काबुल एयरपोर्ट पर अमेरिकी विमान से लटके लोगों का क्या हाल हुआ? लैंडिंग के बाद पता चली सच्चाई
नई दिल्ली, 18 अगस्त: अफगानिस्तान में हालात चिंताजनक बने हुए हैं, जहां पूरे देश पर तालिबानी लड़ाकों का कब्जा हो गया है। साथ ही वहां पर नई इस्लामिक सरकार के गठन प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इस बीच सोमवार को अफगान और अपने नागरिकों को निकालने के लिए अमेरिका का C-17 विमान काबूल एयरपोर्ट पहुंचा, उस दौरान कई लोग उसके पहिए और विंग पर लटक गए थे। जिनके अवशेष लैंडिंग के वक्त वायुसेना को मिले।

वीडियो हुआ था वायरल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक काबुल एयरपोर्ट पर जैसे ही अमेरिकी विमान रनवे पर आया, वैसे ही भीड़ ने उसे घेर लिया। कुछ लोग उसके पहिए और अन्य हिस्सों पर बैठ गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पायलट्स ने विमान को नहीं रोका। जब भीड़ को लगा कि अब प्लेन नहीं रुकेगा तो बहुत से लोग उतर गए, लेकिन कई लोग पहियो पर लटके रहे। इस घटना के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

पहियों में थे मानव अवशेष
वहीं जैसे ही विमान ने काबूल एयरपोर्ट से उड़ान भरी, वैसे ही दो लोग ऊंचाई से गिरकर मर गए। इसके बाद C-17 को कतर में लैंड करवाया गया, वहां पर जब वायुसेना के इंजीनियर्स ने जांच की, तो जहाज के पहियों पर मानव अवशेष मिले। मामले में अमेरिकी वायुसेना ने कहा कि वो उन परिस्थितियों की जांच कर रही है, जिसमें काबुल एयरपोर्ट से आए विमान के पहियों पर मानव अवशेष मिले हैं।

चालक दल ने टेकऑफ ठीक समझा
वहीं पूरे घटनाक्रम पर सफाई देते हुए वायुसेना ने कहा कि सोमवार को एक C-17 सैन्य विमान काबूल एयरपोर्ट पर उतरा। इसके तुरंत बाद सैकड़ों अफगान नागरिकों ने उसे घेर लिया, क्योंकि एयरपोर्ट परिसर में अव्यवस्था फैल गई थी। जब तालिबान ने राजधानी पर कब्जा किया, तो हजारों अफगान एयरपोर्ट पर पहुंच गए थे। वायुसेना ने आगे कहा कि विमान के चारों ओर तेजी से बिगड़ती सुरक्षा स्थिति का सामना करते हुए चालक दल ने जल्द से जल्द हवाई क्षेत्र से निकलने का फैसला किया। फिलहाल वो लोगों को हुए नुकसान की समीक्षा कर रहे हैं।

भारत ने भी C-17 से किया रेस्क्यू
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने भी देश के नागरिकों को अफगानिस्तान से निकालने का ऑपरेशन शुरू किया। इसके तहत सी-17 ग्लोबमास्टर विमान को काबुल भेजा गया था। जिसकी मदद से भारतीय राजदूत समेत 120 लोगों को वापस लाया गया। फिलहाल अभी भी करीब 2000 लोग वहां पर फंसे बताए जा रहे हैं।

उपराष्ट्रपति ने खोला मोर्चा
वहीं तालिबान की काबूल में एंट्री होते ही अशरफ गनी देश छोड़कर भाग गए। जिसके बाद अब उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने विद्रोहियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सबसे पहले उन्होंने खुद को अफगानिस्तान का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया। फिर ट्विटर पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि अफगानिस्तान के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति की अनुपस्थिति, पलायन, इस्तीफा या मृत्यु में एफवीपी कार्यवाहक राष्ट्रपति बन जाता है। मैं वर्तमान में अपने देश के अंदर हूं और वैध तरीके से देखभाल करने वाला राष्ट्रपति हूं। मैं सभी नेताओं से उनके समर्थन और आम सहमति के लिए संपर्क कर रहा हूं।












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