भारत में हिंसा को बढ़ाने Twitter को बनाया गया है ढाल, वॉशिंगटन पोस्ट का खालिस्तानियों पर बड़ा खुलासा
खालिस्तानियों का मूवमेंट अचानक से पिछले कुछ महीनों में बढ़ गया है और यूके और अमेरिका में अमृतपाल सिंह के समर्थन में प्रदर्शन किए गये हैं।

Khalistani using Twitter bots to promote violence: पिछले कुछ महीनों में खालिस्तानियों ने एक बार फिर से भारत के खिलाफ हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है।
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूके और अमेरिका में भारतीय संस्थानों और हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाया गया है और एंटी इंडिया और एंटी मोदी नारे लिखे गये हैं।
इस बीच अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने खालिस्तानियों के ऊपर बड़ा खुलासा किया है और भारत के खिलाफ हिंसक घटनाओं को बढ़ावा देने के लिए किस तरह से ट्विटर को टूल बनाकर इस्तेमाल किया जा रहा है, इसका खुलासा किया है।
वॉशिंगटन पोस्ट ने खुलासा करते हुए लिखा है, कि खालिस्तान समर्थक एंटी-इंडिया एजेंडा चलाने के लिए ऑटोमेटेड ट्विटर अकाउंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनके जरिए दुनियाभर में हिन्दू मंदिरों को निशाना गया है।

क्या होते हैं ऑटोमेटेड ट्विटर अकाउंट्स?
ऑटोमेटेट अकाउंट्स, यानि स्वचालित खाते, जिन्हें टेक्निकल लैंग्वेज में 'बॉट्स अकाउंट्स' भी कहा जाता है, उन्हें प्रोग्राम के जरिए चलाया जाता है। यानि, इन खातों को एक बार प्रोग्राम कर दिया जाता है और फिर उसे चलाने के लिए किसी इंसान की जरूरत नहीं होती।
ये ट्विटर अकाउंट अपने आप चलते रहते हैं और जिस तरह के कंटेट के लिए इन्हें प्रोग्राम किया गया रहता है, उस तरह के कंटेट, ऐसे अकाउंट अपने आप ट्वीट करते हैं, उन्हें रीट्वीट करते हैं।
ऑटोमेटेड ट्वीटर अकाउंट्स के उदाहरण आप वैक्सीन अपॉइनमेंट या फिर किसी आपदा से पूर्व चेतावनी जारी करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
यानि, अगर ऐसे 1000 बॉट्स अकाउंट्स बना लिए जाएं, तो किसी भी एजेंडे को काफी आसानी के साथ ट्विटर पर एंजेंडे के रूप में फैलाया जा सकता है, और उन्हें ट्रेंड कराया जा सकता है, जो खालिस्तानी कर रहे हैं।

वॉशिंगटन पोस्ट का खुलासा क्या है?
वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है, कि ट्विटर के पास फिलहाल कर्मचारियों की संख्या काफी कम है, लिहाजा ट्विटर फिलहाल सिक्योरिटी को लेकर उतना कारगर नहीं है। यानि, किस कंटेट से सुरक्षा पर असर पड़ता है, उन्हें हटाने में फिलहाल ट्विटर कमजोर है। जिसका फायदा खालिस्तानी उठा रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि खालिस्तान के चंद समर्थक, एक साथ खालिस्तान के समर्थन करने वाले पोस्ट, वीडियो और खालिस्तानियों से जुड़े कंटेट को कई ऑटोमेटेड ट्वीटर अकाउंट्स के जरिए पब्लिश कर रहे हैं। इससे ऐसा लगता है, कि भारी संख्या में खालिस्तानी एक साथ किसी मुद्दे पर बोल रहे हैं, जबकि असलियत में उनकी संख्या मुट्ठी भर होती है।
नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोध के मुताबिक, इसके अलावा खालिस्तान समर्थक, टालमटोल की रणनीति का भी उपयोग कर रहे हैं, जैसे कि ट्वीट्स को बाद में हटा लिया जाता है। बम शब्द की जगह डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा फर्जी खातों को जिंदा रखने के लिए लगातार अलग अलग रणनीतियां बनाई जाती है।
लेकिन, इस वक्त ये मामला उस वक्त तब तेज हो गया है, जब भारत के अंदर अमृतपाल सिंह पर पंजाब पुलिस ने नकेल कस दिया है और अमृतपाल सिंह भागा भागा फिर रहा है।
लिहाजा, अमृतपाल सिंह को बचाने के लिए खालिस्तानियों ने एक साथ सैन फ्रांसिस्को, यूके समेत कुछ और देशों में भारतीय वाणिज्यिक दूतावासों में तोड़फोड़ करनी शुरू कर दी। अमेरिका में भारतीय अधिकारियों और पत्रकारों पर हमला किया है। जिसके बाद ये स्थिति विस्फोटक हो चुकी है और भारत सरकार अत्यंत सख्त हो गई है।
ऐसे मौके पर इन ऑटोमेटेड ट्विटर अकाउंट्स का भरपूर इस्तेमाल किया गया है और भारत के खिलाफ नफरती कंटेट फैलाए गये हैं।
रिसर्च में पता चला है, कि ट्विटर ने ऐसे फर्जी खातों के खिलाफ कार्रवाई की कोशिश की है, लेकिन इसके बाद भी ऐसे नफरती कंटेट को प्रमोट करने के लिए ट्विटर एक काफी सुविधाजनक प्लेटफॉर्म बना हुआ है।

