क्या सऊदी अरब ने की थी अलकायदा की मदद? 9/11 अमेरिकी हमले के सीक्रेट दस्तावेज होंगे सार्वजनिक
अमेरिका में लोगों का आरोप है कि अलकायदा की मदद सऊदी अरब सरकार के अधिकारियों ने की थी, इसीलिए अमेरिकी सरकारों ने अब तक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है।
वॉशिंगटन, सितंबर 04: अमेरिका में ट्विट टॉवर्स पर हुए आतंकी हमले में क्या सऊदी अरब ने आतंकी संगठन अलकायदा की मदद की थी? अब इस सवाल का जवाब बहुत जल्द मिलने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 9/11 अमेरिकी हमले से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के आदेश दे दिए हैं। अगले 6 महीने के अंदर बारी बारी से सभी सीक्रेट दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाएगा।
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सार्वजनिक होंगे सीक्रेट दस्तावेज
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जस्टिस डिपार्टमेंट और अन्य अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए हमले को लेकर एफबीआई की जांच से संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की छह महीने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। जो बाइडेन ने अमेरिका हमले के 20वीं बरसी से कुछ दिन पहले ऑर्डर पास किया है, जिसमें सुरक्षा एजेंसियों को तमाम सिक्रेट दस्तावेज सार्वजनिक करने के लिए कहा गया है। आपको बता दें कि 11 सितंबर को अमेरिका पर हुए आतंकी हमले का 20 साल पूरा हो रहा है। 20 साल पहले अमेरिका में इस्लामिक आतंकी संगठन अलकायदा ने आतंकवादी हमला कर दिया था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गये थे और हजारों लोग घायल हुए थे।

पीड़ित कर रहे थे मांग
अमेरिका पर हुए हमले में 3 हजार पीड़ित परिवार लगातार अमेरिकी राष्ट्रपति पर दवाब बना रहे थे कि तमाम सिक्रेट दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि इस बात का पता लग सके, कि क्या अमेरिका पर हुए हमले में सऊदी अरब का भी हाथ था? इसको लेकर 3 हजार पीड़ित परिवारों ने कड़े शब्दों में अमेरिकी राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी थी और जानबूझकर दस्तावेजों को गोपनीय रखने का आरोप लगाया था। अमेरिका में पीड़ित परिवारों का कहना है कि सऊदी अरब से संबंध खराब ना हो, इसके लिए अमेरिका की सरकारों ने अब तक हमलों से जुड़े तमाम दस्तावेजों को छिपाकर रखा है और जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं की गई है।

बाइडेन ने बनाया था चुनावी मुद्दा
आपको बता दें कि जो बाइडेन ने अमेरिका राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अमेरिकी लोगों से वादा किया था कि अगर वो चुनाव जीतते हैं तो अमेरिका पर हुए हमलों को लेकर तमाम दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाएगा। जो बाइडेन ने शुक्रवार को दिए बयान में कहा कि, ''जब मैं राष्ट्रपति पद के लिए कैम्पेनिंग कर रहा था, उस वक्त मैंने 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमलों पर दस्तावेजों के सार्वजनिकीकरण के संबंध में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई थी। जैसा कि हम उस दुखद दिन की 20 वीं वर्षगांठ के करीब पहुंच रहे हैं, मैं उस प्रतिबद्धता पर कायम हूं''। जो बाइडेन ने कहा कि, ''आज, मैंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसमें जस्टिस डिपार्टमेंट और अन्य संबंधित एजेंसियों को एफबीआई की 11 सितंबर की जांच से संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक करने के लिए समीक्षा और निगरानी करने के लिए कहा है''। कार्यकारी आदेश पर राष्ट्रपति के दस्तखत होने के बाद अटॉर्नी जनरल को अगले छह महीनों में सार्वजनिक रूप से दस्तावेजों को सार्वजनिक करनी होगी।

बाइडेन की हो रही थी आलोचना
आपको बता दें कि पिछले महीने करीब 1100 पीड़ति परिवारों ने जो बाइडेन को कड़े शब्दों में चिट्ठी लिखी थी और कहा था कि अगर वो अपने वादे को पूरा नहीं कर पाते हैं, अगर वो हमले से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक नहीं करते हैं, तो फिर उन्हें 11 सितंबर को हमले में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देने का कोई हक नहीं है और उन्हें मेमोरियल कार्यक्रम रद्द कर देना चाहिए। पीड़ित परिवारों की चिट्ठी में कहा गया है कि ''2004 में 9/11 कमीशन की अंतरिम रिपोर्ट में सामने आया था कि अमेरिका पर हुए हमले नें सऊदी अरब सरकार के अधिकारियों का समर्थन देने से संबंधित सबूत सामने आए थे।'' चिट्टी में आरोप लगाया गया था कि ''एफबीआई के अधिकारी, जस्टिस डिपार्टमेंट और कई अमेरिकी अधिकारी नहीं चाहते हैं कि अमेरिका पर हुए हमले के दस्तावेजों को अमेरिकी लोगों के सामने सार्वजनिक किया जाए।''

अलकायदा ने किया था हमला
आपको बता दें कि अलकायदा ने अमेरिका पर 9 सितंबर 2001 को भीषण हमला किया था और उस हमले में करीब 3 हजार लोग मारे गये थे और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। हमले का मास्टरमाइंड सउदी अरब का रहने वाले कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन था, जो उस वक्त अफगानिस्तान में छिपा हुआ था। और उस वक्त अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार थी और तालिबान ने ओसामा बिन लादेन को सौंपने से इनकार कर दिया था। जिसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला कर दिया था और अब 20 सालों के बाद अमेरिकी फौज अफगानिस्तान से बाहर निकली है।
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