समुद्र में बदल गया रेगिस्तान: पहले आया तूफान, लोग शांत होकर सो गये... और फिर आया सैलाब, दहशत वाली रात की कहानी
Libya Flood: क्या आपने कभी किसी रेगिस्तान को पलक झपकते ही समुद्र बनते देखा है? लीबिया के लोगों ने देखा है।
22 साल के मुहम्मद अल-अवकाली के दिमाग में उस रात का खौफनाक मंजर घर कर गया है, जब तूफान डैनियल ने लीबिया के तटीय शहर डर्ना के पास अल-मुखैली गांव पर खतरनाक धावा बोला था।
उन्होंने उन लम्हों को फिर याद किया, जब उनके गांव को पिछले हफ्ते पूर्वी लीबिया के कुछ हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ का सामना करना पड़ा था, जिसमें 11,000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है सरकार का कहना है, ये आंकड़ा 20 हजार से काफी ज्यादा है। हजारों-हजार शव अभी रास्तों पर फैले हुए हैं, जिन्हें बटोरा जा रहा है।

अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुहम्मद अल-अवकाली ने कहा, कि "काफी तेज रफ्तार से भीषण तूफान गुजर रहा था, जिनमें खौफनाक आवाज समाया हुआ था। इस तूफान के गुजरने के बाद अचानक से एक सन्नाटा छा गया।"
उन्होंने कहा, कि "तूफान के गुजरने के बाद हम निश्चिंत होकर फिर सो गये, लेकिन रात साढ़े 12 बजे, बिना किसी चेतावनी के पानी हमारे घरों में घुसने लगा।" उन्होंने कहा, कि "फिर हम अपने परिवार के साथ घर के छत पर आ गये, और उस वक्त हमें अहसास हुआ, कि वो तूफान क्या था और ये बाढ़ कैसी है।"
अल-अवकाली ने कहा, कि "मैंने जो देखा, उसकी भयावहता खौफनाक था। चारों तरफ पानी ही पानी था और चारों तरफ का क्षेत्र पानी में डूब चुका था। बाढ़ का पानी दो अलग अलग दिशाओं, उत्तर और पश्चिम से आया हुआ था।"
चारों तरफ लाश ही लाश
डर्ना के बायदा से लगभग 20 किमी पश्चिम में अल-वरदिया गांव के रहने वाले फैसल अल-दारसी ने कहा, कि उनके गांव को ध्वस्त सड़कों और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के कारण अभी तक कोई मदद नहीं मिली है।
उन्होंने कहा, कि "हमारे पास मदद के लिए कोई नहीं आया है। ना सरकार और ना ही कोई संस्था।" उन्होंने कहा, कि "पड़ोसी गावों से हमारे पास मदद भेजी जा रही है।"
उन्होंने कहा, कि गांव तक मदद पहुंचना काफी कठिन हो गया है। यहां बिजली, ईंधन, पानी या भोजन, कुछ भी नहीं है।"
अल-दार्सी ने कहा, "बाढ़ ने यहां सब कुछ नष्ट कर दिया, जिसमें सुपरमार्केट, पूरे घर, बिजली और फोन टावर भी शामिल हैं।"
उन्होंने बताया कि बाढ़ ने गांव के 50 घरों में से कम से कम 20 घर छीन लिए हैं।
तूफान ने तेल-समृद्ध देश लीबिया में कमजोरियों को उजागर कर दिया है, जो 2011 के विद्रोह के बाद से संघर्ष में घिरा हुआ है, जिसने लंबे समय से शासन कर रहे तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को उखाड़ फेंका था।

भीषण बाढ़ से इस क्षेत्र में हजारों घर पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं और सड़कों पर मृत शरीरों का दिखना आम हो चुका है। रास्तों पर शव देखे जा रहे हैं। वहीं, अपनों को गंवा चुके बचे हुए लोग, उनके शवों को खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अल-दार्सी ने कहा, "हम नहीं जानते, कि अभी कौन मरा और कौन अभी भी जीवित है।"
उन्होंने कहा, "हमारे गांव में पूरे परिवार खो गए, उनमें से कुछ अभी भी मिट्टी के नीचे दबे हुए हैं, और दर्जनों लोग अब समुद्र में खो चुके हैं।"
उन्होंने कहा, अब तक लगभग 27 शव मिल चुके हैं, लेकिन "अभी भी कई लोग लापता हैं।"
उन्होंने कहा, कुछ शव "पहचानने योग्य" और "क्षत-विक्षत" थे। ये शव "बाढ़ की पानी के साथ दक्षिणी क्षेत्रों से हमारे गांव पहुंच गये थे।"

अस्पतालों का हाल विकराल
इस बीच, डर्ना से लगभग 50 किमी दूर सुसा में, एक आपातकालीन विभाग के प्रमुख सर्जन ताहानी अल-ज़ानी के अनुसार, अस्पतालों में स्थिति "विनाशकारी" बनी हुई है।
अल-ज़ानी ने कहा, कि "मुझे अपने कई करीबी दोस्तों के शव मिले हैं और मैं व्यक्तिगत रूप से उन्हें मुर्दाघर ले गया।" उन्होंने कहा, कि "मेरे पास रोने या कमज़ोर होने का समय नहीं था, इसलिए मैं उनके लिए शोक भी नहीं मना सकता था।"
अल-ज़ानी ने कहा, कि उन्हें पता था कि कुछ दिन पहले एक तूफान उनकी तरफ आ रहा है, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह इतना भयानक होगा।

भुतहा बना पूरा शहर
डर्ना शहर को अभी देखना, ऐसा लगता है जैसे किसी भुतहा शहर को देख रहे हों। पिछले हफ्ते आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सबकुछ तहस-नहस हो चुका है और अब सड़कों पर मुर्दा सन्नाटा पसरा हुआ है।
डर्ना शहर में जहां देखिए, उधर ही विनाशकारी मंजर है। ऐसा लगता है, जैसे बम धमाका कर पूरे शहर को उड़ा दिया गया है। अभी भी हजारों लोग लापता है और हजारों लोग ऐसे हैं, जिनके शव शायद ही कभी मिल भी पाएं।
अधिकारियों ने कहा, डेर्ना शहर के ऊपर बने दो बांधों के टूटने के बाद 90 मिनट के दौरान ये विनाश और तबाही फैली। दो बांधों के टूटने से बाढ़ का पानी शहर में काफी तेज रफ्तार से आया और पानी के रास्ते में जो भी आया, वो तिनकों की तरह बह गया। बाढ़ की पानी के साथ घर और इन्फ्रास्ट्रक्चर, जो सरकारी भ्रष्टाचार की कहानी बयां करते थे, वो अब समुद्र में विलीन हो चुके हैं।
लीबिया, जिसने 2011 में तानाशाह गद्दाफी के शासन को उखाड़ फेंका था, वो गृहयुद्ध में पहले ही बर्बाद हो चुका था, लेकिन तूफान की इस तबाही से उबरने में इस शहर को शायद सालों लग जाएं, क्योंकि दो दों सरकारों के बीच पिसता ये देश, अपनी बर्बादी की कहानी खुद अपने ही हाथों से लिख रहा है।
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