हद पार कर रहे खालिस्‍तानी आतंकी, पंजाब को अलग देश बनाने के लिए कनाडा में कराएंगे जनमत संग्रह

ओटावा, 29 अगस्तः ब्रिटेन में जनमत संग्रह कराने के बाद एक बार फिर से खालिस्तानी आतंकियों ने कनाडा में इसकी तैयारी तेज कर दी है। भारत में प्रतिबंधित आंतकी संस्था सिख फॉर जस्टिस कनाडा में खालिस्तान पर 18 सिंतबर को जनमत संग्रह का आयोजन करने जा रहा है। सिख फॉर जस्टिस की इस नापाक मुहिम का कनाडा में रह रहे भारत समर्थक सिख कड़ा व‍िरोध कर रहे हैं।

18 सितंबर को होगा जनमत संग्रह

18 सितंबर को होगा जनमत संग्रह

भारत के खिलाफ अक्‍सर जहर उगलने वाला गुर पतवंत सिंह पन्‍नू इस आतंकी गुट का प्रमुख है। पन्‍नू पाकिस्‍तान के इशारे पर भारत व‍िरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देता आया है। 18 सितंबर को जनमत संग्रह की तैयारियों को लेकर कनाडा में राजनीति बेहद गरम होने लगी है। इस जनमत संग्रह में आतंकी संस्‍था सिख फॉर जस्टिस कनाडा में रह रहे लोगों से यह पूछ रहा है कि क्‍या पंजाब को एक अलग देश बनाना चाहिए? इससे पहले इस गुट ने ब्रिटेन में जनमत संग्रह कराया था।

खालिस्तान समर्थक निकाल रहे रैली

खालिस्तान समर्थक निकाल रहे रैली

कनाडा में खालिस्‍तान समर्थक आतंकी 18 सितंबर को जनमत संग्रह कराने से ठीक पहले कनाडा में ट्रक रैली निकाल रहे हैं, बड़े-बड़े पोस्‍टर लगा रहे हैं और टोरंटो में गुरुद्वारे के अंदर सिखों को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं। इस जनमत संग्रह में एक और खतरनाक बात यह है कि इसे कनाडा सरकार के स्‍वामित्‍व वाले और संचालित किए जाने वाले द गोर मीडो कम्‍युनिटी सेंटर जो कि ब्रैम्पटन में है, वहां अंजाम दिया जाएगा।

लंदन में हुई जनमत संग्रह की शुरुआत

लंदन में हुई जनमत संग्रह की शुरुआत

सिख फॉर जस्टिस ने इस जनमत संग्रह की शुरुआत 31 अक्‍टूबर 2021 को लंदन में की थी। लंदन में जनमत संग्रह कराने के बाद यह संगठन स्विटरजलैंड, कनाडा और इटली के कई शहरों में मतदान करा चुका है। संगठन का ऐसा दावा है कि अब तक हुए जनमत संग्रह में कुल 450,000 सिखों ने मतदान में हिस्सा लिया है। हालांकि इस दावे पर लगातार सवाल भी उठाए जा रहे हैं। कई जानकारों का कहना है कि ये संख्ता बढ़ाचढ़ाकर बताई गई है।

पाकिस्तान का मिल रहा खूब साथ

पाकिस्तान का मिल रहा खूब साथ

इन जनमत संग्रह को पाकिस्‍तान से भरपूर समर्थन मिल रहा है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि सिखों के नाम पर विदेशों में रह रहे पाकिस्तानी यहां वोट देने पहुंचे थे। हालांकि इस संगठन का दावा है कि उनके जनमत संग्रह में गुटनिरपेक्ष विशेषज्ञों का एक पैनल मतदान प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है। 18 सितंबर को होने वाले इस जनमत संग्रह के लिए केंद्र का नाम हरजिंदर सिंह परहा के नाम पर रखा गया है। हरजिंदर सिंह सन 1984 में भारत आया था। कई हिंसक घटनाओं में लिप्त पाए जाने के बाद 1988 में भारतीय सेना ने उसे एक मुठभेड़ में मार गिराया था।

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