Lufthansa: तुर्की में 40 घंटे से फंसा है जर्मनी से भारत आ रहा विमान, ग्रैमी विजेता रिकी केज ने लगाया बड़ा आरोप

जर्मनी से भारत आ रही एक विमान इस्तांबुल में फंस गई है। लुफ्थांसा एयरलाइंस की यह फ्लाइट 18 अक्टूबर को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से बेंगलुरू जा रही थी। लेकिन एक मेडिकल इमरजेंसी के कारण विमान को डायवर्ट कर तुर्की ले जाया गया था।

जर्मनी से भारत आ रही एक फ्लाइट तुर्की के इस्तांबुल में फंस गई है। लुफ्थांसा एयरलाइंस की यह फ्लाइट 18 अक्टूबर को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से बेंगलुरू जा रही थी। लेकिन एक मेडिकल इमरजेंसी के कारण विमान को डायवर्ट कर तुर्की ले जाया गया था। विमान के यात्री 40 घंटे से भी अधिक समय से इस्तांबुल हवाई अड्डे पर फंसे हुए हैं। यात्री और उनके परिजन सोशल मीडिया पर एयलाइंस कंपनी पर हालात से निपटने में विफल रहने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं कंपनी का कहना है वह अपने यात्रियों की असुविधाओं को कम करने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रही है।

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Photo source: Twitter/ Chinnamalairaja

ग्रैमी अवार्ड विजेता रिकी केज भी हैं यात्री

लुफ्थांसा की LH754 फ्लाइट में ग्रैमी विजेता रिकी केज भी सवार हैं। उन्होंने ट्विटर पर एयरलाइंस से जुड़ी असुविधाओं के बारे में ट्विटर पर लिखा है। रिकी केज ने लिखा, "विश्वास नहीं हो रहा कि कैसे लुफ्थांसा भारतीय यात्रियों को हल्के में लेता है।" बुधवार को ट्विटर पर उन्होंने कहा, "मेरी फ्रेंकफर्ट-बेंगलुरु फ्लाइट कल शाम 7 बजे इस्तांबुल में मेडिकल इमरजेंसी के लिए उतरी। 17 घंटे बाद - कोई होटल नहीं, कोई कर्मचारी नहीं, कोई स्पष्टीकरण नहीं, 300 यात्री फंसे हैं और कोई जानकारी नहीं है।"

फ्लाइट में सवार थे 380 यात्री

रिकी केज ने गुरुवार को किए गए एक अन्य ट्वीट में लिखा, "27 घंटे - अभी भी इस्तांबुल हवाई अड्डे पर फंसा हुआ हूं।" इसके आगे लुफ्थांसा को टैग करते हुए रिकी ने लिखा, "लुफ्थांसा एयरलाइन स्पष्ट रूप से अस्तित्व के संकट से पीड़ित है। इसे नस्लवादी, आत्मसंतुष्ट, असमर्थ, उदासीन, दुष्ट बुलाया जाना चाहिए। इस विमान के 380 यात्री हैं जो कि अधिकांश भारतीय हैं। ये एक तरह से बेघर हो चुके हैं। इनके लिए कोई होटल नहीं, कोई लाउंज नहीं, सामान की कोई सुविधा नहीं है। उन्होंने लुफ्थांसा पर आरोप लगाया कि उनके साथ ऐसा व्यवहार इसलिए किया जा रहा है कि वे सभी भारतीय हैं।

अन्य यात्रियों ने भी शिकायत

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अन्य यात्रियों ने भी ट्विटर पर लुफ्थांसा एयरलाइंस पर अपना गुस्सा निकाला है और इसे विफलताओं का स्मारक बताया है। यात्रियों ने 19 और 20 अक्टूबर की रात सोशल मीडिया पर कई पोस्ट किए। एक यात्री ने लिखा, "32 घंटे से अधिक, अभी भी इस्तांबुल में फंसा हुआ हूं। पहले से ही 4 बार ईएसटी बदल चुका है, अब कोई ऊर्जा नहीं बची है, परिवार यहां हैं और घर पर सब चिंतित हैं, निराश हैं।" ट्वीट्स के जवाब में, लुफ्थांसा एयरलाइंस ने कहा, "फ्रैंकफर्ट से बैंगलोर के लिए लुफ्थांसा की उड़ान LH754 को 18 अक्टूबर को एक मेडिकल इमरजेंसी के लिए इस्तांबुल के लिए डायवर्ट करना पड़ा। सुरक्षा कारणों से उड़ान से पहले मेडिकल इमरजेंसी के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर को रिप्लेस किया जाना है।"

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