मोजतबा नहीं तो कौन करेगा Ali Khamenei को सुपुर्द-ए-खाक? कौन डालेगा पहली 3 मुठ्ठी मिट्टी? क्या कहता शिया कानून?

Ali Khamenei Funeral: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय जनाजे की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लेकिन इस पूरे कार्यक्रम में एक बड़ी बात सबसे ज्यादा चर्चा में है। सुरक्षा कारणों से उनके बेटे और ईरान के संभावित तीसरे सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अपने पिता के जनाजे में सार्वजनिक रूप से शामिल नहीं होंगे। ऐसे में ईरान में धार्मिक और कानूनी नियमों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

मोजतबा की गैर-मौजूदगी से उठे दो बड़े सवाल

मोजतबा खामेनेई के जनाजे में शामिल नहीं होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिया परंपरा के मुताबिक कब्र में पहली तीन मुट्ठी मिट्टी कौन डालेगा? आमतौर पर यह जिम्मेदारी मृतक के सबसे करीबी पुरुष वारिस की होती है। दूसरा सवाल यह है कि जनाजे के दौरान अली खामेनेई के पार्थिव शरीर का आधिकारिक संरक्षक (Legal Heir) किसे माना जाएगा।

Ali Khamenei Funeral

शिया कानून में बेटे की क्या होती है जिम्मेदारी?

शिया इस्लामी थियोलॉजी के मुताबिक, हर मृतक का एक कानूनी वारिस होना जरूरी माना जाता है। ग्रैंड अयातुल्ला अली अल-सिस्तानी के फतवों पर आधारित पुस्तक 'इस्लामिक लॉज ऑफ डेथ एंड बरियल' के मुताबिक, किसी पुरुष की मौत के बाद उसका बेटा ही मिट्टी डालने का पहला जिम्मेदार व्यक्ति होता है। वही पूरे दफन की व्यवस्था की निगरानी करता है। अगर बेटा या कोई करीबी रिश्तेदार मौजूद नहीं हो, तो यह जिम्मेदारी इलाके के वरिष्ठ इमाम को दी जाती है। यही नियम अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में भी लागू किए जा रहे हैं।

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अगर परिवार मौजूद न हो तो क्या होता है?

शिया इस्लामी कानून असाधारण परिस्थितियों के लिए भी रास्ता बताता है। अगर सुरक्षा खतरे या किसी अन्य वजह से परिवार का सदस्य अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाता, तो वरिष्ठ धार्मिक नेता या स्थानीय इमाम पूरी प्रक्रिया को पूरा कराते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि जनाजा धार्मिक नियमों के अनुसार पूरी गरिमा और सम्मान के साथ संपन्न हो।

दफनाने से पहले कौन-कौन सी रस्में होती हैं?

शिया परंपरा के मुताबिक सबसे पहले पार्थिव शरीर का 'गुस्ल' यानी धार्मिक स्नान कराया जाता है। शव को केवल सामान्य या ठंडे बहते पानी से नहलाया जाता है। इसके बाद शरीर के कुछ हिस्सों पर कपूर लगाया जाता है और फिर सफेद कफन पहनाया जाता है। इसके बाद मुख्य इमाम की अगुवाई में सलात अल-जनाजा यानी जनाजे की नमाज अदा की जाती है। नमाज के बाद शव को इस तरह कब्र में उतारा जाता है कि उसका चेहरा मक्का स्थित काबा की दिशा में रहे। परंपरा के मतुबाकि सबसे करीबी पुरुष रिश्तेदार कब्र में पहली तीन मुट्ठी मिट्टी डालता है।

मोजतबा की जगह कौन निभा सकता है यह रस्म?

ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि मिट्टी डालने का का अधिकृत वारिस कौन होगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि खामेनेई का पार्थिव शरीर लगभग चार महीने तक सुरक्षित रखा गया था, इसलिए इस पूरी प्रक्रिया की तैयारी पहले ही गोपनीय तरीके से कर ली गई थी। मोजतबा के अलावा अली खामेनेई के तीन अन्य बेटे भी हैं। उनके सबसे बड़े बेटे मुस्तफा खामेनेई, जो खुद एक सम्मानित इमाम और धार्मिक विद्वान हैं, इस रस्म को निभाने के सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। संभावना है कि वही कब्र में पहली तीन मुट्ठी मिट्टी डालेंगे।

दूर रहकर भी पिता को दे सकते हैं श्रद्धांजलि

शिया नियमों के मुताबिक अगर कोई बेटा सुरक्षा कारणों से अंतिम जनाजे में मौजूद नहीं हो सकता, तो वह किसी सुरक्षित स्थान से सूरह अल-फातिहा पढ़ सकता है या अपने पिता के लिए दुआ कर सकता है। मोजतबा खामेनेई भी अपने पिता की याद में औपचारिक शोक संदेश जारी कर सकते हैं। बाद में सुरक्षा हालात सामान्य होने पर वह कब्र पर जाकर श्रद्धांजलि भी दे सकते हैं।

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चार महीने बाद सुपुर्द-ए-खाक हो रहे खामेनेई

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल के ज्वॉइंट अटैक में हुई थी। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर बेहद सुरक्षित स्थान पर रखा गया। अब अमेरिका के साथ संघर्षविराम (Ceasefire) होने के बाद ईरान ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका जनाजा शुरू करने का फैसला लिया है। सुरक्षा खतरे अभी भी बने हुए हैं, इसलिए मोजतबा को सार्वजनिक कार्यक्रम से दूर रखा गया है।

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