कैलिफोर्निया में मिले अमेरिका और चीन के राष्ट्रपति, जो बाइडेन ने शी जिनपिंग को फिर क्यों कहा तानाशाह?
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बुधवार देर रात रात कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में मुलाकात की। यह मुलाकात APEC यानी एशिया-पैसिफिक इकोनॉमिक कोऑपरेशन समिट से अगल हुई।
बाइडेन और जिनपिंग के बीच हुई यह बातचीत इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि इसके जरिए दोनों देशों के बीच पिछले कुछ समय से जारी तनाव को कम किया जा सकता है।

इस हाई लेवल समिट मिटिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाथ मिलाया और 4 घंटे तक चली बातचीत में दोनों नेताओं ने तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने का वादा किया।
दोनों नेता एक साल में पहली बार बुधवार को सैन फ्रांसिस्को से लगभग 40 किलोमीटर (25 मील) दक्षिण में स्थित फिलोली एस्टेट में मिले थे। दोनों राष्ट्राध्यक्षों की बैठक का पहला चरण करीब 2 घंटे तक चला। इससे पहले दोनों नेता आखिरी बार नवंबर 2022 में बाली में G20 समिट में मिले थे।
इस शिखर सम्मेलन के बाद लगभग 20 मिनट तक चले एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने अपनी बात रखी है। अमरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच मिलिट्री कम्युनिकेशन फिर से बहाल होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे और शी जिनपिंग संचार के और सीधे रास्ते बनाए रखेंगे।
बाइडेन ने कहा कि दोनों देशों के बीच की 'प्रतिस्पर्धा' को 'संघर्ष में नहीं बदलना चाहिए'। उन्होंने कहा, "मैं इस बातचीत को महत्व देता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि यह सबसे अहम है कि मैं और आप बिना गलतफहमी के एक-दूसरे को अच्छे से समझें।''
सोशल मीडिया पर जो बाइडेन ने कहा कि वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बातचीत को महत्व देते हैं। बाइडेन ने लिखा, "मुझे लगता है कि यह सर्वोपरि है कि हम एक-दूसरे को स्पष्ट रूप से समझें। ऐसी महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियाँ हैं जो हमारे संयुक्त नेतृत्व की मांग करती हैं। और सच कहें तो आज, हमने वास्तविक प्रगति की है।"
बाइडेन ने कहा दोनों नेताओं ने हर हाल में बातचीत जारी रखने की प्रतिज्ञा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि दुर्घटनाएं और गलतफहमियां होती रही हैं, इसलिए हम प्रत्यक्ष आधार पर सीधे, खुले, स्पष्ट संचार की ओर वापस आ गए हैं।
जो बाइडेन ने कहा कि दोनों पक्षों ने कई वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें रूस की "यूक्रेन में आक्रामकता का क्रूर युद्ध" और गाजा में संघर्ष शामिल है।
बाइडेन ने कहा, जैसा कि मैं हमेशा करता हूं, मैंने उन क्षेत्रों को उठाया जहां अमेरिका को [पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना] के कार्यों के बारे में चिंता है," इसमें अमेरिकी नागरिक भी शामिल हैं जिन्हें गलत तरीके से हिरासत में लिया जा रहा है।
बाइडेन ने कहा कि उन्होंने शी को उन व्यक्तियों के नाम दिए जिन्हें हिरासत में रखा गया है और उन्हें उम्मीद है कि उन्हें रिहा कर दिया जाएगा, लेकिन वे इस पर किसी समझौते पर नहीं पहुंचे।
बाइडेन का कहना है कि दोनों पक्षों ने अमेरिका-चीन संबंधों में एक प्रमुख संघर्ष ताइवान के बारे में भी बात की। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, कि उन्होंने ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता के महत्व पर जोर दिया।
इसके साथ बाइडेन ने शी को बताया कि अमेरिका, अमेरिका-ताइवान संबंधों की यथास्थिति को बदलना नहीं चाहता है, "यह उस सीमा के बारे में है जिस पर हमने चर्चा की"। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब वे मंच से बाहर जा रहे थे, तब बाइडेन से एक रिपोर्टर ने पूछ दिया कि क्या वह अब भी शी को तानाशाह कहेंगे?
इस पर बाइडन ने एक बार फिर दोहराया है कि शी जिनपिंग तानाशाह हैं। जो बाइडन ने कहा, "वो इस अर्थ में तानाशाह हैं कि वो ऐसे देश की सत्ता संभालते हैं जो एक कम्युनिस्ट देश है, जो सरकार के एक ऐसे स्वरूप पर आधारित है जो हमसे पूरी तरह अलग है।"
इसी साल के मध्य में जो बाइडन ने शी जिनपिंग को तानाशाह कहा था, जिसके बाद चीन ने उस टिप्पणी को 'बहुत बेतुका और गैर-ज़िम्मेदाराना' करार दिया था।












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