Khamenei Funeral: सैयद अता हसनैन-पबित्रा मार्गेरिटा कौन? खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से हुए शामिल
Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में भारत की ओर से भी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ। बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने तेहरान पहुंचकर भारत सरकार और देशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान भारत से पहुंचे विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों, राजनेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी खामेनेई को श्रद्धांजलि दी। 4 से 9 जुलाई तक चलने वाले इस छह दिवसीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम में दुनिया के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।

भारत की ओर से Ayatollah Ali Khamenei को दी गई श्रद्धांजलि
विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने तेहरान में अयातुल्लाह अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी। पबित्रा मार्गेरिटा ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने भारत सरकार और देशवासियों की ओर से सम्मान अर्पित किया। उन्होंने हालिया संघर्ष में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की। इस मौके पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के लोगों के साथ एकजुटता का संदेश भी दिया।
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कौन हैं बिहार के राज्यपाल Syed Ata Hasnain
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने करीब 40 वर्षों तक सेना में सेवा दी और श्रीलंका, सियाचिन, पूर्वोत्तर भारत तथा जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इसके अलावा वे संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के तहत मोजाम्बिक और रवांडा में भी तैनात रहे। वर्तमान में वह बिहार के राज्यपाल हैं और रक्षा मामलों के विशेषज्ञ के रूप में भी उनकी पहचान है।
सेना से लेकर राष्ट्रीय जिम्मेदारियों तक का सफर
सैयद अता हसनैन श्रीनगर स्थित 15वीं कोर और भोपाल स्थित 21वीं कोर के कमांडर रह चुके हैं। वह भारतीय सेना के मिलिटरी सचिव भी रहे। वर्ष 2013 में सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। वह प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय की कार्यकारी परिषद के सदस्य रहे, केंद्रीय कश्मीर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बने और 2020 से 2026 तक राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य के रूप में भी काम किया।
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कई सम्मान और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का अनुभव
सैयद अता हसनैन को परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल सहित कई बड़े सैन्य सम्मान मिल चुके हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई नैनीताल के शेरवुड कॉलेज और दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में हुई। इसके बाद उन्होंने लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, किंग्स कॉलेज लंदन और हवाई स्थित एशिया पैसिफिक सेंटर फॉर सिक्योरिटी स्टडीज से भी उच्च शिक्षा प्राप्त की।
विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा कौन हैं?
भारत सरकार में विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन के साथ ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को भारत की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। पबित्रा मार्गेरिटा असम से राज्यसभा सांसद हैं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह पूर्वोत्तर भारत की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। विदेश राज्य मंत्री के रूप में वह भारत के द्विपक्षीय संबंधों, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक कार्यक्रमों से जुड़े कार्यों का दायित्व संभालते हैं।
भारत से पहुंचे धर्मगुरुओं और नेताओं ने भी दी श्रद्धांजलि
ईरान में भारत से पहुंचे विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने भी अयातुल्लाह अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी। ईरानी दूतावास द्वारा साझा तस्वीरों में हिंदू, सिख और ईसाई धर्मगुरु एक साथ नजर आए। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद तथा सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सभी ने दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
छह दिनों तक चलेगा अंतिम संस्कार कार्यक्रम
अयातुल्लाह अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई से 9 जुलाई 2026 तक कई चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहले दो दिनों तक तेहरान के ग्रैंड इमाम खुमैनी मुसल्ला में अंतिम दर्शन होंगे। 6 जुलाई को मुख्य अंतिम यात्रा निकलेगी। 7 जुलाई को कोम शहर में नमाज-ए-जनाजा होगी, जबकि 8 जुलाई को इराक के नजफ और कर्बला में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित होंगे। 9 जुलाई को मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि हुए शामिल
ईरान के इस राजकीय अंतिम संस्कार में दुनिया के 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। कई देशों के मंत्री, राजनयिक, धार्मिक नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तेहरान पहुंचे हैं। यह समारोह केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी इस आयोजन को वैश्विक महत्व का कार्यक्रम बना रही है।












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