US Presidential Debate: कमला हैरिस बनाम डोनाल्ड ट्रंप, पहली बहस के लिए दोनों नेताओं की कैसी हैं तैयारियां?

US Presidential Debate: मंच के एक तरफ एक प्रॉसीक्यूटर होंगी, जो अपने प्रतिद्वंद्वी को लोकतंत्र के लिए खतरा और 'अतीत का अवशेष' बताकर खारिज करने की कोशिश करेगी। और दूसरी तरफ रियल एस्टेट का दिग्गज होगा, जो अपने प्रतिद्वंद्वी को एक 'अति-उदारवादी' नेता बताएगा, जो अर्थव्यवस्था को गतिरोध में डाल देगा।

अमेरिकी समय के मुताबिक, मंगलवार की राष्ट्रपति पद की बहस उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए आमने-सामने मिलने का पहला मौका होगा, और वे संयुक्त राज्य अमेरिका के भविष्य पर बहस करेंगे।

US Presidential Debate

दोनों उम्मीदवार अपने हमलों को तेज कर रहे हैं और अपनी कड़ी टक्कर में आगे निकलने की रणनीति बना रहे हैं।

एबीसी न्यूज पर होने वाले ये टेलीविजन बहस, कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप के लिए 5 नवंबर के चुनाव से पहले एक-दूसरे का आमना-सामना करने का एकमात्र अवसर हो सकती है।

और इसका मतलब है, कि दांव ऊंचे हैं। मिशिगन विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर आरोन कॉल राष्ट्रपति पद की बहस का अध्ययन करते हैं और चेतावनी देते हैं कि इस बहस के महत्व को नजरअंदाज न करें।

अलजजीरा की एक रिपोर्ट में काल ने कहा, "बहस आपको चुनाव नहीं जिता सकते, लेकिन निश्चित रूप से बहस आपको हरा सकते हैं।"

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जून में हुई बहस का होगा साया

पेनसिल्वेनिया के फिलाडेल्फिया में होने वाला यह मुकाबला इस चुनाव चक्र में दूसरी राष्ट्रपति बहस है।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है, कि पहली बहस में हुई गलतियां इस बार प्रतिभागियों के लिए चेतावनी के तौर पर काम करेंगी।

पहली बहस 27 जून को हुई थी और यह वह घटना थी, जिसने राष्ट्रपति जो बाइडेन के फिर से चुनाव अभियान को खत्म कर दिया था। उस समय संभावित डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बाइडेन बहस के मंच पर ट्रंप का सामना करते समय लड़खड़ा गए थे, बीच में ही बोलने लगे थे और अपनी बातें सामने रखने में बुरी तरह से नाकाम हो गये थे।

बहस में उनके कमजोर प्रदर्शन के बाद 81 वर्षीय बाइडेन की उम्र और क्षमता को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।

एक महीने से भी कम समय बाद, बाइडेन रेस से बाहर हो गए और जल्द ही कमला हैरिस ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार के रूप में उनकी जगह ले ली।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है, कि जून में होने वाली इस बहस की घटनाएं तब और भी महत्वपूर्ण हो जाएंगी, जब हैरिस और उनके रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी ट्रंप मंगलवार के लिए अपनी रणनीति तैयार करेंगे। कुछ लोगों का अनुमान है, कि बाइडेन की हार मंगलवार की बहस में और भी लोगों का ध्यान खींच सकती है।

वर्जीनिया विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति इतिहासकार बारबरा पेरी ने अल जजीरा की रिपोर्ट में कहा है, कि "बाइडेन और ट्रंप की बहस, आप एक घोषणात्मक वाक्य में कह सकते हैं, अमेरिकी इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रपति बहस थी। इसलिए यह दर्शाता है कि दांव वास्तविक और काफी ज्यादा हैं।"

इस बीच, कॉल ने जून की बहस को इस बात का सबूत बताया कि एक हाई-प्रोफाइल गलती किसी उम्मीदवार को चुनाव में हार का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा, "90 मिनट की बहस में आप कोई गलती या फंबल कर सकते हैं, या ऐसा कुछ कर सकते हैं, जो आगे चलकर आपको बदनाम कर दे - जैसा कि बाइडेन के साथ हुआ, कि एक चर्चा चल पड़ी, कि उनके पास अगले चार साल तक काम करने की क्षमता नहीं है।"

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कमला हैरिस की स्ट्रैटजी क्या हो सकती है?

कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप, दोनों ही मंगलवार की बहस के लिए इस्तेमाल की जाने वाली रणनीति के बारे में चुप रहे हैं। क्योंकि, अपनी रणनीतियों को सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने से उनकी प्रभावशीलता कम हो सकती है।

लेकिन हैरिस की टीम उम्मीद कर रही है, ट्रंप खुद अपना विमान दुर्घटनाग्रस्त कर लेंगे।

कमला हैरिस की टीम ने कोशिश की थी, कि जब ट्रंप बोल ना रहें हो, तो उनका माइक खुला रखा जाए, लेकिन टेलीविजन चैनल ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।

यह जून में बाइडेन के टीम की तरफ से की गई कोशिशों के विपरीत था। बाइडेन की टीम को उम्मीद थी, कि म्यूट किया गया माइक्रोफोन ट्रंप के गुस्से को रोक देगा, खासकर तब जब कोई दर्शक मौजूद न हो। लेकिन इसका 'उल्टा असर हो गया।'

