Khamenei Funeral: खामेनेई के जनाजे पर हमला करेगा अमेरिका? Trump की करीबी महिला ने दिया इशारा, क्या है मतलब?
Khamenei Funeral: अमेरिका की दक्षिणपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता और डोनाल्ड ट्रंप की करीबी मानी जाने वाली लॉरा लूमर एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दुनिया भर में सनसनी मचा दी है। इस पोस्ट के बाद कोई उनकी आलोचना कर रहा है तो कोई अलर्ट मोड पर है। लूमर ने ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसे कई लोगों ने बेहद अमानवीय और भड़काऊ बताया है। इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
अंतिम संस्कार को बताया 'हमले का सही मौका'
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियों से जुड़ी एक खबर साझा की गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लॉरा लूमर ने लिखा कि अंतिम संस्कार का कार्यक्रम सैन्य हमले के लिए "बेहतरीन टारगेट" हो सकता है। उन्होंने अपने पोस्ट में बम का इमोजी भी इस्तेमाल किया, जिससे यह संदेश गया कि वे वहां मौजूद भीड़ पर हमले का समर्थन कर रही हैं। इस बयान के बाद कई देशों के लोगों ने इसे इंसानियत के खिलाफ बताया।

ईरान में अंतिम संस्कार की तैयारियां
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को इस महीने के अंत में होने वाले अंतिम संस्कार तक कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा गया है। इस राजकीय कार्यक्रम में देश-विदेश से लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। ऐसे समय में इस तरह का बयान सामने आने से लोगों में गुस्सा और चिंता दोनों बढ़ गई हैं।
आम नागरिकों को निशाना बनाना गलत- एक्सपर्ट
युद्ध और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि किसी अंतिम संस्कार में शामिल आम नागरिकों को निशाना बनाने की बात करना बेहद गंभीर मामला है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन शोक में शामिल लोगों की जान लेने की बात करना किसी भी हाल में सही नहीं ठहराया जा सकता। कई विशेषज्ञों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया।
कौन हैं लॉरा लूमर?
लॉरा लूमर को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीबी सहयोगियों में गिना जाता है। वह कई चुनावी रैलियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में ट्रंप के साथ नजर आ चुकी हैं। यही वजह है कि उनके इस बयान ने रिपब्लिकन पार्टी को भी असहज स्थिति में डाल दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसका असर अमेरिकी राजनीति पर भी पड़ सकता है।
पहले भी विवादों में रह चुकी हैं लूमर
यह पहली बार नहीं है जब लॉरा लूमर विवादों में आई हों। इससे पहले भी उन पर दक्षिणपंथी षड्यंत्र सिद्धांतों को बढ़ावा देने, इस्लाम विरोधी टिप्पणियां करने और भड़काऊ बयान देने के आरोप लग चुके हैं। इन्हीं वजहों से अतीत में कई बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने उनके अकाउंट्स पर कार्रवाई भी की थी। हालांकि हाल के समय में उनकी ऑनलाइन सक्रियता फिर बढ़ी है।
रिपब्लिकन नेताओं ने भी बनाई दूरी
रिपब्लिकन पार्टी के कई नेताओं और ट्रंप के कुछ सलाहकारों ने भी समय-समय पर लॉरा लूमर के बयानों से दूरी बनाई है। कई नेताओं का मानना है कि इस तरह की कट्टर बयानबाजी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्यक्रम पर हमले की बात करना अमेरिकी लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ माना जा रहा है।
सोशल मीडिया की नीतियों पर भी उठे सवाल
इस विवाद के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की नीतियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति खुलेआम हिंसा या बड़े पैमाने पर हमले की बात करता है, तो ऐसे पोस्ट को तुरंत हटाया जाना चाहिए। आलोचकों के मुताबिक, इस तरह के पोस्ट लंबे समय तक ऑनलाइन बने रहना डिजिटल सुरक्षा और कंटेंट मॉडरेशन पर भी सवाल खड़े करता है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।















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