कोरोना के सुपर वेरिएंट से और मचेगी तबाही, टेंशन में वैज्ञानिक
भारत द्वारा वैक्सीन एक्सपोर्ट पर लगाई गई रोक पर केन्या के टॉप वैज्ञानिक ने कहा है कि वैक्सीनेशन नहीं होने से कई ऐसे वेरिएंट पैदा होंगे जो पूरी दुनिया में फिर से तबाही मचाएगा।
नैरोबी/नई दिल्ली, मई 17: भारत में कोरोना से हालात बुरी तरह से बेकाबू हैं और हर दिन भारत में 4 हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। लेकिन, भारत की खराब स्थिति का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। खासकर अफ्रीकी देशों का स्वास्थ्य भारत में खराब हालत की वजह से और बिगड़ रहा है। भारत ने वैक्सीन के निर्यात पर रोक क्या लगाई, अफ्रीकी देशों में हाहाकार मच गया है। अफ्रीकी देशों की हालत को देखते हुए केन्या के टॉप साइंटिस्ट ने पूरी दुनिया के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अफ्रीकी देशों में वैक्सीनेशन की रफ्तार ना के बराबर है, जिससे महामारी और तेजी से फैलेगी, इसके साथ ही कोरोना के कई और सुपर वेरिएंट्स पैदा होंगे, जो तबाही फैलाने के लिए काफी होंगे।

वैक्सीनेशन के लिए पैसे नहीं
गरीबी और भयानक आर्थिक संकट से जूझते अफ्रीकी देशों के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वो अपने देशवासियों के लिए वैक्सीन खरीद सके और देश में बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन अभियान चला सके। लिहाजा केन्या जैसे देश पूरी तरह से डब्ल्यूएचओ के कोवैक्स स्कीम पर ही निर्भर हैं। कोवैक्स एक ग्लोबल गठबंधन है, जो बिना किसी भेदभाव के सभी देशों को समान तरीके से वैक्सीन उपलब्ध करवाता है। जबतक भारत में कोरोना का दूसरा लहर नहीं फैला था, तब तक भारत सरकार ने कोवैक्स स्कीम में काफी ज्यादा वैक्सीन की खुराक भेजी, लेकिन इस वक्त भारत ने किसी और देश को वैक्सीन देने पर रोक लगा रखी है। कोवैक्स की वजह से ही अफ्रीकी देशों तक वैक्सीन के लाखों डोज पहुंचाए गये हैं। भारत में बनने वाली एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड वैक्सीन की बड़े पैमाने पर अफ्रीकी देशों में सप्लाई की है। इस वैक्सीन को भारत की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने तैयार किया है। केन्या को अब तक कोवैक्स स्कीम के तहत वैक्सीन की जितनी भी खुराक मिली है, वो सारी खुराक का इस्तेमाल कर चुका है और अब आलम ये है कि केन्या में वैक्सीनेशन रूकने वाली है।

लोगों को सिंगल डोज वैक्सीन
वर्ल्ड डेटा की रिपोर्ट के मुताबिक, केन्या में वैक्सीनेशन की रफ्तार चिंताजनक है। रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक केन्या में 2 प्रतिशत आबादी को भी वैक्सीन नहीं लगाई गई है और जिन लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक मिली है, उन लोगों को वैक्सीन की दुसरी खुराक मिलने पर भारी संदेह है। कोवैक्स स्कीम के तहत केन्या में जून महीने में वैक्सीन की डिलिवरी होनी थी लेकिन अब उम्मीद कम है कि केन्या को जून महीने तक वैक्सीन मिले। हालांकि, केन्या की आबादी काफी कम है, बावजूद इसके 2 प्रतिशत से भी कम लोगों को वैक्सीन लगना चिंता की बात है। वहीं, अफ्रीका महाद्वीप के दूसरे देशों की स्थिति और भी ज्यादा खराब है और कई देश तो ऐसे हैं जहां अभी तक वैक्सीनेशन शुरू भी नहीं हुई है।

बेहद बुरे होंगे हालात
लैसेंट ग्रुप लैबोरेट्रीज के फाउडिंग पार्टनर और पैथौलॉजिस्ट डॉ. अहमद कलेबी ने दुनिया के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा कि अगर केन्या जैसे देशों में जल्द से जल्द वैक्सीन की रफ्तार नहीं बढ़ाया गया तो दुनिया को गंभीर परिणाम भुगतना होगा। डॉ. अहमद कलेबी ने अमीर देशों से आग्रह किया है कि वो अपने वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर दोबारा विचार करें। डॉ. अहमद कलेबी ने खास तौर पर इस वक्त बच्चों को वैक्सीन की खुराक देने पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि 'इस वक्त दुनिया में जो हालात हैं, उसे देखते हुए ये बेहद हैरानी की बात है कि अमेरिका जैसे देश टीनएजर्स के लिए वैक्सीनेशन प्रोग्राम चलाने जा रहे हैं क्योंकि पूरी दुनिया में बीमार पड़े लोग और सुपर स्प्रेडर्स को अभी तक वैक्सीन की खुराक नहीं मिल पाई है।' आपको बता दें कि अमेरिका नें फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से इजाजत मिलने के बाद अब 12 से 15 साल के बच्चों को फायजर-बायोटेक की वैक्सीन दी जाएगी।
स्थिति खतरनाक क्यों ?
डॉ. अहमद कलेबी ने पूरी दुनिया के लिए चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 'ज्यादातर देशों में वैक्सीन का नहीं मिलना कई और सुपर वेरिएंट्स पैदा कर सकता है, जो आने वाले वक्त में काफी खतरनाक साबित हो सकता है। बात साफ है जब तक हम सब लोग सुरक्षित नहीं हो जाते, कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा'। इससे पहले डब्ल्यूएचओ भी अमीर देशों और गरीब देशों के बीच वैक्सीनेशन में भारी गैप पर सवाल उठा चुके हैं। डब्ल्यूएचओ चीफ ने कहा था कि पूरी दुनिया नैतिकता की इस तबाही को देख रही है। उन्होंने ये भी कहा था कि 'अभी कई ऐसे देश हैं, जहां फ्रंट लाइन वर्कर्स को भी वैक्सीन की खुराक नहीं दी गई है।'












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