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बंद माइक्रोफोन की वजह से डोनाल्ड ट्रंप, बाइडेन के बोलते वक्त चुप थे, जिससे लोगों का ध्यान बाइडेन की लड़खड़ाहट पर बार बार जा रहा था।

कमला हैरिस की टीम 2020 में क्लीवलैंड में ट्रंप और बाइडेन की पिछली बहस को दोहराने की उम्मीद कर रही थी, जब ट्रंप ने बार बार हस्तक्षेप किए थे और वो अव्यवस्थित लग रहे थे। जिसने बाइडेन को बहस में आगे कर दिया था।

पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर मैथ्यू लेवेंडुस्की ने कहा, कि कमला हैरिस की एक और प्राथमिकता बहस के मंच का उपयोग अमेरिकी जनता के साथ खुद को स्थापित करने के लिए करना होगा।

कमला हैरिस ने अपना राष्ट्रपति अभियान सिर्फ सात हफ्ते पहले ही शुरू किया है। इसलिए उन्हें राष्ट्रीय सुर्खियों में आने के लिए ट्रंप की तुलना में काफी कम समय मिला है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का मानना है, कि कमला हैरिस काफी आक्रामक नजर आ सकती हैं और वो डोनाल्ड ट्रंप की बातों का जोरदार अंदाज में खंडन कर सकती हैं, जैसा उनका अंदाज रहा है।

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डोनाल्ड ट्रंप का 'सिक्स्थ सेंस'

इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव की बहस में सातवीं बार शामिल होने वाले हैं, जो अमेरिकी इतिहास में किसी भी उम्मीदवार से ज्यादा है।

एक्सपर्ट्स का मानना है, ये तजुर्बा डोनाल्ड ट्रंप को फायदा पहुंचा सकता है, बशर्ते वो स्थिर रहें। लेकिन, ट्रंप की मजबूती ये है, कि बहस चाहे जैसा भी है, उनके समर्थक उनका हर हाल में समर्थन करेंगे।

लिहाजा, जो भी नियम हैं, वे ट्रंप के लिए महत्वहीन हो गए हैं। उनके समर्थक मानते हैं, कि उन पर दबाव नहीं डाला जा सकता है, और उनका विरोध नहीं किया जा सकता है। लेकिन, एक्सपर्ट ये भी कहते हैं, कि ट्रंप के लिए जरूरी ये है, कि इस बहस के जरिए वो न्यूट्रल वोटर्स हैं, उन्हें अपनी तरफ खींचे।

अमेरिकी मामलों की जानकार पेरी का मानना है, कि ट्रंप ने 2016 में सिर्फ इलेक्टोरल कॉलेज की बदौलत राष्ट्रपति पद जीता था, जो भारित मतदान की एक प्रणाली है, जहां राज्य चुनाव परिणामों के आधार पर "निर्वाचकों" को सम्मानित किया जाता है। किसी दिए गए राज्य में सबसे ज्यादा वोट जीतने वाला उम्मीदवार अक्सर उस राज्य के सभी निर्वाचकों को जीत लेता है।

हालांकि, 2016 और 2020 दोनों में, ट्रम्प राष्ट्रीय लोकप्रिय वोट हार गए थे और दोनों ही बार अपने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में कम वोट हासिल किए थे।

इसका मतलब है, कि जीत सुनिश्चित करने के लिए ट्रंप को अभी भी अपने सबसे कट्टर आधार के बाहर के मतदाताओं को आकर्षित करने की आवश्यकता है।

2016 में ट्रंप के अप्रत्याशित बहस प्रदर्शन अमेरिकी राजनीति में उनके उल्कापिंड उदय के लिए जेट ईंधन साबित हुआ था। और ट्रंप हमेशा कैमरे के लिए तैयार रहते हैं और एक राजनेता के तौर पर, कैमरों के सामने महत्वपूर्ण क्षणों का लाभ उठाने के मामले में अजीबोगरीब प्रवृत्ति दिखाते रहते हैं, जैसा की जुलाई महीने में देखा गया था, जब जानलेवा हमले के बाद उन्होंने मुक्का बनाकर हाथ को हवा में उछाला था।

डोनाल्ड ट्रंप की वो तस्वीर पूरी दुनिया के अखबारों और सोशल मीडिया पर छा गया था और उनके लिए राजनीतिक तौर पर वो तस्वीर फायदेमंद साबित हुई है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, "डोनाल्ड ट्रंप बहस में भी ऐसा ही करते हैं। उनके पास यह जानने की एक मकड़ी जैसी छठी इंद्री है, कि कब बहस में कोई महत्वपूर्ण पल आने वाला है, जिसका वो जबरदस्त फायदा उठा सकते हैं, जो संभावित रूप से वायरल हो सकता है।"

एक्सपर्ट्स का मानना है, कि बहस के मंच पर दोनों ही नेता आक्रामक नजर आएंगे, लेकिन कमला हैरिस के लिए महत्वपूर्ण ये होगा, कि ट्रंप जब हमला करें, तो वो अडिग खड़ी रहें और खुद को साबित करें, कि हाई प्रेशर प्वाइंट पर भी वो गंभीरता से पेश आ सकती हैं।

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