Khamenei News: 'महिलाएं नाजुक फूल, कोई नौकरानी नहीं...खुशबू का लाभ उठाएं', ईरान में हिजाब कानून के बीच खामेनेई
Khamenei News: ईरान में महिलाओं के अधिकारों पर लगातार अंकुश लग रहा है। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Iran Leader Ayatollah Ali Khamenei) ने कहा कि महिलाएं 'नाजुक फूल' हैं, जिनकी देखभाल करनी चाहिए। लेकिन क्या यह बयान सच में महिलाओं के प्रति सम्मान दर्शाता है, या उनके अधिकारों के हनन को छिपाने का एक तरीका है?
खामेनेई ने बीते तीन दिनों में महिलाओं के अधिकार, मातृत्व, और राजनीतिक मुद्दों पर कई बयान दिए। उनके विचार जहां एक तरफ महिलाओं की प्रशंसा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके शासन में महिलाओं की स्वतंत्रता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं...

18 दिसंबर: महिलाएं 'नाजुक फूल' हैं (Women Delicate Flowers)
ह्यूमन राइट्स के एक ट्वीट ने ईरान में महिलाओं के अधिकारों पर गंभीर प्रतिबंधों को उजागर किया। इसके जवाब में खामेनेई ने कहा, 'महिला एक नाजुक फूल है, कोई नौकरानी नहीं।' उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ घर में फूलों जैसा व्यवहार होना चाहिए, उनकी देखभाल की जानी चाहिए और उनकी खूबसूरती और खुशबू को सराहा जाना चाहिए।
खामेनेई ने पुरुषों और महिलाओं की समानता की बात करते हुए कहा कि दोनों के शारीरिक अंतर भले हों, लेकिन बौद्धिक और आध्यात्मिक क्षमताओं में वे बराबर हैं। कुरान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जो कोई भी नेक काम करता है, चाहे वह पुरुष हो या महिला, हम उसे अच्छा और शुद्ध जीवन देंगे।'
महिलाओं के अधिकार और मातृत्व पर जोर
खामेनेई ने मातृत्व को महिलाओं के लिए सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, 'मां के पैरों के नीचे जन्नत है।' उनका मानना है कि परिवार में पुरुष और महिला की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई श्रेष्ठ है। उन्होंने पश्चिमी समाज पर निशाना साधते हुए कहा कि यूरोप में महिलाओं की स्वतंत्रता का विचार असल में पूंजीपतियों की चाल थी, ताकि उन्हें सस्ता श्रम मिल सके।
17 दिसंबर: फिलिस्तीन और हिजबुल्लाह पर राजनीतिक बयान
खामेनेई ने फिलिस्तीन और हिजबुल्लाह के समर्थन में कहा कि दुष्ट ज़ायोनी दुश्मन को उनके पैरों तले रौंद दिया जाएगा। उन्होंने इजराइल और अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रतिरोध अभी भी ज़िंदा है और गाजा के लोग इसके प्रतीक हैं।
खामेनेई की बातों पर सवाल, वर्तमान स्थिति विपरीत
महिलाओं को 'फूल' कहना एक तरफ सम्मानजनक लगता है, लेकिन ईरान में महिलाओं की वास्तविक स्थिति इसे खोखला बना देती है। अनिवार्य हिजाब कानून (Hijab Law), नैतिकता पुलिस द्वारा की जा रही सख्ती, और महिलाओं के स्वतंत्रता के अधिकारों पर अंकुश खामेनेई के बयानों के विपरीत हैं। 2022 में महसा अमिनी की मौत के बाद महिलाओं ने 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' के नारे के साथ आंदोलन शुरू किया। हालांकि, इन आंदोलनों को बेरहमी से दबाया गया।
हकीकत और विरोधाभास
हालांकि यह बयान महिलाओं के सम्मान को दर्शाता है, लेकिन हकीकत अलग है। ईरान में महिलाओं को सख्त ड्रेस कोड का पालन करना पड़ता है। हिजाब न पहनने पर उन्हें जेल, आर्थिक दंड, और शारीरिक हिंसा झेलनी पड़ती है।
'नूर' अभियान और महिलाओं का संघर्ष
नैतिकता पुलिस ने हाल ही में 'नूर' अभियान शुरू किया है, जिसमें हिजाब कानून को और सख्ती से लागू किया जा रहा है। इस अभियान में महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर गश्त के दौरान निशाना बनाया जा रहा है।
महिलाओं की हिम्मत
इसके बावजूद, महिलाएं बिना हिजाब सड़कों पर उतर रही हैं, गा रही हैं, और विरोध कर रही हैं। यह उनका अपने अधिकारों और आजादी के लिए लड़ाई का प्रतीक है।
वैश्विक मंच पर आलोचना
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट में ईरान को 146 देशों में से 143वां स्थान मिला है। मानवाधिकार संगठनों और अमेरिका जैसे देशों ने ईरान से महिलाओं पर दमन रोकने की अपील की है।
ईरान में महिलाओं का संघर्ष केवल उनके अधिकारों की लड़ाई नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व का सवाल है। खामेनेई का "फूलों" वाला बयान तब तक खोखला रहेगा, जब तक महिलाओं को उनके अधिकार और समानता नहीं दी जाती।
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