चुनाव में पिछड़े ओली ने पुराने साथी प्रचंड को किया फोन! क्या नेपाल में फिर होगी कम्युनिस्ट सरकार?
केपी शर्मा ओली ने पुष्प कमद दहल तो फोन कर जीत की बधाई दी और साथ मिलकर कम्युनिस्ट सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा।
नेपाल में प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की नेपाली कांग्रेस नीत सत्तारूढ़ गठबंधन ने शनिवार को नेपाल के संसदीय चुनावों में बढ़त बनाए रखी है। अब तक 148 सीटों में से इस गठबंधन ने 77 सीटों पर विजय हासिल की है। वहीं पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 46 सीटें मिली हैं। नेपाल के आम चुनाव अपनी पार्टी को पिछड़ता देख पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने फिर से 'कम्युनिस्ट एकता' का दांव चल दिया है।
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नेपाल चुनाव में क्या है स्थिति?
आम चुनाव में प्रतिनिधि सभा के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन की मतगणना में नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन ने अब साफ बढ़त बना ली है। 275 सीटों में से 165 सीटों का चुनाव प्रत्यक्ष निर्वाचन के माध्यम से होता है। बाकी 110 सीटें अनुपातिक चुनाव प्रणाली के माध्यम से चुनी जाती हैं। अब तक आए चुनाव परिणाम में नेपाली कांग्रेस ने प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के तहत अकेले 51 सीटें जीती हैं वहीं वह 4 सीटों पर अभी आगे चल रही है। इसके साथ ही उसकी सहयोगी सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट को 10 सीटें मिली हैं। सीपीएन-माओइस्ट सेंटर को 17 सीटें हासिल हुई हैं और 1 सीट पर वह आगे है। लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी को 4 सीटें मिली हैं और गठबंधन के एक अन्य दल राष्ट्रीय जन मोर्चा को 1 सीटें मिली हैं। कुल मिलाकर सत्ताधारी गठबंधन 83 सीटों पर जीत चुका है।

ओली ने प्रचंड को किया फोन
समझा जाता है कि अगर यही ट्रेंड रहा, तो पूरे नतीजे घोषित होने के बाद चार दलों का यह गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में होगा। चुनाव परिणामों के बीच अपनी स्थिति कमजोर देख केपी शर्मा ओली ने 'कम्युनिस्ट एकता' का राग अलापा है। नेपाली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक केपी शर्मा ओली ने अपने पुराने साथी और सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के प्रमुख पुष्प कमल दहल को उनकी जीत की बधाई देने के लिए फोन किया है।

दहल ने नहीं दिया कोई ठोस जवाब
आपको बता दें कि ओली और दहल दोनों अपनी-अपनी सीटों से चुनाव जीत चुके हैं। सत्ताधारी गठबंधन में दहल की पार्टी को 17 सीटें मिली हैं और यह दूसरे नंबर पर चल रही है। सूत्रों के मुताबिक फोन पर हुई बातचीत के दौरान ओली और दहल ने एक दूसरे को जीत के लिए बधाई दी। इसी दौरान ओली ने दहल के सामने साथ मिलकर कम्युनिस्ट सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा। हालांकि इस प्रस्ताव पर दहल ने इस पर कोई साफ जवाब नहीं दिया। उन्होंने सिर्फ यह कहा- सभी चुनाव नतीजे आने के बाद ही वे उचित निर्णय लेंगे।

एक ही पार्टी का हिस्सा थे ओली-प्रचंड-माधव
आपको बता दें कि दहल, ओली और माधव कुमार नेपाल एक ही पार्टी का हिस्सा थे और इस पार्टी ने 2017 में हुए चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया था। इस दौरान दोनों ही नेताओं ने मिलकर सरकार चलाना तय किया था। लेकिन दहल ने नेपाली कांग्रेस से हाथ मिला लिया। उसी समय माधव कुमार नेपाल ने भी ओली से अलग होकर अपनी अलग पार्टी बना ली थी। माधव और दहल सत्ताधारी गठबंधन में शामिल हैं।

क्या नेपाल में बनेगी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार?
जानकारों के मुताबिक अगर ये सभी कम्युनिस्ट नेता एक हो जाएं तो नेपाल में 'कम्युनिस्ट सरकार' बनने की संभावना मजबूत हो जाएगी। फिलहाल नेपाल में पर्यवेक्षकों का ध्यान संसदीय चुनाव के उभर रहे रुझान पर ही टिका हुआ है। संभावना है कि सोमवार रात तक प्रत्यक्ष निर्वाचन वाली सारी सीटों के नतीजे आ जाएंगे। लेकिन आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाली सीटों का आवंटन आठ दिसंबर तक जाकर पूरा हो पाएगा।












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