कैलाश सत्यार्थी और मलाला को विश्व शाति का नोबेल अवार्ड दिया गया
ओस्लो। बंधुआ बाल मजदूरी के खिलाफ अपने अभियान के लिए कैलाश सत्यार्थी और मलाला युसुफजई को नार्वे की राजधानी ओस्लो में नोबेल अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस मौके पर बोलते हुए कैलाशजी ने कहा कि हमें एक ऐसे अभियान को शुरु करने की जरूत है जिससे एकभी बच्चा ऐसा न रह जाए जो बंधुआ मजदूरी की बेड़ियों में बंधे है। मलाला युसुफजई नोबेल अवार्ड पाने वाली सबसे कम उम्र की विजेता हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा गांधी के उस संदेश के साथ शुरु की गयी जिसमें उन्होंने कहा था कि ऐसी बहुत सी वजहें हैं जिनके लिए वह अपनी जान कई बार दे सकते हैं लेकिन दुनिया में ऐसी कोई वजह नहीं है जिसके लिए वह किसी के लिए जान ले ले। सत्यार्थी ने कहा कि आज दुनिया इतनी गरीब हो गयी है दुनिया के बच्चों के हाथों में खेलने के लिए खिलौना नहीं दे सकती है।
कार्यक्रम में पाकिस्तान के मशहूर सूफी गायक राहत फतेह अली खान और उस्ताद अमजद अली खान ने सरोद वादन की मोहक प्रस्तुति दी। वहीं इस मौके पर मलाला युसुफजई ने कहा कि वह दुनिया में बच्चों की शिक्षा के लिए काम करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान और भारत के संबंधों को बेहतर होते देखना चाहती हैं।












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