G7 Summit: बाइडेन और जेलेंस्की में 10 सालों के लिए डिफेंस डील, यूक्रेन को रूस के खिलाफ सैन्य मदद देगा US?
G7 Summit US-Ukraine Defence Pact: इटली में चल रहे जी7 शिखर सम्मेलन से इतर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की ने अमेरिका और यूक्रेन के बीच 10 सालों के लिए द्विपक्षीय सुरक्षा समझौता पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं, कि क्या रूस के खिलाफ यूक्रेनी सैनिकों की मदद अब अमेरिकी सैनिक करेंगे?
इस सुरक्षा समझौता के दौरान बातचीत में शामिल दोनों देशों के अधिकारी इस बात पर भी सहमत हो गये हैं, कि यूक्रेन के पुननिर्माण के लिए उसे 50 अरब डॉलर का पैकेज दिया जाएगा और ये पैकेज कैसे दिया जाएगा, इसे लेकर भी अधिकारियों के बीच सहमति बन गई है।

यूक्रेन को 50 अरब डॉलर की मदद देने के लिए काफी क्रिएटिव तरीका बनाया गया है, जिसके तहत यूक्रेन के लिए इंटरनेशनल मार्केट से 50 अरब डॉलर कर्ज लिए जाएंगे और वो पैसे यूक्रेन को दिए जाएंगे। इसके बाद रूस की संपत्ति, जिसे अमेरिका और यूरोपीय देशों ने जब्त कर रखी है, उससे मिले ब्याज से कर्ज की रकम चुकाई जाएगी। ऐसी रिपोर्ट है, कि रूस की संपत्ति से करीब 3 अरब डॉलर का ब्याज हर साल आता है।
इस द्विपक्षीय बैठक में शामिल अधिकारियों के मुताबिक, इस समझौते का भविष्य ये सुनिश्चित करना है, कि अमेरिका लगातार यूक्रेन की मदद करता रहे। दरअसल, इस समझौते की असली वजह ये है, कि इस साल 5 नवंबर को अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और माना जा रहा है, कि जो बाइडेन राष्ट्रपति चुनाव हार सकते हैं और डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा यूक्रेन को अरबों डॉलर की मदद देने का विरोध किया है। ऐसी स्थिति में, अगर डोनाल्ड ट्रंप अगले राष्ट्रपति बनते हैं, तो फिर उनका प्रशासन यूक्रेन को मदद रोक सकता है। लेकिन, अब दोनों देशों के बीच समझौता होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप के लिए ऐसा करना मुश्किल हो जाएगा।
व्लादिमीर पुतिन को बाइडेन का संदेश
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जेलेंस्की के साथ सुरक्षा समझौता पर दस्तखत करने के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है, कि "आप अमेरिका के हटने का इंतजार नहीं कर सकते हैं। आप हमें अलग अलग नहीं कर सकते हैं।"
दरअसल, यूक्रेन में रूस के 'सैन्य अभियान' के बाद अमेरिका और यूरोप ने अपने देशों में मौजूद रूसी संपत्तियों को जब्त करना शुरू कर दिया और ऐसा आकलन किया गया है, कि पश्चिमी देशों में रूस की 260 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति है और अमेरिका ने यूक्रेन की मदद करने के लिए रूसी संपत्ति का इस्तेमाल करने की योजना तैयार की है। इसके लिए रूसी संपत्ति से जो ब्याज मिलेगा, उससे यूक्रेन के लोग को चुकाया जाएगा। रूसी संपत्ति के इस्तेमाल का ये तरीका इसलिए आजमाया गया है, क्योंकि यूरोपीय अधिकारियों ने कहा था, कि रूसी संपत्ति का डायरेक्ट इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है और उस रास्ते में कई कानूनी अड़चनें हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिकारी ने इस डील की पुष्टि की है और कहा है, कि यूक्रेन को मदद के लिए जो ऋण दिए जाएंगे, उनमें एक बड़ा हिस्सा अमेरिका का होगा।
फिलहाल, इस सौदे को कानूनी रूप देने के लिए शिखर सम्मेलन से इतर दोनों देशों के अधिकारी बात कर रहे हैं। वहीं, व्हाइट हाउस ने कहा है, कि बाइडेन और जेलेंस्की के बीच हुआ ये समझौता, यूक्रेन को समर्थन देने की अमेरिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

क्या अमेरिका के सैनिक लड़ने जाएंगे यूक्रेन?
अमेरिका के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जेक सुलिवन ने इस समझौते के बाद कहा है, कि इस समझौते का यह मतलब नहीं है, कि अमेरिका के सैनिक रूसी सैनिकों से लड़ने के लिए यूक्रेन जाएंगे और बाइडेन ने इसको लेकर एक लाल रेखा खींच रखी है, जिसका मकसद दो परमाणु हथियार संपन्न देशों के बीच होने वाले सीधे टकराव को रोकना है।
लेकिन, अमेरिकी NSA ने कहा है, कि "इस डिफेंस डील का मकसद ये है, कि हम ये जताना चाहता है, कि अमेरिका, यूक्रेन के लोगों का समर्थन करता है और हम उनके साथ मजबूती से खड़े हैं और हम उनकी सुरक्षा की जरूरतों को पूरी करने के लिए लगातार उनके साथ खड़े हैं और यह समझौता, हमारी संकल्प को दिखाता है।"
अमेरिकी NSA ने कहा है, कि यूक्रेन को जब्त रूसी संपत्ति सें वित्तीय मदद देने का मतलब ये है, कि यूक्रेन अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरी कर सके। हालांकि, उन्होंने ये जरूर कहा, कि फिलहाल कितनी वित्तीय मदद दी जाएगी, ये आंकड़ा उनके पास है, लेकिन उन्होंने ये आंकड़ा सार्वजनिक बताने से इनकार कर दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया, कि यूक्रेन की मदद के लिए कई अन्य देशों से मदद ली जाएगी।
यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा है, कि जी7 के सभी देश, यूक्रेन को दिए जाने वाले वित्तीय पैकेज में योगदान देगा।
लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि यूक्रेन को मिलने वाली इस मदद को लेकर रूस की प्रतिक्रिया कैसी होने वाली है, क्योंकि पिछले ढाई सालों से यूक्रेन में जंग लड़ी जा रही है, लेकिन व्लादिमीर पुतिन अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए हैं। लिहाजा सवाल ये है, कि क्या व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन को लेकर अपनी रणनीति बदलने का फैसला करेंगे।
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