साल 2076 के बाद कुवैत में रहना होगा असंभव! सबसे बड़े तेल निर्यातक देश से खत्म हो जाएगी 'हवा'

बांग्लादेश और ब्राजील जैसे देश भी गंभीर प्राकृतिक संकटों का सामना कर रहे हैं, लेकिन ये देश कुवैत से काफी ज्यादा गरीब होने के बाद भी बेहतर तरीके से पर्यावरण संकट से उबर रहे हैं।

कुवैत सिटी, जनवरी 18: तेल बेच-बेचकर धन्नासेठ बन चुके कुवैत को लेकर बहुत बड़ी और बुरी खबर है और खबर ये है, कि साल 2076 तक कुवैत लोगों के रहने लायक देश नहीं बचेगा। यानि, साल 2076 तक कुवैत में इंसानों का रहना नामुमकिन हो जाएगा। इसके पीछे की वजह है, अत्यधिक गर्मी, जो असहनीय स्तर तक बढ़ती जा रही है और ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से बर्बाद होने वाला पहला देश कुवैत बन सकता है।

कुवैत में असहनीय गर्मी

कुवैत में असहनीय गर्मी

ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बढ़ता तापमान पूरी दुनिया में रिकॉर्ड तोड़ रही है, लेकिन कुवैत इस धरती का सबसे ज्यादा गर्म जगह बहुत जल्द बन जाएगा और वैज्ञानिकों ने कहा है कि, सिर्फ अगले 50 सालों के बाद कुवैत में लोगों का रहना नामुमकिन हो जाएगा। साल 2016 में कुवैत का टेम्परेचर 54 डिग्री सेल्सियस औसत रिकॉर्ड किया गया था और पिछले साल भी कुवैत में ज्यादातर दिन तापमान 50 डिग्री से ज्यादा ही रिकॉर्ड किया गया और 50 डिग्री तापमान में ही इंसानों का रहना काफी मुश्किल हो जाता है और घर से निकलने में लोगों की हालत खराब हो जाती है, लेकिन अगर तापमान 60 डिग्री या 70 डिर्गी सेल्सियस को पार कर जाए, तो फिर इंसानों के लिए रहना नामुमकिन ही हो जाएगा।

पिछले 76 सालों में रिकॉर्ड तापमान

पिछले 76 सालों में रिकॉर्ड तापमान

वैज्ञानिकों ने कहा है कि, कुवैच में पिछले 76 सालों में पृथ्वी के बाकी हिस्सों से मुकाबले सबसे ज्यादा तापमान रिकॉर्ड किया गया है। वहीं, पर्यावरण पब्लिक प्राधिकरण की रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत में साल 2071 से 2100 इस्वीक के बीच तापमान में 4.5 डिग्री सेल्सियस का इजाफा हो सकता है और ऐसी स्थिति में कुवैत एक निर्जन इलाका बन जाएगा, जहां किसी भी तरह से जानवरों का रहना भी नामुमकिन हो जाएगा। खासकर कुवैत जैसे देश, जहां पहले से ही पानी की भीषण किल्लत रहती है, उन जगहों पर इतनी ज्यादा गर्मी में वनस्पति का विनाश हो जाएगा और देश से वन्यजीव पूरी तरह से विलुप्त हो सकते हैं।

Recommended Video

    Kuwait में साल 2076 के बाद रहना होगा असंभव !, जानिए इसकी वजह | वनइंडिया हिंदी
    पूरी तरह निर्जन हो जाएगा कुवैत

    पूरी तरह निर्जन हो जाएगा कुवैत

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत में तापमान इतना ज्यादा बढ़ चुका हैक कि, यहां पर वन्यजीव पहले ही खत्म होने लगे हैं और भीषण गर्मी के दिनों में पक्षियों की भारी संख्या में मौत होने लगी हैं, क्योंकि उन्हें जिंदा रहने के लिए ना तो पेड़ों की छाया मिल पा रही है और ना ही पीने के लिए पानी मिल पाता है। वहीं, पशुओं के डॉक्टर के पास भारी तादात में बिल्लियों को इलाज के लिए लाया जाता है, जिनमें से ज्यादातर की मौत डिहाइड्रेशन की वजह से हो जाती है। इसके साथ ही जंगली लोमड़ियों ने भी अब कुवैत को छोड़ना शुरू कर दिया है, क्योंकि अब कुवैत उनके रहने लायक देश नहीं बचा है।