भारत में भी नफरत फैलाने की कोशिश
वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है, कि पंजाब प्रांत के अंदर किसानों की आबादी के अंदर भी अलगाववाद की भावना भरने की कोशिश की गई है और किसानों के सामान्य मुद्दे, जैसे एमएसपी, किसान आंदोलन, और नौकरियों के अभाव के मुद्दे को लेकर भी लोगों को बहकाने की कोशिश की गई है।
अमृतपाल सिंह ने पिछले साल पंजाब के ग्रामीण इलाकों का दौरा किया था, जहां भारी हथियारों से लैस लोग उसके साथ देखे गये थे। इस दौरान अमृतपाल सिंह ने उग्र भाषणबाजी की थी और पंजाब को एक अलग देश बनाने का बयान दिया था।
वहीं, जब भारत ने अमृतपाल सिंह और उसके समर्थकों पर कार्रवाई की, तो उसे भी मुद्दा बनाने की कोशिश की गई है।
वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है, कि भारत सरकार की कार्रवाई के बाद ऐसे ट्वीटर अकाउंट्स से भड़काऊ ट्वीट्स किए गये और खालिस्तान समर्थकों से भारत में हिंसा फैलाने का आह्वान किया गया।
इन ट्वीट्स के जरिए खालिस्तान समर्थकों से भारत में बिजली प्लांट्स को जलाने, ट्रेन पटरियों को उखाड़ने, अन्य रणनीतिक लक्ष्यों पर हमला करने का आह्वान किया गया। इसके साथ ही, ट्वीट्स में लोगों को जमा करने और सीधी कार्रवाई करने के लिए भी कहा गया।
ऑटोमेटेड ट्वीटर अकाउंट के एक ट्वीट में एक वीडियो शेयर किया गया था, जिसमें एक रेलवे में की गई तोड़फोड़ का वीडियो शेयर किया गया था और उसका श्रेय 'सिख फॉर जस्टिस' ग्रुप को दिया गया था, कि इस ग्रुप ने रेलवे में तोड़फोड़ की है।
वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया है, कि उसने 'सिख फॉर जस्टिस' से इसका जवाब मांगने की कोशिश की, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं दिया गया।

