आर्मी अफसरों की अय्याशियों की कीमत चुकाता पाकिस्तान, बड़े-बड़े गोल्फ कोर्स... भड़के बैरिस्टर ने दिखाई तस्वीरें
Pakistan Army: पाकिस्तान में जन्मे एक बैरिस्टर खालिद उमर ने सेना के शीर्ष जनरलों को आर्थिक तंगी के बीच उनकी ऐशो आराम की जिंदगी जीने को लेकर निशाना साधा है।

Image: Oneindia
पाकिस्तान आजादी के बाद से अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट का सामना करने को मजबूर है। देश पर 100 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज हो चुका है। महंगाई दर अब 40 फीसदी आंकड़े को छूने वाली है। इससे निपटने के लिए इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) कर्ज की किश्त जारी करने तैयार नहीं है। ऐसे वक्त में जब चीन को छोड़कर एक भी देश पाकिस्तान को आर्थिक पैकेज देने को तैयार नहीं हैं, देश के चंद लोग हैं जिनके पास अरबों रुपये हैं और शानदार विलासपूर्ण जीवन जी रहे हैं। पाकिस्तान में जन्मे एक बैरिस्टर ने इसे लेकर आलोचना की है।
200 से अधिक गोल्फ कोर्स
बिजनेस टुडे कि एक रिपोर्ट के मुताबिक लोकप्रिय ब्रिटिश-पाकिस्तानी बैरिस्टर खालिद उमर ने हाल ही में तस्वीरों का एक कोलाज साझा किया है। इस कोलाज में देश के सैन्य अधिकारियों के लिए विशेष रूप से बनवाए गए गोल्फ कोर्स को दिखाया गया है। बैरिस्टर ने इसके साथ लिखा है कि ये तस्वीरें किसी पश्चिमी देश की नहीं हैं। ये पाकिस्तानी सैन्य कुलीन वर्ग के लोगों के लिए तैयार की हुईं 200 गोल्फ कोर्सों में से एक है। ये एक गोल्फ कोर्स 1900 एकड़ में फैला हुआ है।
बैरिस्टर ने आगे लिखा है कि इस गोल्फ कोर्स में खेले जाने के लिए जरूरी एक गोल्फ स्टिक की कीमत एक मजदूर के मासिक वेतन से भी कहीं अधिक है। उन्होंने आगे लिखा, "यह जनरल का पाकिस्तान दिवालिया होने के औपचारिक घोषणा के कगार पर है।" उमर के इस ट्वीट ने एक बार फिर से इस सोच को और पुख्ता किया है कि पाकिस्तान में दो प्रकार के लोग हैं। ऐसे लोगों की तादाद बेहद अधिक है जिन्हें जरूरत की चीजें खरीदने में भी मुश्किलें आ रही हैं। बहुत-से लोग दो वक्त का खाना तक नहीं जुटा पा रहे हैं। और दूसरे लोग जिनकी संख्या बेहद कम है, ऐसी स्थिति में भी तड़क-भड़क वाली जीवन शैली जी रहे हैं और अपने विशेष विशेषाधिकारों का आनंद उठा रहे हैं।
भारतीय सेना के अधिकारी ने भी की आलोचना
आपको बता दें कि पाकिस्तान में सरकार ने श्रमिकों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 25,000 रुपये तय कर रखा है। वहीं एक गोल्फ किट की कीमत लाखों में है। बैरिस्टर के ट्वीट का जवाब देते हुए, पूर्व भारतीय सेना प्रमुख वेद मलिक ने भी इसकी आलोचना करते हुए लिखा है कि पाकिस्तान की सेना पाकिस्तान में राजनीति और सत्ता पर अपनी पकड़ क्यों नहीं छोड़ेगी, इसका एक कारण ये भी है।
आपको बता दें कि पाकिस्तान में, सैन्य अधिकारियों को बहुत सारे विशेषाधिकार प्राप्त हैं। लेकिन जो बात देश में बहुतों को परेशान करती है वह यह है कि सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें जमीन का एक बड़ा हिस्सा मिलता है। एक प्रमुख रक्षा विश्लेषक, आयशा सिद्दीका ने अपनी पुस्तक- मिलिट्री इंक: इनसाइड पाकिस्तान मिलिट्री इकोनॉमी में लिखती हैं कि पाकिस्तान में सेना के पास देश की 12 प्रतिशत भूमि है, जिसमें से दो-तिहाई वरिष्ठ अधिकारियों के स्वामित्व में है।
न्यूनतम वेतन मजदूरी बढ़ाने की मांग
अमीर और गरीब के इस विभाजन को कम करने के लिए इस साल जनवरी में पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने सुझाव दिया था कि IMF की मांगों को पूरा करने के लिए सरकार को न्यूनतम वेतन 25,000 रुपये से बढ़ाकर 35,000 रुपये करना होगा। पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा था कि मजदूरों और कामगारों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 35,000 रुपये की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रमिक वर्ग पर वित्तीय बोझ को कम करना सरकार की जिम्मेदारी है और केवल दूरगामी कदम ही आम आदमी को आर्थिक दलदल से बाहर निकाल सकते हैं।
रसातल में पहुंचता जा रहा पाकिस्तान
लगातार घटता विदेशी मुद्रा भंडार, कमजोर आर्थिक वृद्धि, उच्च मुद्रास्फीति और गिरती मुद्रा के कारण पाकिस्तान गंभीर संकट में पहुंच गया है। हर दिन आयात महंगा होता जा रहा है। हाल के दिनों में, कई वारयल वीडियो में आम पाकिस्तानियों को आटे के पैकेटों के लिए संघर्ष करते हुए देखा गया था। कीमतें बढ़ गईं और मिलें बंद हो गईं थी, जिसकी वजह से आटे की कमी हो गई। देश में आर्थिक असमानता का सबसे बड़ा उदाहरण तब दिखा जब कुछ सरकारी दुकानों पर सब्सिडी वाले आटे के लिए कतार में खड़े होकर अपनी जान गंवा बैठे, वहीं कई युवा कनाडाई ब्रांड टिम हॉर्टन्स की कॉफी खरीदने के लिए लंबी लाइनों में खड़े दिखे।












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