नितिन नबीन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर 30 जुलाई को वोटिंग, क्या ढहेगा भाजपा का 30 साल पुराना किला?
Bankipur Bypoll: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव अब नई चर्चा का विषय बन गया है। चुनाव आयोग ने इस सीट पर मतदान की तारीखों का ऐलान कर दिया है। जिसके बाद सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। सीट खाली होने के बाद यहां मुकाबला दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं।
एक तरफ भाजपा अभी अपने उम्मीदवार के नाम पर फैसला नहीं कर पाई है, वहीं दूसरी ओर तेज प्रताप यादव ने सबसे पहले प्रत्याशी उतारकर चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है। इस बीच जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के भी चुनाव लड़ने की संभावना लगातार चर्चा में बनी हुई है। ऐसे में बांकीपुर का उपचुनाव केवल एक सीट का मुकाबला नहीं, बल्कि कई बड़े राजनीतिक संदेश देने वाला चुनाव माना जा रहा है।

चुनाव आयोग ने जारी किया कार्यक्रम
चुनाव आयोग ने गुरुवार को निविन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया। इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना होगी। आयोग ने चुनाव की सभी तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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भाजपा उम्मीदवार का इंतजार
उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है, लेकिन भाजपा ने अब तक अपना उम्मीदवार तय नहीं किया है। दूसरी ओर तेज प्रताप यादव सबसे पहले अपने प्रत्याशी का नाम घोषित कर चुके हैं। जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की चर्चा भी लगातार बनी हुई है। कुछ समय पहले उन्होंने कहा था कि अगर उनके मैदान में उतरने से भाजपा बांकीपुर जैसी मजबूत सीट हारती है तो वे चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं।
भाजपा में कई नाम चर्चा में
भाजपा की ओर से उम्मीदवार घोषित नहीं हुआ है, लेकिन कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे अधिक चर्चा अजय आलोक और रणवीर नंदन की हो रही है। दोनों को संभावित दावेदार माना जा रहा है।
अजय आलोक राष्ट्रीय मीडिया में भाजपा का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं। वे कायस्थ समाज से आते हैं और उनके पिता पद्मश्री गोपाल प्रसाद सिन्हा पटना के प्रसिद्ध डॉक्टर रहे हैं। अजय आलोक ने 2003 में राजनीति की शुरुआत की थी। 2005 में कैमूर की चैनपुर सीट से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके।
2010 में उन्होंने उसी सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, मगर सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2012 में वे जदयू में शामिल हुए और पार्टी के प्रवक्ता व महासचिव बने। वर्ष 2023 में उन्होंने जदयू छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। फिलहाल वे भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।
रणवीर नंदन भी दावेदार
भाजपा नेता रणवीर नंदन का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। वे बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष हैं। शिक्षित और शांत स्वभाव के नेता के रूप में उनकी पहचान है। वे भी कायस्थ समाज से आते हैं और पटना के रहने वाले हैं। रणवीर नंदन को कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी माना जाता था। वर्ष 2014 में वे जदयू के कोटे से विधान परिषद पहुंचे थे। 2020 में उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद पार्टी ने उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया। इसके बाद सितंबर 2023 में उन्होंने जदयू छोड़ दिया और भाजपा में शामिल हो गए।
वीणा मानवी को मिला टिकट
तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) की ओर से वीणा मानवी को उम्मीदवार बनाया है। हाल ही में वे पार्टी में शामिल हुई हैं। लंबे समय से सामाजिक कार्यों से जुड़ी वीणा मानवी महिलाओं के अधिकार और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रही हैं। पटना समेत बिहार के कई इलाकों में उन्होंने पारिवारिक विवाद, घरेलू हिंसा और जरूरतमंद लोगों को कानूनी तथा सामाजिक सहायता दिलाने का काम किया है।
वीणा मानवी 'समृद्ध महिला विकास मंच' की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। इस मंच के माध्यम से उन्होंने महिलाओं और पीड़ित परिवारों की मदद के लिए लगातार अभियान चलाए। जुलाई 2026 में जनशक्ति जनता दल से जुड़ने के बाद उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति में कदम रखा। इससे पहले वे भाजपा महानगर पटना की महिला इकाई में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं।
प्रशांत किशोर ने भाजपा को दी चुनौती
करीब 21 दिन पहले बांकीपुर में हुई सभा में प्रशांत किशोर ने लोगों से भाजपा को हराने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि अगर जनता सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले से सहमत नहीं है तो इसका जवाब मतदान के जरिए दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों को फोन नहीं करेंगे, लेकिन अगर बांकीपुर में भाजपा हारती है तो यह संदेश सीधे उनके पास पहुंचेगा।
वोट से संदेश देने की अपील
प्रशांत किशोर ने लोगों से कहा कि जरूरी नहीं है कि वे उन्हें ही वोट दें। उनका कहना था कि अगर मतदाता भाजपा को हराते हैं तो राज्य को बेहतर मुख्यमंत्री मिलने की संभावना बढ़ेगी। वहीं अगर भाजपा फिर जीतती है तो इसे जनता की सहमति माना जाएगा।
EVM और VVPAT से मतदान
निर्वाचन आयोग ने बताया कि उपचुनाव के दौरान सभी मतदान केंद्रों पर ईवीएम और वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा। आयोग के अनुसार पर्याप्त संख्या में मशीनें उपलब्ध हैं और निष्पक्ष तथा शांतिपूर्ण मतदान कराने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
1995 से नबीन परिवार का दबदबा
बांकीपुर सीट पर 1995 से नबीन परिवार लगातार जीतता रहा है। 2008 से पहले इस क्षेत्र को पटना पश्चिम विधानसभा सीट के नाम से जाना जाता था। 1995 में नितिन नबीन के पिता नबीन किशोर सिन्हा पहली बार यहां से विधायक बने और 1995 से 2005 तक हुए चार चुनाव जीते।
2006 में नबीन किशोर सिन्हा के निधन के बाद हुए उपचुनाव में नितिन नबीन मैदान में उतरे और जीत हासिल की। इसके बाद हुए हर विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। अब तक वे इस क्षेत्र से कोई चुनाव नहीं हारे हैं।
जातीय समीकरण भी अहम
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कायस्थ मतदाताओं की संख्या काफी प्रभावशाली मानी जाती है। पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में भी लंबे समय से कायस्थ नेताओं का दबदबा रहा है। पहले शत्रुघ्न सिन्हा और अब रविशंकर प्रसाद यहां से चुनाव जीतते रहे हैं।
चाणक्या संस्था का आंकड़ा
चुनावी अध्ययन करने वाली संस्था चाणक्या के अनुसार बांकीपुर में कायस्थ मतदाता 13 प्रतिशत से अधिक हैं। कुम्हरार और बांकीपुर दोनों सीटों पर इस समाज की भूमिका अहम मानी जाती है। भाजपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में कुम्हरार से कायस्थ उम्मीदवार की जगह गुप्ता समाज के प्रत्याशी को उतारा था। पार्टी चुनाव तो जीत गई, लेकिन उस समय स्थानीय स्तर पर काफी नाराजगी भी देखने को मिली थी।
भाजपा के लिए अग्निपरीक्षा
राजद प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव भाजपा के लिए बड़ी परीक्षा साबित होगा। उनके अनुसार अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नेतृत्व किसे मैदान में उतारता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा परिवारवाद को बढ़ावा देती रही है, जबकि राजद सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्ष सोच और आम लोगों से जुड़े चेहरे को उम्मीदवार बनाने की बात करती है।
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