ऑटोमेटेड अकाउंट्स के कितने खाते?
रिसर्च के दौरान NCRI ने पाया, कि जनवरी के बाद से चले अभियान के बाद से 359 फर्जी ट्वीटर अकाउंट्स सक्रिय हैं। ये अकसर 20 से 50 अकाउंट्स के ग्रुप में काम करते हैं। यानि, किसी वीडियो को अगर वायरल करना है, तो 20 से 50 ट्विटर अकाउंट्स के जरिए एक साथ ट्वीट किया जाता है।
इनमें से ज्यादातर फर्जी खाते 'सिख फॉर जस्टिस' से जुड़े हैं। आपको बता दें, कि 'सिख फॉर जस्टिस' पर भारत में प्रतिबंध लगा हुआ है।
ये फर्जी खाते लगातार और बार बार किसी कंटेट को ट्वीट और रीट्वीट करते रहते हैं, जिससे ये लगातार लोगों के सामने आते रहते हैं। इन खातों से सार्वजनिक हस्तियों को टैग भी किया जाता है, ताकि ये खाते विश्वसनीय लगे।
एनसीआरआई और न्यूयॉर्क पुलिस विभाग में साइबर इंटेलिजेंस के पूर्व प्रमुख जैक डोनोह्यू, जो एनसीआरआई के सीओओ हैं, उन्होंने कहा, कि 'जब आप किसी बयानबाजी में वृद्धि और उसकी तीव्रता को देखते हैं, कि कैसे ये उन घटनाओं से पहले होता है, जो असल में वास्तविक दुनिया में घटित होती हैं, जो वास्तव में बर्बर होती हैं और हिंसा में बदल जाती हैं।'
उनका ये कहना था, कि ऐसे फर्जी खातों से किसी विचार को इतनी तीव्रता से फैलाया जाता है, कि उसके परिणाम हिंसक हो जाते हैं, जो असल में चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा, कि वो NCRI के रिसर्च डेटा को उन स्थानीय पुलिस अधिकारियों और कानून एजेंसियों को भेजेंगे, जो संभावित लक्ष्य हो सकते हैं।

खालिस्तान आंदोलन में पाकिस्तान का कितना हाथ?
NCRI ने अपने रिसर्च में इस बात का भी पता लगाया है, कि क्या खालिस्तान आंदोलन को वाकई पाकिस्तान का समर्थन मिलता है, क्योंकि अकसर दावे किए जाते हैं, कि पाकिस्तान, भारत में अशांति फैलाने के मकसद से खालिस्तान का समर्थन कर रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि रिसर्च के दौरान पाया गया है, कि ऑटोमेटेड अकाउंट के 20 प्रतिशत खाते, जो एंटी इंडिया एजेंडा फैलाने में काम में लाए जाते हैं, वो पाकिस्तान के अंदर से चलाए जाते हैं।
इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि इनमें से कुछ खातों के जरिए यहां तक लिखा जाता है, कि खालिस्तानी नेताओं को पाकिस्तान का अहसानमंद होना चाहिए, खासकर पाकिस्तान की एक राजनीतिक पार्टी का समर्थन के लिए शुक्रिया अदा करना चाहिए।
NCRI ने कहा, कि उसने पाकिस्तान में संचालित होने वाले कई फर्जी खातों तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन वो नाकाम रहा।
NCRI ने अपने रिसर्च पेपर में साफ शब्दों में लिखा है, कि "खालिस्तान का समर्थन करने वाले, पाकिस्तान से संचालित होने वाले ऐसे खातों को चलाने में पाकिस्तान एक नेटवर्क के तौर पर काम करता है और भारत के खिलाफ गतिविधियों को बढ़ावा देता है, जिसमें हिन्दू पूजा स्थलों पर हमला करना, आतंक फैलाने के लिए मूवमेंट चलाना और भारतीय दूतावासों पर हमले कराना तक शामिल है"।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि "ये काम पाकिस्तानी रणनीतिक हितों के साथ अच्छी तरह से मेल खाता है।"
वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया है, कि वॉशिंगटन स्थिति पाकिस्तानी दूतावास की तरफ से उनके सवालों को लेकर कोई जवाब नहीं दिया गया है।
एनसीआरआई ने कहा है, कि ट्विटर ने ऐसे फर्जी खातों के खिलाफ कार्रवाई की है और कई खातों को बंद भी किया है, लेकिन ऐसे अकाउंट्स चलाने वाले लोग फिर नये नामों के साथ ट्विटर पर वापस लौट आते हैं।
ट्विटर के ट्रस्ट और सुरक्षा प्रमुख ने वॉशिंगटन पोस्ट के ईमेल का जवाब नहीं दिया। वहीं, कंपनी के प्रेस विभाग ने सवाल के जवाब में इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी है।
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