कि मेडागास्कर के प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों का व्यवस्थित रूप से दोहन किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन से भारी संख्या में लोग मेडागास्कर पहुंचकर समुद्री इलाको में अपना नियंत्रण जमाने लगे हैं.

मेडागास्कर को बर्बाद करता चीन

मेडागास्कर को बर्बाद करता चीन

चीनी प्रवासियों ने मेडागास्कर के स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसरों को छीन लिया है, उनके व्यापार और वाणिज्य को बाधित कर दिया है, और हर नुक्कड़ पर चीनी उपभोक्ता सामान बेचने वाली दुकानें खोल दी हैं, और चीनी उत्पाद इतने सस्ते हैं, कि स्थानीय लोग मजबूरी में चीनी उत्पाद पर भी निर्भर रहते हैं, लिहाजा मेडागास्कर के मूल लोगों के पास रोजगार के साधन बचे ही नहीं हैं। IFFRAS की रिपोर्ट के अनुसार, मेडागास्कर विश्व का तीसरा ऐसा देश बन गया है, जहां सबसे ज्यादा चीनी लोगों की आबादी है।

शीशम के पेड़ों का दोहन

शीशम के पेड़ों का दोहन

मेडागास्कर अपने शीशम के पेड़ों के लिए भी प्रसिद्ध है। चीनी ने स्थानीय लकड़ी के व्यापारियों के साथ मरोजेजी नेशनल पार्क के भीतर संरक्षित वर्षावनों से शीशम के पेड़ों की दुर्लभ प्रजातियों की कटाई करने का भी करार कर लिया है। और शीशम की इन दुर्लभ लकड़ियों से कीमती फर्नीचरों, वाद्ययंत्रों का निर्माण किया जाएगा। ऐसी आशंका है कि, अगले कुछ सालों में मेडागास्कर के वनों में शीशम के पेड़ नहीं बचेंगे। IFFRAS ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, मेडागास्कर के स्थानीय लोगों की वनो से कमाई ना के बराबर होती है, जबकि, चीन की कंपनियों ने करोड़ों कमाना शुरू कर दिया है।

बंदरगाह से देश की जासूसी

बंदरगाह से देश की जासूसी

इतना ही नहीं, मेडागास्कर को आर्थिक तौर पर विकलांग बनाने के बाद चीन ने इस देश के बंदरगाहों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के नाम पर खुफिया जासूसी करनी शुरू कर दी है। मेडागास्कर को चीन टेक्नोलजी क्षेत्र में भी विकलांग कर देना चाहता है। मेडागास्कर के बंदरगाह के विकास के लिए चीन की हार्बर इंजीनियरिंग कंपनी (सीएचईसी) मे 2015 में मेडागास्कर की सरकारी कंपनी तामातावे डीपवाटर पोर्ट के साथ करार किया था और ये करार 1.017 अरब अमेरिकी डॉलर का था। ऐसे में आप समझ सकते हैं, कि मेडागास्कर के लिए ये रकम वापस करना नामुमिकन है, लिहाजा इस बंदरगाह से चीन ने पूरे देश की जासूसी शुरू कर दी है। IFFRAS ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, चीन की कंपनियों ने इस बंदरगाह के जरिए मेडागास्कर के समुद्री क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से मछलियों को पकड़ना शुरू कर दिया है।

मेडागास्कर के समुद्र पर कब्जा

मेडागास्कर के समुद्र पर कब्जा

2018 में चीन की एक कंपनी फर्म ताइहे सेंचुरी इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट्स ने 99 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ मेडागास्कन एजेंसी फॉर इकोनॉमिक डेवलपमेंट एंड बिजनेस प्रमोशन (एएमडीपी) के साथ 10 सालों तक चलने वाले 2.7 बिलियन अमरीकी डालर के सौदे पर हस्ताक्षर किया था। ये करार 2018 में किया गया था। ये करार दो देशों के बीच निवेश को लेकर करार था। लेकिन, इस सौदे के माध्यम से, इस चीनी मछली पकड़ने वाली फर्म, जिसके पास 330 से अधिक नावों का एक बेड़ा है, उसने पूरे मेडागास्कर समुद्र तट पर कब्जा कर लिया है। जिससे हजारों तटीय समुदाय प्रभावित हुए हैं, जो पूरी तरह से मछली पकड़ने के पारंपरिक साधनों पर निर्भर हैं।

मेडागास्कर ने खोला मोर्चा

मेडागास्कर ने खोला मोर्चा

चीन के कर्ज में बुरी तरह से फंस चुके मेडागास्कर में पहली बार चीन के खिलाफ आवाज उठाई गई है। मेडागास्कर के नए राष्ट्रपति ने मेडागास्कर और चीन के बीच अनुचित शर्तों के साथ हुए अनुबंधों पर ध्यान दिया है और रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के द्वारा समुद्री मछलियों के पकड़ने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही रिपोर्ट है कि, चीन के साथ जो भी करार किए गये हैं, अब उनकी समीक्षा की जाएगी। लेकिन, सवाल ये हैं कि, जिस देश के बाजार पर 90 फीसदी चीन का कब्जा हो, जिस देश की अर्थव्यवस्था पर चीन का 'कब्जा' हो चुका हो, क्या वो देश चीन का मुकाबला कर पाने में सक्षम होगा?

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