    संसाधन अपार, लेकिन बेबस होता कुवैत

    संसाधन अपार, लेकिन बेबस होता कुवैत

    ऐसा नहीं है, कि कुवैत के पास संसाधनों का अभाव है। इस खाड़ी देश ने तेल बेचकर अपार रुपये कमाए हैं और संसाधनों को इकट्ठा किया है, लेकिन अभी भी प्रकृति से लड़ने और प्रकृति के खौफ से बचने की शक्ति किसी के पास नहीं है। कुवैत का भी यही हाल है। कुवैत में बारिश के बाद भी स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता है। पिछले साल जुलाई में अंत में करीब 4 दिनों तक कुवैत की स्थिति काफी खराब रही थी और कुवैत का मौसम अविश्वसनीय रूप से आर्द और काफी ज्यादा गर्म हो गया था और ऐसी स्थिति में लोगों के लिए घर से बाहर निकलना असंभव सरीखा बन गया था। इसके साथ ही कुवैत में हवा भी काफी कम चल रही थी, जिससे कई जानवरों को सांस लेने में काफी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन काफी अमीर होने के बाद भी कुवैत प्रकृति के सामने असहाय नजर आ रहा था।

    सिर्फ अमीर होने से कुछ नहीं होता

    सिर्फ अमीर होने से कुछ नहीं होता

    बांग्लादेश और ब्राजील जैसे देश भी गंभीर प्राकृतिक संकटों का सामना कर रहे हैं, लेकिन ये देश कुवैत से काफी ज्यादा गरीब होने के बाद भी बेहतर तरीके से पर्यावरण संकट से उबर रहे हैं, जकि, ओपेक देशों में सबसे ज्यादा तेल बेचने वाले देशों में चौथे नंबर पर होने के बाद भी कुवैत के पास राजनीतिक इच्छाशक्ति का भारी अभाव है, लिहाजा देश की स्थिति दिनों दिन खराब ही होती जा रही है। जबकि कुवैत में सिर्फ 45 लाख लोग ही रहते हैं, लेकिन राजनीतिक उदासीनता के चलते कुवैत की सरकार देश में ग्रीनहाउस गैसों के उत्पादन को रोकने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कोई भी काम नहीं कर रही है।

    कुवैत में भारी राजनीतिक उदासीनता

    कुवैत में भारी राजनीतिक उदासीनता

    यहां तक कि कच्चे तेल बेचकर रोजी-रोटी चलाने वाले कुवैत के पड़ोसी देश लगातार जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए काम कर रहे हैं और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संकल्प ले रहे हैं, लेकिन कुवैत की सरकार एक भी कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है। सऊदी अरब ने पिछले साल संकल्प लिया था कि, देश में 2060 तक कार्बन गैसों का उत्सर्जन पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा, जबकि संयुक्त अरब अमीरात ने 2050 का लक्ष्य रखा है। जबकि, इन दोनों ही देशों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तेल निर्यात पर टिकी हुई है, लेकिन इन दोनों ही देशों का कहना है कि, वे अपनी अर्थव्यवस्थाओं में विविधता लाने और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश करने के लिए काम कर रहे हैं। वहीं, सऊदी अरब ने को मिशन 2030 के लिए तेजी से काम करना शुरू कर दिया है, ताकि देश की कट्टरपंथी छवि को तोड़कर उदारवादी छवि के साथ विश्व की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे सके।

    पर्यावरण को मजाक समझता कुवैत?

    पर्यावरण को मजाक समझता कुवैत?

    एक तरफ जहां यूएई ने कार्बन उत्सर्जन खत्म करने का लक्ष्य 2050 और सऊदी ने 2060 का लक्ष्य लिया है, वहीं कुवैत की सरकार ने यूनाइटेड नेशंस को बताया है कि, वो साल 2035 तक सिर्फ 7.4 प्रतिशत ही कार्बन गैसों का उत्सर्जन कम कर पाएगा, जो पेरिस समझौते की शर्तों के मुताबिक काफी ज्यादा कम है। हालांकि, कुवैत की तरफ से आश्वासन जरूर दिया गया है, लेकिन ग्रीन हाउस गैसों की उत्पत्ति को कम करने के लिए कुवैत क्या कदम उठाएगा और उसकी रूपरेखा क्या होगी, इसबारे में कुवैत की तरफ से कुछ भी नहीं बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि, मिडिल ईस्ट के बाकी देशों की तुलना में ग्लोबल वार्मिंग को कंट्रोल करने में कुवैत काफी पिछड़ गया है और इसकी कीमत कुवैत को चुकानी होगी।

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+